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Desi SEX Kahaniya

साले की बीवी को रगड़ कर चोदा

 मेरे साले की शादी अभी जल्दी ही हुई थी। उसकी बीबी और मेरी होने वाली सरहज का नाम सुलेखा था। वो देखने में काफी हॉट थी। मैं साले के साथ सुलेखा को शादी के लिए देखने गया था। कुछ दिनों बाद शुभ मुहुर्त निकालकर शादी कर दी गयी। मेरे साले ने सुहागरात वाले दिन सुलेखा को नंगा करके उसकी मस्त चूत मारी। साले ने चुदाई वाली कई फोटोज मुझे व्हाट्सअप कर दी थी। दोस्तों मेरी सरहज सुलेखा बहुत ही खूबसूरत औरत थी।
उसका जिस्म तो संगमर्मर जैसा था। मैंने जब उसे फोटो में नंगा देखा तो मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया था। मन कर रहा था की काश उसे चोदने को मिल जाए तो कितना अच्छा हो। अपनी सरहज की फोटो देखकर मैं जोश में आ गया था और बाथरूम में जाकर मैंने मुठ मार दी थी। कुछ दिनों बाद मेरी बीबी के बच्चा होने वाला था। इसलिए घर पर काम करने वाला कोई था था। मैंने साले से सुलेखा को भेजने के लिए कहा। 2 दिन बाद वो सुलेखा को मेरे घर पर छोड़ गया। फिर अगले दिन चला गया क्यूंकि वो प्राइवेट कम्पनी में काम करता था। उसे छुट्टी बहुत कम मिलती थी। मेरी बीबी के बच्चा 4 -5 दिनों में होने वाला था। 9 महिना पूरा हो गया था। कभी भी बच्चा हो सकता था। सुलेखा को देखकर मैं बहुत खुश था।

“थैंक यू!! सरहज जी! आप आ गयी काम करवाने” मैंने कहा
“आप भी ननदोई जी कमाल करते है। आखिर मैं आपकी सरहज हूँ। कैसे मना कर देती” सुलेखा बोली
मैं उससे खूब मजाक करता था। वो खुलकर मजाक करती थी। बड़े खुले स्वाभाव वाली औरत थी। उसका फिगर देख के मेरा मोटा लंड तुरंत खड़ा हो जाता था।
“ननदोई जी! बोलिए आज क्या खाना पकाऊ” मेरी खुशमिजाज सरहज सुलेखा बोली
“ओह मेरा तो बस चले तो तुमको ही खा जाऊं” मैंने मजाक मजाक में कहा।
“तो खा जाइये ना” सुलेखा बोली
फिर हम दोनों एक दूसरे को ताड़ने लगे। मेरी बीबी अपने कमरे में लेटी थी। अब वो बेडरेस्ट पर थी। काम करना मना था। मैं सुलेखा के साथ हाल में था। मैंने उसका हाथ पकड़ने की कशिश की पर वो रसोई में भाग गयी। फिर उसने खाना बनाया और सबको खिलाया। दोपहर में सुलेखा अपने कमरे में आराम करने चली गयी। मेरी बीबी प्रेगनेंट थी और अपने कमरे में सो रही थी। ये मौका सुलेखा को चोदने के लिए बिलकुल सही था। क्यूंकि रात में मुझे अपनी बीवी के पास सोना पड़ता था। मेरी बीबी नही जानती थी की मैं सुलेखा को पसंद करता हूँ और उसकी गुलाबी चूत मारना चाहता था। मैंने धीरे से सुलेखा के कमरे के दरवाजा खोला और अंदर चला गया।

वो बेड पर लेटी थी। मैं उसके पास जाकर धीरे से लेट गया। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसके मुंह पर अपना मुंह रख दिया। मैं उसे किस करने लगा। वो भी मुझे हमेशा से पसंद करती थी और चुदना भी चाहती थी। इसलिए उसने कोई आवाज नही की। मैं उसे किस करने लगा। सुलेखा से साड़ी ब्लाउस पहन रखा था। वो बहुत पतली दुबली, छरहरी और हॉट लड़की थी। इसलिए मुझे वो खासतौर से पसंद थी। धीरे धीरे मेरे हाथ उसके पेट को सहलाने लगे। पेटीकोट पर उसने अपनी साड़ी बाँध रखी थी। पर उसके उपर उसक पेट खुला हुआ था। मैं सहलाने लगा। ओह्ह गॉड!! कितना पतला और छरहरा पेट था उसका। काफी देर तक मैं उसके गुलाबी होठो का चूसता और पीता रहा। फिर सुलेखा मेरे उपर आ गयी। वो मुझे बड़े जोश के साथ चुम्बन दे रही थी। ये कहानी आप इंड
“बोलो आज तुमको खा जाऊं???” मैंने सुलेखा से फिर से पूछा
“ननदोई जी क्या चीज खाना पसंद करोगे???” वो मुस्कुराकर बोली
“तुम्हारी चूत आज मैं खाऊंगा सरहज जी” मैंने कहा
उसके बाद सुलेखा मुझे फिर से किस करने लगी। हम दोनों हँसने लगे और बिस्तर पर लोटने लगे। मैंने सुलेखा के दूध ब्लाउस पर से पकड़ लिए और कस कस के दबाने लगा। वो “……हाईईईईई…. उउउहह…. आआअहह” करने लगी। दोस्तों आपको बता दूँ की सुलेखा का बदन बिलकुल भरा हुआ था। वैसे तो वो दुबली पतली थी पर जहाँ पर उसके बदन में गोश होना चाहिए वहां पर खूब था। उसके मम्मे, जांघे और पुट्ठे बहुत मांसल थे। इसलिए वो मुझे बहुत हॉट और सेक्सी माल लगती थी। मैं तेज तेज उसके ब्लाउस के उपर से उसकी नर्म नर्म चूची दबा रहा था। सुलेखा को कुछ ही देर में बड़ा जोश चढ़ गया था। वो मेरे साथ ही बिस्तर पर लोट रही थी। वो कितना ही अपने मम्मे मेरे हाथ की गिरफ्त से छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर मैं छोड़ ही 

फिर उसे मैंने अपनी तरफ खींच लिया और सीने से लगा लिया। मेरा सीधा हाथ उसके पेटीकोट में घुस गया। धीरे धीरे मैं उसकी टाँगे और गोरी चिकनी जांघ सहलाने लगा। कुछ देर बाद मेरा हाथ उसकी चड्डी पर पहुच गया। मेरी सरहज सुलेखा ने डीसायनर पेंटी पहन रखी थी। लेस वाली पेंटी थी वो। धीरे धीरे मैं उसकी चूत पेंटी से उपर से सहलाने लगा। सुलेखा “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” की आवाज निकालने लगी। उसको भी सेक्सी फील हो रहा था। मेरी बीबी अगर जब रही होती तो मैं कभी अपनी सरहज को चोद नही पाता। ये तो कहो की वो अपने कमरे में सो रही थी। इधर मैं सरहज के साथ जवानी और प्यार के मजे लूट रहा था। धीरे धीरे मेरे हाथ उसकी पेंटी पर चूत के ठीक उपर दौड़ने लगे। सुलेखा की चूत की फांके और चूत का दाना मुझे महसूस हो रहा था। धीरे धीरे मैं और तेज तेज उसकी बुर सहलाने लगा। 
अचानक से मैंने उसकी पेंटी में हाथ डाल दिया और चूत में अपनी 2 हाथो की ऊँगली डाल दी। सुलेखा बिस्तर पर कूद पड़ी। पर मैंने उसे कसके पकड़ लिया था। फिर जल्दी जल्दी मैं उसकी चुद्दी में ऊँगली करने लगा। सुलेखा पागल हो रही थी और “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह…अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” की गर्म गर्म आवाजे निकाल रही थी। वो बार बार अपना मुंह खोलकर गर्म गर्म सांसे छोड़ रही थी। मैं पूरी तरह से कमीनापन दिखा रहा था। जल्दी जल्दी मैं उसकी चूत फेटने लगा। सुलेखा की गांड फट गयी थी। वो इतनी चुदासी हो गयी की उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट बिलकुल उपर उठा दिया और दोनों पैर खोल दिए।
“ननदोई जी…..अब मुझे मत तड़पाओ!! बस जल्दी से चोद डालो मुझे” सुलेखा किसी रंडी की तरह चिल्लाई
“बहन की लौड़ी!! इतनी जल्दी मैं तुजे नही चोदूंगा। पहले खूब तड़पाऊंगा। खूब सेक्स टेंशन दूंगा उसके बाद तेरी भोसड़ी बजाऊंगा” मैंने कहा
उसके बाद मैंने जल्दी से उसकी लाल रंग की पेंटी निकाल दी। सुलेखा नंगी हो गयी। उसने अपनी साड़ी और पेटीकोट को उपर उठा लिया। मैंने फिर से अपने हाथ की 2 ऊँगली उसके भोसड़े में पेल दी और जल्दी जल्दी फेटने लगा। सुलेखा की तो जान निकल रही थी। वो “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” की कामुक आवाजे निकाल रही थी। उसे बड़ी बेचैनी महसूस हो रही थी। मुझे और जोश चढ़ गया। मैं और तेज तेज उसकी चूत में ऊँगली करने लगा। बार बार अंदर बाहर करने लगा। सुलेखा का बुरा हाल था। दोस्तों, जब मैंने अपनी ऊँगली निकाली तो उसक सफेड रंग का चूत का रस मेरी ऊँगली में लग गया था। थोड़ा मैंने चाट लिया, थोडा सुलेखा को चटा दिया

उसके बाद मैंने लेट गया और उसकी चूत पीने लगा। दोस्तों मुझे कहना होगा की उसकी चूत बेहद खूबसूरत थी। खूब बड़ी सी उभरी हुई चुद्दी थी उसकी। वैसे ही पिचकी चूत मुझे चोदना पसंद नही है। डबलरोटी की तरह भरी और उठी चूत मारना मुझे पसंद है। मैं जल्दी जल्दी अपनी खूबसूरत सरहज सुलेखा की चूत पीने लगा। उसकी बुर के होठ काफी बड़े बड़े और बाहर की तरह निकले हुए थे। मैं किसी रबड़ी की तरह उसका भोसड़ा पी रहा था। सुलेखा “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” की सेक्सी आवाजे निकाल रही थी। मैंने उसकी चूत के बड़े बड़े होठो को दांत से पकड़कर उपर की ओर खींच लेता था। सुलेखा को मैं भरपूर मजा दे रहा था। 15 मिनट तक मैंने उसकी रसीली चूत का सेवन किया।
उसके बाद मैंने अपनी जींस निकाल दी। फिर अंडरवियर निकाल दिया। मेरा 8” का लंड तो कबसे तना हुआ था। जल्दी से मैं सुलेखा के भोसड़े में लंड हाथ से पकड़कर डाल दिया। फिर मैं उसे चोदने लगा। सुलेखा चुदने लगी। मेरा मोटा लंड खाने लगी। मैं लंड को अंदर बाहर करने लगा। सुलेखा “…….उई. .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” की गर्म सिस्कारियां निकालने लगी। धीरे धीरे मैं उसे तेजी से चोदने लगा। वो बेकाबू हो रही थी। अपना पेट उपर की तरह वो उठा रही थी। उसकी चूत में सेक्स और अन्तर्वासना की आग लग गई थी। मैंने उसकी दोनों कलाई को कसके दबोच लिया और जल्दी जल्दी अपनी कमर चलाकर उसकी चूत बजाने लगा। सुलेखा तडप रही थी। उसकी आँखें बंद थी। मैं तो बस उसे ही देख रहा था। फिर मैं और तेज तेज उसे पेलने लगा। 20 मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना माल उसकी रसीली चूत में ही छोड़ दिया।
दोस्तों जैसे मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला, मेरा सफ़ेद रंग का माल उसकी चूत से बाहर निकलने लगा और बेड की बेडशीट पर गिर गया। कुछ देर बाद मैंने अपनी सरहज को कुतिया बनाकर चोदा। फिर उसने वो बेडशीट धो दी।

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