दीदी की शादी में मेरी चुदाई – मैं अपने चूतड़ उठा उठा के उसका साथ देने लगी

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हाई फ्रेंड्स मेरा नाम नेहा हैं और यह मेरी जिन्दगी की एक सच्ची कहानी हैं. अगर आप को यह कहानी पसंद आये तो मुझे कमेन्ट जरुर भेजना. ये स्टोरी मेरी सिस्टर की मेरेज की हैं. हम लोग पटना बिहार के हैं. मेरी एज 21 हैं और मेरी सिस्टर की 24. मेरे जीजू एक कंपनी में जॉब करते हैं. वो दिखने में हेंडसम हैं. दीदी के मेरेज में जब वो लोग आये थे तो साथ में उनका एक फ्रेंड भी था. उन्होंने जब मुझे देखा तो देखते ही रह गए. मेरा फिगर 34-28-32 हैं. मेरा रंग साफ़ हैं और आँखे गोल हैं. जीजू के दोस्त का नाम रोहन था. मेरी फ्रेंड ने मुझे बताया की देख तेरे जीजू का दोस्त तुझे ही घुर रहा हैं. मैंने उसके सामने देखा तो उसने स्माइल दे दी, उसकी स्माइल मस्त थी.

मैंने भी सामने स्माइल दे दी, और फिर वो मुझ से बातें करने का मौका तलाशने लगा. जब भी मैं उनसे मिली तो उन्होंने हाई बोला, तो मैं भी हाई का रिप्लाय देने लगी. फिर उन्होंने इधर उधर की बातें स्टार्ट की और मुझे बताया की वो जीजू के साथ ही जॉब करते हैं. हम में अच्छी जमने लगी और वो शादी के अगले दिन की शाम को मेरे कमरे में आये थे. जब मैं उन्ही अपनी साडी वाली ड्रेस दिखा रही थी तो उन्होंने मुझे कहा, तुम तो कल क़यामत ही ढाओगी इसका मतलब.

मैंने हंस के पूछा, मतलब?

अरे तुम्हारा फिगर इतना सेक्सी हैं और फिर यह स्लीवलेस ब्लाउजवाला ड्रेस तो बहुत जचेगा तुम्हारें ऊपर.

मैं शर्म के मारे हंस पड़ी और ड्रेस को वापस बेग में डालने लगी. मेरी सहेलियां सभी बाजू के कमरे में महंदी लगवा रही थी. रोहन मुझे बड़े ही सेक्सी अंदाज से देख रहा था. उसकी निगाहें कभी मेरी छाती पर होती थी तो कभी वो मेरे होंठो को गौर से देखता था. फिर हम दोनों की नजर एक हुई और उसकी आँखों में ढेर सारा प्यार था. मैंने घबरा के अपनी आँखे निचे की और उसने मेरा हाथ पकड लिया.

नेहा, आई लव यू!

क्या?

हाँ, नेहा तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, जब से तुम्हे पहली बार देखा तभी से लव हो गया हैं!

मैं हंसने लगी और उसने मुझे अपनी और खिंच लिया. मैं जैसे डोर की तरह उसके करीब आ गई.

तुम्हारा जवाब क्या हैं, नेहा?

मैं क्या जवाब दूँ रोहन, मुझे भी तुम अच्छे लगते हो.

अभी तो मेरा बोलना खत्म भी नहीं हुआ था की उसके होंठ मेरे होंठो पर आ गए. उसकी साँसे मेरी साँसों से टकराने लगी और उसके हाथ मेरी कमर के दोनों तरफ थे. उसने मुझे जोर से किस किया और मेरे बदन से जैसे की खून को बदल के उसकी जगह ठंडा पानी भर दिया गया था. बदन में एक जोर का कंपन हुआ और मैं बिना पंख के उड़ने लगी. शायद यह सब मेरे पहले लिप किस का इफेक्ट था. रोहन के हाथ मेरे बालों में थे और वो मुझे अभी भी किस कर रहा था. मैंने फट से उसे अपने से दूर किया और वो अपने होंठो पर लगी लिपस्टिक को साफ़ करने लगा.

नेहा, क्या हुआ?

अरे यहाँ महमानों से भरा पड़ा हैं घर कभी भी कोई आ सकता हैं.

उसने रोनी सी सूरत बनाई और बोला, यार लेकिन फिर तो हम दिल्ली चले जायेंगे ना.

उसने फिर मेरा हाथ पकड के खिंचा और अब की मेरी चुंचियां उसके सीने से टकरा गई. उसने मुझे किस करना चाहा लेकिन मैंने उसे रोका, रोहन यहाँ कोई आ जायेंगा यार.

अब नहीं रहा जाता तुम्हे गले लगाए बिना.

समझो ना मेरी बात को!

नहीं समझता मैं कुछ भी.

ओके, मैं कुछ करती हूँ.

मैं कमरे से बहार आई और मुझे सामने की लाइन में रहती गंगा मौसी मिली. मैंने मौसी को कहा की मुझे कुछ काम हैं और उसके घर की चाबी चाहिए. गंगा मौसी उन दिनों अकेली थी क्यूंकि उनका बेटा और बहु हनीमून के लिए गोवा गए हुए थे. मौसी ने अपने ब्लाउज से बटवा निकाला और चाबी मुझे दे दी. मैं अपने कमरे में वापिस आई और रोहन को कहा की सामने जो ब्ल्यू दरवाजे वाला घर हैं उसकी साइड में एक विंडो पड़ता हैं वहां से अंदर आ सकते हो तुम?

पता नहीं मैं भी जैसे उसके गले लगने के लिए बेताब सी हुई थी. हमारें घर में लड़कियों के ऊपर वैसे बहुत पाबंदियां हैं और सिर्फ शादी ब्याह में ही हम लडको से बात करती थी. और मैं भी इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहती थी.

रोहन बोला, तुम कहो तो आज मैं जहन्नम में भी आ जाऊँगा.

मैं गंगा मौसी के घर गई और वो खिड़की को खोल के साइड में खड़ी रही. रोहन ने मौका देख के अंदर एंट्री की और मैंने फट से खिड़की को बंध कर दिया. रोहन फट से मुझे चिपक गया और उसके होंठ वापस मेरे होंठो पर थे. उसके हाथ मेरी कमर पर थे और वहाँ पर वो हलके हलके मसल रहा था. मुझे बहुत मस्त लगा जब उसके हाथ मेरी कमर को ऐसे छू रहे थे. उसकी जबान अब मेरी जबान के साथ थी और वो मुझे जोर जोर से चूस रहा था. मैं कुछ समझू उसके पहले ही उसने किस को छोड़ के मेरी बड़ी चुंचियां दोनों हाथों से दबा दी. मुझे दर्द हुआ और मैं कराह उठी.

यह क्या कर रहे हो रोहन?

कुछ नहीं, प्यार करूँगा तो पूरा जान.

मैं जानती थी लेकिन फिर भी थोडा तो एक्टिंग करना पड़ता हैं ना. उसके हाथ दोनों चुन्चियों को जोर जोर से दबाने लगे और मुझे सच में बहुत मजा आ रहा था. फिर उसने मेरी टॉप को कमर के आगे से पकड़ा और उसे ऊपर करने लगा. मैंने उसकी मदद करने के लिए हाथ ऊपर कर दिए. उसने टॉप निकाल के उसे वही टांग दिया. अब मैं काली ब्रा में थी उसके सामने. वो मेरी चुन्चियों को ऐसे देख रहा था जैसे की उन्हें अभी खा लेंगा. उसके हाथ मेरी चुन्चियों को दबाने लगे और मैंने पीछे से ब्रा का हुक खोल दिया. ब्रा निचे गिर पड़ी और अभी तक सीना ताने हुए बूब्स भी झूल पड़े. मेरे बूब्स हैं ही इतने बड़े की वो खड़े नहीं रह सकते. रोहन के मुहं में चुंचियां देख के पानी आ गया और उसके होंठ मेरी निपल्स को चूसने लगे. वो एक चूंची को चूसने लगा और दूसरी चूंची को उसी वक्त अपने हाथ से दबाने लगा. बाप रे कितना मजा आ रहा था उसके होंठो के स्पर्श से.

मेरी योनी भीगने लगी थी और ऐसा अहसास हो रहा था जो मासिक के वक्त होता हैं. रोहन ने चुंचियां चूसते हुए मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपने लिंग के ऊपर रख दिया. उसका लिंग बहुत मोटा था और उसकी गर्मी पेंट के ऊपर से भी महसूस हो रही थी. मैंने लिंग को दबाया और रोहन की सिसकी निकल पड़ी. मैं पेंट की ज़िप को खोल के लिंग को बहार कर दिया. बाप रे कम से कम 8 इंच का था वो. रोहन ने अब चुंचियां चुसनी छोड़ दी और अपनी पेंट का बटन खोल के उसे उतार दी. मैं उसके लिंग को पकड के हिला रही थी. रोहन का हाथ अब मेरी सलवार में होता हुआ मेरी भीगी हुई योनी पर पहुँच गया. वो उसे सहलाने लगा. योनी के दाने को वो पकड़ता तो मुझे ऐसा लगता की बदन में करंट दिया गया हो.

उसने मुझे कहा, लंड मुहं में ले लोना मेरा.

मैंने कहा, नहीं नहीं मैं यह सब नहीं करुँगी गंदी गंदी चीजें.

वो हंस पड़ा और उसने मेरा नाड़ा खोल दिया. मेरी पेंटी को उसने उतारा और मेरी योनी को गौर से देखने लगा. फिर उसके होंठो से मेरे कानो के ऊपर किस करने लगा और अपनी ऊँगली से योनी के अंदर खुजाने लगा. बहुत आनंद मिल रहा था मुझे. रोहन ने अब मुझे हाथ पकड के वही पड़ी हुई एक चारपाई में खिंचा. मैं जैसे ही चारपाई में लेटी उसने मेरी टाँगे खोल दी और बोला, मैं तो चूस सकता हूँ ना चूत को.

ऐसा सब अच्छा नहीं लगता हैं मुझे रोहन.

अरे बहुत मज आएगा तुम्हे मेरी जान.

और वो सीधा मेरी योनी को अपने होंठो और जबान से चूसने और चाटने लगा. मुझे इतना मजा आ रहा था की क्या बताऊँ आप लोगों को. बदन का एक एक हिस्सा जैसे तडप रहा था अब. रोहन ने जबान जब पूरी योनी के छेद में डाली तो मैं अपनेआप को रोक नहीं पाई. मैंने उसके माथे को पकड के उसके बालों को जोर जोर से नोंचना चालू कर दिया. रोहन अब अपनी एक ऊँगली से योनी को छेदने लगा और साथ में जबान से अंदर से निकलते हुएरस को चाटने लगा. अब मेरी परिस्थिति बर्दास्त के बहार हुई थी. मैं चाहती थी की वो अपना लिंग मुझे दे दे जल्दी जल्दी से. लेकिन रोहन पूरी पांच मिनिट और मेरी योनी को चूसता रहा. तभी मेरे बदन ने झटका दिया और मैं झड़ पड़ी. रोहन ने योनी को मस्त चाट के साफ़ किया और फिर वो उठा.

उसने मेरी और देखा और मैं स्माइल देने लगी. उसने अपने लिंग को हाथ में पकड के हिलाया और वो मेरे मुहं के पास आया. मुझे लगा की वो लिंग मुहं में देना चाहता हैं इसलिए मैंने मुहं को बंध कर दिया. लेकिन उसने मेरी एक चूंची को पकड़ी और लिंग को मेरी निपल के ऊपर घसने लगा. बाप रे क्या फिलिग़ थी वो, मुझे जन्नत का अहसास हो रहा था. रोहन ने दोनों निपल्स को ऐसे किया जिस से निपल्स बहुत ही अकड गए. फिररोहन ने मेरी टाँगे खिंच के मेरी चूतड को चारपाई के एंड वाले हिस्से में सेट किया. मेरी टाँगे जमीन पर थी और चूतड़ वाला हिस्सा चारपाई के ऊपर.

वो मेरी योनी को हाथ से सहलाने लगा और उसका पानी निकलना फिर से चालु हो गया. अब उसने धीरे से अपना लिंग योनी पर रखा और मुझे किस करते हुए एक झटका मारा. मुझे बहुत ही दर्द हुआ जब उसका आधा लिंग मेरी योनी में घुसा. मैं चीख पड़ी और नाख़ून से उसकी गर्दन को खुरचने लगी. रोहन कुछ देर रुका और फिर उसने मुझे चुन्चियों पर चूमा. एक मिनिट में मुझे कुछ राहत हुई और फिर उसने एक झटके में पूरा लिंग अंदर कर दिया. बाप रे ऐसे लग रहा था की अंदर किसी ने जलती लकड़ी डाल दी हो. रोहन अब मुझे जोर जोर से किस करने लगा और लिंग को धीरे धीरे से अंदर बहार करने लगा. उसका लिंग बहुत ही गर्म था और वो जैसे मेरी योनी को पिगला रहा था. उसके हाथ मेरी  चुंचियां मसलने लगे और रोहन मेरी योनी को जोर जोर से ठोकने लगा. मुझे भी अब बड़ा मजा आने लगा था और मैं भी अपने चूतड़ उठा उठा के उसका साथ देने लगी थी. उसकी स्पीड अब धीरे धीरे बढ़ने लगी और वो मुझे किस कर रहा था, चुंचियां दबा रहा था और मेरी चुदाई कर रहा था.

रोहन अब जोर जोर से आह आह की आवाजें कर रहा था और मैं भी मीठी मीठी कराह रही थी. तभी उसके लिंग से पानी निकला और मेरी योनी में अजब सा सुकून मिला. मेरी योनी भी कुछ प्रवाही निकालने लगी और जब दोनों का सेक्स रस मिला तो हम दोनों ही तृप्त हो गए. रोहन ने मुझे किस की और वो उठ खड़ा हुआ.

नेहा, यहाँ मेडिकल कहाँ पर हैं?

यही बाजू की गली में हैं.

मैं तुम्हारे लिए गोली ले आऊंगा अभी, उसे खा लेना. मैं नहीं चाहता की तुम्हे गर्भ रह जाएँ.

मैं हंसी और अपने कपडे पहनने लगी. रोहन ने मुझे खड़े हो के फिर से किस किया और फिर वो वही खिड़की से निकल गया. मैं भी गंगा मौसी के घर से निकल के अपने घर आ गई. रोहन ने मुझे आई-पिल ला के दी और फिर वो शादी की भीड़ में खो गया. शादी में फिर हमें मिलने का मौका ही नहीं मिला. उसने मुझे अपना मोबाइल नम्बर दिया था. जब मैं जीजू के वहाँ गई तो मैंने उसे चुपके से फोन किया था. और उसने मुझे मिल के होटल में ले जाके चोदा था. मैं चाहती थी की मेरी शादी उसके साथ हो लेकिन उसके घरवाले उसके लिए रेडी नहीं हुए और मैं अपने घर में कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाई. मेरी शादी फिर अविनाश से तय हो गई और मैं रोहन की याद को दील में एक कौने में रख के आज भी वो पलों को याद करती हूँ…!

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