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बबिता की कुँवारी चूत की सीलतोड़ चुदाई

हैल्लो दोस्तों, में सबसे पहले आप सभी  को अपने बारे में बता देता हूँ. दोस्तों मेरा नाम राज है और में पिछले कुछ सालों से आप सभी लोगों की तरह सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेता आ रहा हूँ और मैंने अब तक बहुत सारी कहानियों के मज़े लिए.

वो सभी मुझे बहुत अच्छी लगी और दोस्तों मेरी तरह ही हर जवान दिल की मन की इच्छा होती है कि काश मुझे कोई गोरी सुंदर, बड़े बड़े बूब्स वाली लड़की जिसकी कुँवारी चूत हो वो बस एक बार मिल जाए तो बस मज़ा ही आ जाए और उसकी चुदाई करके मन खुश हो जाए ठीक वैसी ही मेरी भी मन की इच्छा थी, लेकिन में हमेशा चुप ही रहता और में ज्यादा कुछ बोलता नहीं था, लेकिन पिछले दो सालो से में पहले से अब बहुत ज्यादा बदल गया था और फिर जब में अपने मामा के घर पर कुछ दिन रहने घूमने फिरने गया तब मेरे साथ कुछ ऐसी घटना घटी जिसको आज में आप सभी को सुनाना चाहता हूँ.

दोस्तों मेरे अंकल कानपुर में रहते है, इसलिए में उनके घर पर अपनी कुछ दिनों की छुट्टियाँ बिताने चला गया, वहीं मेरे अंकल के पड़ोस में एक बहुत ही सुंदर गोरी मस्त सेक्सी लड़की रहती थी, जिसका नाम बबिता था और उस समय उसकी उम्र कम से कम 20 साल की रही होगी. उसके फिगर का आकार उस समय 30-26-28 रहा होगा.

दोस्तों उससे पहले भी जब में कभी भी अपने मामा के यहाँ पर जाता था तो में उस लड़की की उस चढ़ती मस्त जवानी को देखकर हमेशा बहुत चकित होकर सोच में पड़ जाता था और में मन ही मन में सोचता रहता कि काश मुझे एक बार उसकी कुंवारी चूत की सेवा करने का मौका मिल जाए. में उसकी बहुत मन लगाकर सेवा करूंगा और में हमेशा ही उसकी चुदाई के सपने देखा करता था. मुझे उसको एक बार अपना जरुर बनाना था.

दोस्तों वैसे तो मेरा या उसका मेरे मामा के घर पर आना जाना बहुत कम ही था, लेकिन फिर भी जब वो मुझे मिलती या मेरी तरफ देखती तब मुझे उसकी आखों में एक अजीब सी चमक नजर आती जिसको देखकर मुझे हमेशा ऐसा लगता था कि जैसे उसके मन में भी मेरे लिए कुछ ऐसा ही चल रहा है और जैसा में उसके साथ करना चाहता हूँ, लेकिन शायद उसकी मुझे यह अपने मन की बात कहने की हिम्मत नहीं हो रही है, इसलिए वो बस मुझे देखकर मेरी तरफ मुस्कुराने लगती और में उसकी मुस्कुराहट को देखकर उसकी तरफ झुका चला जाता.

मेरे मन में उसको अपना बनाने के लिए और भी इच्छा होने लगती. अब वो जब भी मुझसे मिलती या में उसको देखता हम दोनों बहुत देर तक एक ही जगह पर चिपक जाते और मेरा दिन उसको देखे बिना गुजरता ही नहीं था. मेरी उसको देखने की इच्छा हमेशा मेरे मन में रहती.

फिर एक दिन की बात है तब में घर के दरवाजे पर खड़ा हुआ था और उस समय वो लड़की बबिता भी अपने घर के दरवाजे पर खड़ी हुई थी और वो भी मुझे कुछ देर देखती रही.

फिर उसके बाद वो मुझसे कुछ इशारो में बोल रही थी वो बार बार मुझे देखकर हंस भी रही थी, तो में तुरंत उसका वो इशारा समझ गया कि वो अब मुझे अपनी तरफ से लाईन दे रही है जिसकी वजह से में बड़ा खुश था और अब मैंने तभी इशारे से उससे पूछा कि किया हुआ? तब उसने भी अपनी तरफ से मुझे इशारे में जवाब देकर कहा कि कुछ नहीं और फिर हम दोनों बहुत देर तक वहीं दरवाजे पर खड़े खड़े एक दूसरे की तरफ देखते रहे.

तभी अचानक से उसने मुझे एक इशारा किया जिसको देखकर में एकदम हैरान हो गया और उसने अपने उस इशारे से मुझे ऊपर छत पर आने के लिए कहा और फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि आज तो मुन्ना तेरी ज़िंदगी बन गई. में बहुत खुश हुआ और मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं था. फिर में जल्दी से ऊपर छत पर चला गया और मैंने देखा कि वहां पर वो मुझसे पहले ही पहुंच चुकी थी. में उसको देखकर उसकी तरफ मुस्कुरा दिया और वो भी मेरी तरफ हंस पड़ी. दोस्तों पहले तो में उससे बस इशारो में ही बातें कर रहा था, क्योंकि उस समय हम दोनों अपनी अपनी छत पर खड़े हुए थे, लेकिन जब मुझे लगा कि हमारे आसपास कोई भी नहीं है तो में सही मौका देखकर उसके घर की दीवार कूदकर उसके घर की छत पर चला गया.

अब मैंने देखा कि वो मेरे उसकी छत पर इस तरह से कूदकर आ जाने की वजह से कुछ घबरा रही थी, लेकिन में बहुत उतावला हो चुका था इसलिए मुझे किसी से कोई भी मतलब नहीं था. फिर कुछ देर बाद उससे मुझे पता चला कि आज उसके घर में कोई भी नहीं था बस उसकी एक दादी थी जो कभी भी ऊपर छत पर नहीं आती और वो हमेशा नीचे ही रहती है. दोस्तों में इस बात को सोचकर बड़ा खुश था कि आज बबिता के घर में कोई नहीं था और उनकी छत पर ऊपर बस एक रूम बना हुआ था, जिसमें उसके भाई और भाभी रहती है, लेकिन वो कमरा भी आज खाली पड़ा हुआ था.

अब में उससे कुछ देर इधर उधर की बातें करता रहा और हम दोनों को बातें करते करते शाम से रात भी हो गई मुझे इस बात का पता ही नहीं चला और वो सब कुछ इतना जल्दी जल्दी हो रहा था कि मुझे भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूं और क्या ना करूं? क्योंकि वो मुझे एक ऐसा मौका मिला था कि आज में उसकी कुंवारी चूत के बहुत अच्छी तरह से मज़े भी ले सकता था.

में वो बातें सोचकर बस बहुत बेचैन था कि जल्द से जल्द मुझे उसकी चूत मिल जाए. दोस्तों पहले तो में उसके साथ बहुत ही शराफ़त भरी बातें हंसी मजाक करने लगा फिर मैंने उसको ध्यान से देखा कि वो बार बार अपनी आखों को इस तरह से बंद कर रही थी जैसे कि उसको किसी चीज़ की तड़प हो रही थी. दोस्तों शायद वो तड़प उसको मेरे लंड की हो रही थी.

मैंने उसका इशारा समझकर अब उससे कुछ अलग किस्म की बातें मतलब कि सेक्स से जुड़ी हुई बातें करना शुरू कर दिया था और वो भी बड़े मज़े से मेरी बातें सुनने लगी थी. जिनको सुनकर वो बड़ी खुश थी तभी में तुरंत समझ गया कि आज तो मेरे मन की सभी इच्छाए पूरी हो जाएगी और यह बात मन ही मन सोचकर मेरी ख़ुशी का अब कोई ठिकाना ना रहा और बस कुछ देर बातें करने के बाद वो भी अब बिल्कुल खामोश हो गई और में भी चुपचाप उसको देखने लगा था.

मैंने उससे पूछा कि क्या हुआ? तब भी वो खामोश ही रही और अब में उसके पास गया और मैंने अब उससे पूछा कि क्या हुआ? लेकिन वो फिर भी कुछ नहीं बोली तब मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई और मैंने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों से पकड़ा और तुरंत में उसके होंठो को चूमने लगा जैसा में कभी किसी फिल्म में लड़का लड़की को चूमते हुए देखा करता था और में भी उसके साथ ठीक वैसे ही किस करता रहा और वो तो अब भी बस चुप ही थी और वो कुछ भी नहीं कर रही थी, लेकिन मुझे उसकी उस खामोशी से ही पता चल गया था कि उसकी तरफ से मेरे साथ आज पहली चुदाई के लिए हाँ है और में फिर उसके बूब्स को दबाने लगा, जिसकी वजह से उसके मुहं से अब अह्ह्ह्हह उफ्फ्फ्फ़ ह्म्‍म्म्ममम ऑश प्लीज आराम से करो बार बार निकल रही थी, लेकिन में कहाँ रुकने वाला था?

उसी समय में उसको उसके भाई के रूम में ले गया और वहां पर जाकर मैंने सबसे पहले उसके कपड़े एक एक करके जल्दी से उतारने शुरू किए तब पहली बार इतना पास से उसके बूब्स को देखाकर तो मेरे होश ही गुम हो गए, क्योंकि वो बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और थी में तो बस उन्हे देखकर ही पागल हो गया और अब में उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने मसलने लगा था.

वो दर्द और मज़े की वजह से लगातार सिसकियाँ भरती रही और फिर मैंने कुछ देर बाद अपने भी कपड़े उतारने शुरू किए, लेकिन तभी उसने मुझसे कहा कि नहीं प्लीज तुम मेरे साथ ऐसा कुछ भी मत करो अब मुझे जाने दो, लेकिन में समझ गया कि अब यह बस ऐसे ही मुझे अपने नखरे दिखा रही है, लेकिन में अब उसके कहने पर कहाँ रुकता.

जैसे ही वो दोबारा मुझसे कुछ शब्द बोलती तो में उसके होंठो को चूमने लगता. फिर वो भी कुछ देर बाद जोश में आ जाती तो फिर से में अपना काम शुरू कर देता और फिर जब मैंने अपने कपड़े पूरी तरह उतार दिए वो और अब हम दोनों एक दूसरे के सामने बिल्कुल नंगे थे.

फिर उसने मेरे लंड को देखा और उसको देखकर वो बड़ी गहरी सोच में पड़ गई और अब वो मुझसे कहने लगी कि ऊहह दैया इतना बड़ा लंड है आपका में तो मर ही जाउंगी इससे मुझे बहुत दर्द होगा. अब मैंने उसको समझाते हुए उससे कहा कि पहले पहले तुम्हे थोड़ा सा दर्द जरुर होगा, लेकिन फिर उसके बाद में तुम्हे भी मेरे साथ मेरी तरह बड़ा मज़ा आने लगेगा.

दोस्तों क्योंकि मेरा लंड लम्बाई में पांच इंच का है इसलिए वो उसकी मोटाई को देखकर डर गई थी, क्योंकि यह उसकी पहली चुदाई थी जो मेरे मोटे लंड होने वाली थी. उसके बारे में सोचकर शायद उसको पसीना भी अब आने लगा था.

अब में उसकी चूत को पहले तो अपने हाथ से सहलाने लगा, जिसकी वजह से वो धीरे धीरे बहुत गरम होने लगी थी और फिर कुछ देर बाद में अपनी उंगली को उसकी चूत में करने लगा था. तब मुझे पता चला कि उसकी चूत के अंदर लंड जाने का रास्ता बहुत छोटा है. अब मेरे उसकी चूत में ऊँगली करने की वजह से वो बहुत गरम हो जाए यह बात सोचकर में अपने काम में लगा रहा और उसकी चूत मेरा लंड अपने आप मुझसे मांगने लगे और मुझे उसकी चुदाई में वो मज़ा आए जो में उससे उम्मीद कर रहा था.

तभी अचानक से मैंने उसके मुहं से वो सेक्सी जोश भरी आवाजे सुनकर अपनी उंगली को उसकी चूत में अंदर बाहर करने की रफ़्तार को पहले से कुछ ज्यादा बढ़ा दिया, जिसकी वजह से वो अब बिल्कुल बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी और उसके मुहं से ज़ोर ज़ोर से सिसकियों की आवाज़े आने लगी थी.

मैंने मन ही मन में सोचा कि उसकी इस कुंवारी छोटी सी चूत में मेरा इतना बड़ा लंड कैसे जाएगा, क्योंकि उसको मेरी ऊँगली से ही इतना जब दर्द है तो वो मेरा मोटा लंबा लंड लेने के बाद तो मर ही जाएगी और उसकी चूत फट जाएगी. उसको यह दर्द सहना बड़ा मुश्किल होगा. फिर उसी समय अचानक से मेरी नज़र पास में रखे बालों में लगाने वाले तेल पर पड़ी और उसको देखकर मेरे मन में एक विचार आ गया.

उसके बाद मैंने उस बोतल से बहुत सारा तेल अपने हाथ में लिया और पहले तो मैंने उसकी चूत पर वो तेल लगाया और फिर अपने लंड पर भी मैंने बहुत सारा तेल लगाकर दोनों को एकदम चिकना कर दिया और फिर अपने लंड से मैंने उसकी चूत का सेंटर से सेंटर मिलाकर पहले तो मैंने हल्का सा झटका मारा तो वो दर्द से चिल्ला उठी आइईईई ऊईईईईइ माँ में मर गई आह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह प्लीज थोड़ा सा आराम से करो.

अब में उसका वो दर्द देखकर उसी समय रुक गया और फिर में उसके होंठो को चूमने लगा कुछ देर रुककर जब मुझे महसूस हुआ कि उसका दर्द अब पहले से कम हो गया है तब एक बार फिर से मैंने सेंटर से सेंटर मिलाया और फिर से मैंने एक ज़ोर का झटका दे दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उसकी चूत में कुछ इंच तो अंदर चला गया, लेकिन उसको अब बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन अब में तो उसका दर्द देखकर वहीं पर रुक गया और मैंने अपने लंड को उसकी चूत में कुछ देर के लिए उसी एक जगह पर रोक दिया और कुछ देर रुकने के बाद मैंने फिर से एक झटका दे दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड करीब दो इंच अब उसकी चूत में चला गया और अब मुझसे नहीं रुका गया और मैंने एक ज़ोर का धक्का दोबारा लगा दिया उस वजह से वो ज़ोर से चिल्ला पड़ी आाईईईईईई माँ में मर गई आआह्ह्ह् ऊऊऊऊह्ह्ह्ह मुझे मार डाला आपने मुझे बहुत दर्द हो रहा है आप इसको अभी वापस बाहर निकाल लो.

फिर मैंने उससे कहा कि अभी कुछ देर बाद तुम्हे भी मेरे साथ मज़ा आने लगेगा उसके बाद तुम अपना यह सभी दुःख दर्द हमेशा के लिए भूल जाओगी. अब में धीरे धीरे धक्के देते हुए उसके बूब्स को सहलाने लगा, जिसकी वजह से कुछ देर के बाद मैंने महसूस किया कि अब उसको भी मज़ा आने लगा था,.

लेकिन दोस्तों मेरा लंड कुछ ज्यादा ही बड़ा था तो अंदर और बाहर करने और उसको धक्के मारने की वजह से मेरा डर बढ़ता जा रहा था, लेकिन में अब ज्यादा देर रुक भी नहीं सकता था और मुझे किसी की कोई भी परवा नहीं थी, इसलिए में यह बात सोचकर अब ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और वो दर्द से चिल्ला रही थी. वो हर बार मुझसे बोलती रही कि प्लीज रूको मुझे दर्द हो रहा है प्लीज रूको, लेकिन में नहीं रुका. फिर वो भी खामोश हो गई और अब उसको भी मज़ा आने लगा था और वो मुझे अपनी कमर को उठा उठाकर मेरा साथ देने लगी थी. वो पूरी तरह से मेरा लंड बड़े मज़े से ले रही थी. में अपनी पूरी ताक़त से उसको धक्के मार रहा था.

फिर बस वो तो अपनी दोनों आखों को बंद करके आह्ह्ह्ह उहह्ह्ह्ह आइईईई उफफफ्फ़ करे जा रही थी. में बार बार उसके होंठो के चूमता रहा और उसके होंठ कुछ ज्यादा ही नरम थे, इसलिए में बार बार उनको पेप्सी समझकर पीता रहा. वो बहुत रसीले थे और मैंने उसके दोनों होंठो को चूमकर चूसकर एकदम लाल कर दिया था और अब मैंने मन ही मन में सोचा कि क्यों ना अब फिल्मी अंदाज़ में उसकी चूत मारी जाए और यह बात सोचकर मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाल लिया.

और अब मैंने उसको अपने सामने घोड़ी बना दिया और मैंने पीछे से उसकी चूत में अपना पांच लंबा लंड जब अंदर डाला तो बस उसकी वजह से उसकी अब हालत तो ऐसी हो गई थी जैसे कि वो उस दर्द की वजह से अभी मर ही जाएगी, क्योंकि मेरे लंड का आकार कुछ ज्यादा ही बड़ा था और उसकी चूत कुंवारी थी, जिसमें कभी ऊँगली तक भी अंदर नहीं गई थी इसलिए उसको तो उस दर्द को बर्दाश्त करना कुछ ज्यादा ही मुश्किल हो रहा था, लेकिन वो लड़की इतनी हिम्मत वाली थी वो इतना दर्द होने के बाद भी अब मुझसे कुछ भी नहीं बोल रही थी.

अब मैंने उसको अपने घोड़ी की तरफ बैठे हुए उसकी कमर को पकड़कर अपनी तरफ से जोरदार धक्के देना शुरू किए और में जोश में आकर पहले से ज़ोर और ज़ोर से धक्के देने लगा था और उसकी कमर पर मेरी पकड़ कुछ मस्त थी, इसलिए मुझे उसको धक्के देने में कुछ ज्यादा ही मज़ा आ रहा था. में जब तक धक्के दे रहा था तभी मैंने सोचा कि अब किसी और तरह से इसकी चूत मारी जाए और यह बात सोचकर अब में बेड पेर लेट गया और मैंने अपने लंडा को सीधा खड़ा किया और फिर उससे कहा कि अब तुम मेरे ऊपर आकर लंड पर बैठ जाओ.

फिर वो बहुत आराम से उठी और जैसा मैंने उसको करने के लिए कहा था, वो वैसा ही करने लगी थी और उसने मेरे लंड पर बैठकर उसको अपनी चूत में पूरा अंदर तक लेकर उस पर सवारी करना शुरू कर दिया था. दोस्तों मुझे पहले से ही पता था कि इस तरह से चूत में लंड को धक्के मारने का मज़ा ही कुछ और होगा, क्योंकि इस तरह से चुदाई करने में लड़की की पूरी जान निकल जाती है और जब पूरा लंड उसकी चूत के अंदर जाता है तब उसको दर्द के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता और वैसा ही हाल थी उसका भी हुआ.

दोस्तों पहले तो वो मेरे लंड पर धीरे धीरे से बैठती चली गई तब उसके मुहं से दर्द की वजह से आईईईइ आश उफफ्फ्फ्फ़ की आवाज निकल गई, लेकिन फिर भी उसने धीरे धीरे करके मेरा पूरा लंड अपनी चूत के अंदर ले लिया, तो में उसकी हिम्मत और जोश को देखकर बड़ा चकित रह गया और उसके बाद वो कुछ देर वैसे ही रुकी रही और मैंने भी उसको अपनी तरफ से धक्के नहीं दिए.

फिर अचानक से कुछ देर बाद वो खुद ही अब ऊपर नीचे होकर धक्के देने लगी थी. उसके ऐसा करने की वजह से मुझे और भी ज्यादा मज़ा आने लगा था और में भी नीचे से उसको अपनी तरफ से धक्के देकर उसका साथ देने लगा था. मेरे साथ साथ अब वो भी धक्के दे रही थी और में भी हम दोनों उस समय बहुत जोश में थे, इसलिए उसको भी मेरे साथ मज़ा आ रहा था.

फिर मुझे कुछ देर धक्के देने के बाद अब लगने लगा कि में अब झड़ने वाला हूँ तब मैंने यह बात सोचकर अब उसकी गीली जोश से भरी चूत में और भी ज़ोर ज़ोर से धक्के देने शुरू कर दिए थे और जैसे ही में झड़ने वाला था. मैंने उसको तुरंत उसी समय पकड़कर नीचे लेटा दिया और उसके बाद मैंने अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकालकर में उसके ऊपर चड़कर बैठ गया और मैंने उसके बूब्स के ऊपर झड़ते हुए अपना वीर्य उसकी छाती पर निकाल दिया, जिसकी वजह से उसके दोनों बूब्स मेरे गरम चिकने वीर्य से पूरे सफेद होकर ढक गए थे और वो वीर्य बहुत ज्यादा था, इसलिए वो अब बहकर उसके गोरे मुलायम पेट तक भी बहकर आ गया और फिर में पूरा वीर्य बाहर निकालने के बाद उस दमदार चुदाई की वजह से थककर अब उसके पास में लेट गया.

फिर मैंने देखा कि उसने अब उठकर अपनी पूरी छाती को एक कपड़ा लेकर अच्छी तरह से उसको साफ किया. वो ऐसा करते हुए मेरे लंड की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी, जिसका मतलब बिल्कुल साफ था कि वो मेरी उस चुदाई की वजह से पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी. उसको मेरे साथ पहली बार ऐसा करने पर बड़ा मज़ा आया और फिर वो भी मेरे ही पास में लेट गई.

मैंने उसके गोरे सेक्सी गदराए बदन पर अपना हाथ फेरना शुरू किया. में लगातार उसको सहलाता और उसके निप्पल को मसलता रहा और हम दोनों उस चुदाई को खत्म करने के बाद भी करीब तीस मिनट तक वैसे ही पूरे नंगे एक दूसरे से चिपककर आराम से लेटे रहे. फिर में उठ गया और मैंने एक बार फिर से उसके होंठो को चूमना शुरू कर दिया था.

में चूमने के साथ साथ उसके गोल गोल बूब्स को भी अपने हाथ से सहला रहा था और बहुत देर तक चूमने के बाद में अब उसके ऊपर से हट गया और फिर मैंने अब अपने कपड़े पहनने शुरू किए. वैसे भी हम दोनों को साथ में रहते हुए बहुत समय हो चुका था और अब उसके भी भाई के ऑफिस से वापस आने का समय हो गया था, इसलिए वो भी अब जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगी और अब वो मुझसे पूछने लगी कि आप वापस कब जा रहे है?

तब मैंने उससे कहा कि में तुम्हारे साथ दो या चार बार ऐसे ही मज़े लेने के बाद ही अब वापस जाऊंगा. फिर वो मुझसे कहने लगी कि पता नहीं फिर हमें ऐसा मौका कब मिलेगा, जिसका फायदा उठाकर हम दोनों दोबारा ऐसे मस्त मज़े ले सकेंगे? तो मैंने उससे कहा कि कल फिर जब तुम्हारे भैया उनके ऑफिस चले जायेंगे तब तुम मुझे ऊपर दोबारा मिलना. हम दोनों दोबारा से यह ऐसे मज़े कर लेंगे.

फिर वो मुझसे कहने लगी कि हाँ ठीक है, लेकिन तुम कल दो बजे ही आना वरना मेरी दादी को मेरे ऊपर शक सा हो जाएगा, क्योंकि दोपहर के समय घर के सभी लोग सो जाते है और उस समय छत पर कोई भी नहीं रहता और में तुम्हारे साथ ऊपर आ जाउंगी.

मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है मुझे उसमे कोई भी आपत्ति नहीं है तुम मुझे जब भी कहोगी में चला आऊंगा और उससे यह बात कहकर में अपनी छत पर से नीचे उतरकर अपने कमरे में आ गया और फिर मैंने उसको तीन दिन तक हर रोज़ बड़े मज़े से चोदा और वो भी मेरी चुदाई से खुश होकर मुझसे खुशी खुशी अपनी चूत की चुदाई करवाती रही. इस तरह मैंने उसके साथ चुदाई करके वो पूरे मज़े लिए जिसमें उसने मेरा पूरा पूरा साथ दिया और वो मेरी चुदाई से हर बार बहुत खुश और पूरी तरह से संतुष्ट हुई.

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