अपनी मौसी की गाण्ड

बात उन दिनों की है जब मेरी 35 वर्षीय मौसी अपने 3 बच्चों के साथ सहारनपुर से आई थी। उनकी शादी 16 साल पहले एक सरकारी कर्मचारी की साथ हुई थी। अवनी मौसी अपने फिगर का बहुत ख्याल रखती थी। उनका रंग गोरा, गाल गुलाबी थे, पर चुँचियां बहुत बड़ी नहीं थी। पर हां !उनकी गांड बहुत जबरदस्त थी, जब वो चलती थी तब मेरा ध्यान अक्सर उनकी गांड पर अटक जाता और वो साड़ी ही पहना करती थी ! कसम से वो साड़ी में कयामत लगती थी, उनका साड़ी बांधने का अंदाज भी अलग था। वो नाभि के काफी नीचे साड़ी बांधती थी और सदा गहरे गले का ब्लाउज पहना करती थी. जिससे वो जब भी झुकती थी तो उनकी दूध डेयरी का नजारा मैं बहुत आराम से देख करता था।

उसकी बहन गीता उससे कोई दस बारह साल बड़ी थी। उसका एक लड़का अक्षय कुमार भी था जिसे घर में सभी मुन्ना कह कर बुलाते थे और अभी उसने कॉलेज में दाखिला लिया ही था। वो भी भरपूर जवानी के आलम में था वो। कुछ कुछ शरमीला स्वभाव का था वो। घर में जवान औरत के नाम पर बस अवनी मौसी ही थी जिसे वो छुप छुप कर कभी कपड़े बदलते हुये देखता था, तो कभी स्नान के समय एक नजर भर देख लेता था, फिर उसे अपने सपने में लाकर उसके नाम के मुठ मारा करता था। उसका मन करता था कि वो अवनी मौसी को खूब चोदे। फिर जब उसका वीर्य स्खलन हो जाता था तो वो फिर से सामान्य हो जाता था।

अवनी बहुत महीनों से किसी मर्द के साथ सोई नहीं थी सो उसमें काम भावना बहुत ही बलवती होती जा रही थी। वो रात को वो तो एक बार मुन्ना के नाम की अंगुली अवश्य ही किया करती थी। पर आपसी शर्म के कारण वो दोनों खुल भी नहीं पाते थे। अक्षय अवनी मौसी के इरादे बहुत कुछ समझ चुका था और इसी तरह अवनी भी मुन्ना की नजरें पहचानने लगी थी। पर बिल्ली के गले में घण्टी कौन बांधे। कौन आरम्भ करे, कैसे करे, किसमें इतनी हिम्मत थी। अगर बात ना बनती तो फिर … मौसी का रिश्ता था … जीवन भर की शर्मिन्दगी उठानी पड़ती … ।

होनी को तो होना ही था बात अपने आप ही बनती चली गई।

एक दिन मुन्ना के नाना जी का फ़ोन आया कि उनके पैर की हड्डी टूट गई है और वो बहुत तकलीफ़ में हैं सो उन्होने जल्द से जल्द अवनी को बुलाया था। अक्षय ने कम्प्यूटर पर रिजर्वेशन देखा तो पाया कि वेटिंग लिस्ट सौ से अधिक की थी। फिर उसे मजबूरन बसों सहारा लेना पड़ा। एक रात का सफ़र था सो स्लीपर में कोशिश की तो जगह मिल गई। अक्षय ने दो अलग अलग स्लीपर बुक करा लिया। उसने अवनी मौसी को बता दिया था कि दोनों स्लीपर अलग अलग मिल गये हैं। अवनी को गुस्सा तो बहुत आया और कोफ़्त भी बहुत हुई, कितना मूर्ख है ये मुन्ना … साला डबल स्लीपर में करा लेता तो उसका क्या जाता। शायद बात बन ही जाती… ।

रात साढ़े दस बजे की बस थी। दोनों भोजन करके टूसीटर से बस स्टेशन पहुँच गये। ठीक समय पर पर बस चलने को थी। तभी एक लड़की और फिर एक लड़का बस में चढ़ गये। उसके पीछे पीछे बस कण्डक्टर भी चढ़ गया और गाड़ी को चलने को इशारा किया।

सामने की डबल स्लीपर खाली था, शायद उसके पेसेन्जर नहीं आये थे।उसने वो दोनों स्लीपर उन्हें दे दिये। पर लड़की ने मना कर दिया कि वो किसी अन्जान लड़के के साथ स्लीपर नहीं लेगी।

तभी कण्डक्टर ने अवनी मौसी से कहा- बहन जी, वो साथ वाले स्लीपर में आपका बेटा है ना …?

‘जी हां, वो मेरा बेटा ही है, क्यों क्या हुआ?’

‘आप दोनों उस डबल स्लीपर पर आ जाईये, तो मैं इन दोनों को आपका स्लीपर दे दूँ, ये दोनों डबल स्लीपर में साथ नहीं जायेंगे…’

‘ठीक बात तो है … कैसे जायेंगे भला … चलो उस पर हम आ जाते हैं … ऐ मुन्ना, ठीक है ना?’

‘जैसा आप चाहें मौसी …’

वे दोनों ही आगे वाले वाले डबल स्लीपर पर आ गये। वो दोनों सिंगल स्लीपर उन दोनों को दे दिये। अक्षय तो मौसी को एक ही डबल स्लीपर में साथ पाकर रोमांचित हो उठा। दुबली पतली सी मौसी सलवार कुर्ते में भली सी लग रही थी। अवनी भी मन ही मन मुन्ना के साथ सोने में रोमांच का अनुभव करने लगी थी। गाड़ी चल दी थी और अपने मुख्य कार्यालय के सामने आकर खड़ी हो गई थी। लेटे लेटे दोनों ने एक दूसरे की तरफ़ देखा। अवनी तो मुस्करा दी, पर मुन्ना शर्मा सा गया। वो कुछ नर्वस सा भी हो गया था।

‘मुन्ना, तुम्हारे पास वो गोली है ना सर दर्द की … अच्छा रहने दे … तुम ही मेरा सर दबा देना’

‘जी मौसी …’

तभी बस चल दी।

‘वो काला शीशा खींच कर बन्द कर दे !’

‘जी … ‘ मुन्ना ने केबिन का काला शीशा बन्द कर दिया।

‘वो परदा भी खींच दे … कितनी रोशनी आ रही है।’

मुन्ना ने परदा भी खींच दिया।

‘चल अब मेरा सर थोड़ा सा दबा दे।’ कहकर अवनी ने दूसरी तरफ़ करवट ले ली।

मुन्ना सरक कर लगभग अवनी की पीठ से सट सा गया। उसने अपना हाथ बढ़ा कर सर पर रख दिया और हौले हौले सर को सहलाने और दबाने लगा। मामूली से स्त्री सम्पर्क से उसके शरीर की नसों में गर्मी सी आने लगी। उसका हाथ धीरे धीरे अवनी के बालों को भी सहलाने लगा। फिर अनजाने में उसके गालों को भी सहलाने लगे। अवनी को भी मर्द संसर्ग से उत्तेजना सी होने लगी। उसने अपना शरीर अक्षय के शरीर से चिपका सा लिया। अक्षय को अवनी मौसी के गोल गोल चूतड़ उसके कूल्हों से स्पर्श करने लगे।

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