आंटी की चूत की खुजली

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हैलो दोस्तो, अजय बाबा का सभी पाठकों को प्यार भरा नमस्कार। मैं अपना यह पहला वाकिया लिख रहा हूँ.. मुझसे जो भी गलती हो.. उसे माफ करियेगा।
आप लोगों को पहले जरा अपने बारे में बता दूँ कि मैं एक 25 साल का युवक हूँ, मेरी हाईट 5’6” इन्च और लन्ड का साइज 7’5” इन्च लम्बा है।

मैं अपने जीवन की एक सही घटना बताने जा रहा हूँ। यह घटना आज से एक साल पहले की है। जब मैं अपनी ग्रेजुएशन खत्म करके गुजरात के वापी शहर में गया।

मैं अपने दोस्तों के पास गया था.. इधर आए हुए मुझे दस दिन हो गए थे.. तब जा के मुझे एक कम्पनी में सुपरवाइजर का काम मिला।

मैं 8 बजे काम पर जाता और शाम को 5:30 बजे आता था। कमरे पर आता.. तो फ्रेश हो कर अपने दोस्तों से मिलने अपनी सोसाइटी के सामने एक हेयर कटिंग सैलून था.. वहाँ चला जाता था, फिर एकाध घण्टे के बाद वापस चला आता था।

एक दिन मैंने देखा कि एक आन्टी मुझे देख कर हँस रही थीं.. तो मैंने बहुत अधिक ध्यान नहीं दिया और अपने कमरे पर चला गया।
फिर अगले दिन मैं शाम को फिर गया तो आन्टी अकेली आ रही थीं।
वापस मुझे ही देख कर हँस रही थीं.. तो मैं भी उन्हें देख कर हँस दिया।

मैं आप लोगों को आन्टी के बारे में बता दूँ कि वो एक मस्त माल दिखती थी। उसका रंग हल्का सांवला था.. शरीर से 34-32-38 की फिगर वाली मदमस्त माल दिखती थी।

पीछे से क्यां गाण्ड मटका कर चलती थी कि उसे देख कर किसी बूढ़े का लन्ड भी खड़ा हो जाए। उनकी उम्र देखने 27 साल की दिखती थी। वापस अगले दिन मैं वहाँ खड़ा था.. तो देखा कि आज भी आन्टी अकेले आ रही है.. और मुझे देख रही है। तो मैं भी उसे देखने लगा।

फिर मैं भी आन्टी को लाइन मारने लगा.. और मैं आन्टी के पीछे चल दिया। मैंने देखा कि आन्टी सब्जी ले रही है.. तो मैं उधर एक पानीपूरी वाले के पास जा कर खड़ा हो गया.. क्योंकि पानीपूरी वाले के पास भीड़ थी..

जब वो खाली हुआ तो कुछ देर में आन्टी भी मेरे पास आ गई।
फिर हम दोनों ने साथ में 5-5 रूपए की पानी पूरी खाईं।
मेरे पास सौ का नोट था तो मैंने दिया.. पानी पूरी वाले ने कहा- छुट्टा पैसा दो..

उस पर आन्टी ने अपने पर्स से छुट्टा पैसा निकाल कर दोनों लोगों का दे दिया।
मुझसे मुस्कुरा कर बोली- आप कल दे देना..
फिर क्या. हम दोनों वहाँ से निकल आए.. बाद में आन्टी मुझसे मेरे बारे में पूछने लगी।

मैंने अपने बारे में उसे बताया.. जब मैंने उनके बारे में पूछा.. तो उसने अपने बारे में बताया कि उसकी एक लड़की है और पति है।

हम दोनों साथ-साथ चल रहे थे। जब मैं अपनी सोसायटी को जाने के लिए रुका.. तो वह भी रुक गई। फिर उसने मुझसे मेरा मोबाईल नम्बर माँगा.. तो मैंने भी सोचा कि चलो दे दो.. आन्टी चुदना चाहती होगी।
मैंने भी झट से अपना नम्बर दे दिया।

फिर अगले दिन मैं जब कम्पनी में था तो उसका फोन आया।
मैं- हैल्लो.. कौन?
उधर से आन्टी की अवाज आई- क्या पहचान नहीं रहे हो?
तो मैं बोला- हाँ.. पहचान लिया आन्टी.. बोलिए.. क्या हाल है?
आन्टी बड़ी उदासी से बोली- कट रही है..
मैंने पूछा- क्या हुआ.. कोई बात है क्या?
आन्टी ने बोला- कुछ नहीं.. बस तेरी याद आ रही थी तो फोन कर लिया।
फिर हाल-चाल पूछ कर उसने फोन रख दिया।

अगले दिन बुधवार था.. मेरा छुट्टी का दिन था। तो मैं 9 बजे सो कर उठा.. बाद में बाथरूम जा कर नहा-धो कर.. कपड़े आदि पहने कर नास्तां कर रहा था.. और साथ में टीवी देख रहा था।
तभी आन्टी का फोन आया.. आन्टी ने पूछा- क्या कर रहे हो?
मैं बोला- कुछ नहीं.. क्यों कुछ काम है?
आन्टी का जवाब आया- कुछ नहीं.. मैं भी अकेली बोर हो रही हूँ।
फिर मैंने पूछा- आपकी लड़की और पति कहाँ हैं?

तो आन्टी बोली- बेटी स्कूल गई है.. और तुम्हारे अंकल कम्पनी गए हैं।
मैंने वापस पूछा- बेटी कब तक आएगी?
आन्टी ने बताया- वो 2 बजे तक आएगी और तुम्हारे अकंल तो 8 बजे रात से पहले आते ही नहीं हैं।
फिर मैंने मजाक किया- मैं भी अकेले टीवी देख रहा हूँ।

आन्टी ने कहा- तो मेरे घर आ जाओ.. बैठ कर बात करते हैं।
मैंने बोला- मैंने आपका घर तो देखा ही नहीं.. तो कैसे आ जाऊँ।
आन्टी ने झट से अपना पता बताया जो कि मेरे कमरे से ज्यादा दूर नहीं था।

मैंने अपने कमरे के पाटर्नर से बोला- मुझे जरा टाइम लगेगा.. मैं एक दोस्तस से मिल कर आता हूँ।
फिर क्या था.. मैं आन्टी के बताए पते पर चल दिया। जब उनके घर के पास पहुँचा तो देखा कि आन्टी बाहर ही एक मस्त पीले रंग की साड़ी पहन कर खड़ी थी।
उसने मुझे देख कर मुस्कराते हुए इशारा किया और घर में चली गई।
मैं भी उसके पीछे-पीछे घर में चला गया.. क्योंकि बाहर कोई नहीं था।

हम दोनों लोग जब घर के अन्दर पहुँचे.. तो आन्टी ने दरवाजा बन्द कर दिया।
अब उसने मुझे बैठने के लिए बोला.. तो मैं जाकर उनके बिस्तर पर बैठ गया।

आन्टी मेरे लिए पानी लेने के लिए रसोई में जा रही थी.. तो मैं उनकी पीछे से मटकती गाण्ड देख कर मस्त हो रहा था।
उनकी मटकती जवानी को देख कर मेरा भी लन्ड अन्दर से सलामी देने लगा.. तो मैं भी आन्टी के पीछे रसोई में चला गया।
मैंने उनको पीछे से पकड़ लिया.. तो आन्टी कहने लगी- आराम से.. पहले पानी तो पियो.. बाद में कमरे में चलते हैं।

फिर क्या था.. मैं बोला- मैं पानी तो पी कर आया हूँ.. अब तो तुम्हारा रस पीना है..
मैं बेताबी से आन्टी को किस करने लगा.. आन्टी भी मेरा सा‍थ देने लगी।
फिर उनको कमरे में ले कर आया और हम दोनों बिस्तर पर लेट गए।

अब हम दोनों लोग मुँह में मुँह डाल कर किस कर रहे थे। फिर मेरा एक हाथ उनके ब्लाउज के ऊपर से ही उनके बड़े–बड़े चूचों को दबाने लगा..
उनकी सिसकारी निकलने लगी- आह उह आहउह..
वो बोलने लगी- आह्ह.. रगड़ डालो.. मेरे राजा..

उसके बाद मैंने उनका पूरे कपड़े.. ब्लाउज और साड़ी वगैरह निकाल दी.. वो केवल ब्रा और पेटीकोट में दिख रही थी।
उसके बाद उसने भी मेरी टी-शर्ट और पैन्ट निकाल दिया.. मैं भी बस अंडरवियर में हो गया था।

आन्टी ने मेरे अन्डरवियर में हाथ डाल कर मेरा लन्ड पकड़ लिया और बोली- वाह.. इतना बड़ा.. और मोटा भी.. तेरा मस्त लौड़ा है.. आज तो मेरी चूत की खुजली मिट ही जाएगी।

फिर क्या था.. मैंने भी किस करना बंद कर दिया और उसकी बड़ी चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा। इसी के साथ मैंने अपना एक हाथ उनकी चूत पर रखा.. तो मुझे कुछ गीला सा महसूस हुआ।
आन्टी ने अन्दर पैंन्टी भी नहीं पहनी थी।
फिर तो मैंने जल्दी से उसका पेटीकोट और ब्रा दोनों को एक साथ ही निकाल दिया।
चूत को देखा.. तो सफाचट मैदान था.. उस पर एक भी बाल नहीं था.. ऐसा लग रहा था कि कल का ही साफ किया है।

आन्टी मेरा अन्डरवियर निकाल कर मेरे लन्ड को सहला रही थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।
फिर हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए।

मैं उनकी चूत के दाने को अपने मुँह से लगा कर जीभ से चाटने लगा.. तो वह सिसकारी लेने लगी और बड़बड़ाने लगी- आह्ह.. खा जाओ इसे.. बहुत खुजली हो रही है.. आह्ह.. अब नहीं रहा जा रहा है.. डाल दो अपना लन्ड.. मेरी चूत में.. और सारी खुजली मिटा दो..

फिर मैंने भी अपना लन्ड आन्टी के मुँह में डाल दिया और आन्टी के मुँह को ही चोदने लगा।
दो मिनट बाद लौड़ा मुँह से बाहर निकाल कर आन्टी से पूछा- डार्लिंग कन्डोम है क्या?
तो आन्टी ने बोला- कन्डोम की कोई जरूरत नहीं है.. मुझे एक और बच्चा चाहिए।
फिर मैं सोचने लगा- चलो जो होगा.. देखा जाएगा।

फिर क्या.. मैंने आन्टी की चूत पर अपना लन्ड सैट करके एक जोर का झटका मारा.. जिससे मेरा आधा लन्ड अन्दर चला गया। आन्टी भी जरा कसमसाने लगी और वो बोल रही थी- आराम से चोद.. एक साल हो गए.. तेरे अकंल चुदाई ही नहीं करते हैं.. क्योंकि उनका अब खड़ा ही नहीं होता है।

आन्टी मजे में सिसकारी ले रही थी- आहआह.. उहउह… फाड़ दे.. अपनी आन्टी की चूत को.. आह्ह..
फिर मैंने एक और जोर का झटका मारा और सारा लन्ड चूत में समा गया।
मैंने देखा कि आन्टी की आँखों से आँसू निकल रहे थे, वो दर्द से ‘आह उह आह उह…’ कर रही थी।

मैं कुछ देर तक रुका रहा.. फिर आन्टी का दर्द थोड़ा कम हुआ तो.. मैंने अपनी चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी। अब आन्टी भी अपनी गाण्ड हिला हिला कर साथ देने लगी।
करीब बीस मिनट की चुदाई में वो दो बार झड़ गर्इ थी। मुझे लगा कि आन्टी वापस झड़ने वाली है.. तो मैं भी और तेजी से चोदने लगा।
फिर 5 मिनट बाद मेरा भी माल निकलने वाला था तो मैंने पूछा- आन्टी कहाँ निकालूँ?

आन्टी ने कहा- अन्दर ही निकाल दो.. शायद.. इस बार मैं प्रेगनेन्ट हो जाऊँ।
फिर तो चार-पांच तेज झटके मार के मैंने अपना रस चूत के अन्दर ही निकाल दिया और आन्टी भी तीसरी बार मेरे साथ ही झड़ गई।

हम दोनों लोग एक-दूसरे से 5 मिनट तक चिपके रहे.. बाद में आन्टी खड़ी होकर बोली- आज तुमने मुझे बहुत बड़ा सुख दिया है।
मैं मुस्कुरा दिया.. वो बाथरूम में चली गई, मैं भी साथ में चला गया।

जब देखा तो आन्टी अपनी चूत को पानी से धो रही है.. तो मैं भी अपना लन्ड उनके सामने करके खड़ा हो गया।
आन्टी मेरे लन्ड को भी साफ करने लगी। जिससे मेरा लन्ड खड़ा हो गया.. तो वापस मैंने एक बार फिर से उनकी बाथरूम में ही उनकी चूत मारी।

इस बार तो काफी देर तक अलग-अलग पोजीशन में करके उसको हचक कर चोदा।
इस बीच आन्टी दो बार झड़ गई थी और बोलने लगी- रहने दे.. दर्द हो रहा है.. अपना लंड जल्दी से बाहर निकालो..
मैंने भी कुछ और करारे शॉट लगाए और चूत में ही झड़ गया।

फिर हम दोनों फ्रेश हो कर निकले और अपने-अपने कपड़े पहन लिए।
अब मैंने समय देखा तो एक बज रहे थे।

मैं अपने कमरे पर आने लगा तो आन्टी ने मुझे रोक कर अपने पर्स से दो हजार रुपए निकाल कर दिए.. मैं ‘ना’ करने लगा.. तो आन्टी बोली- रख लो.. काम आएंगे।
मैंने भी चूत-चुदाई का मेहनताना समझ कर रख लिए।

उसको एक पप्पी करके अपने कमरे पर जाने लगा.. तो आन्टी ने कहा- अब कब आओगे?
तो मैंने कहा- जब आप कहोगे.. पर इस बार आपकी गाण्ड मारूँगा..
तो कहने लगी- ठीक है.. सब तुम्हारा ही तो है.. मार लेना।
‘ठीक है.. तो अगले बुधवार को मिलते हैं।’
फिर मैं आ गया।

आप लोगों को मेरा ये अनुभव कैसा लगा.. अपनी राय जरूर दीजिएगा।
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