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Desi SEX Kahaniya

गर्लफ्रेंड की शादी के बाद सेक्स

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प्रेषक : राहुल …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और मेरी उम्र 22 साल है। मेरी हाईट 5 फिट 8 इंच है और मेरी गर्लफ्रेंड की हाईट 5 फिट है। दोस्तों मेरी कामुकता डॉट कॉम पर यह पहली कहानी है और में इस पर बहुत सालों से सभी तरह की सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ, जिन्हें पढ़ने में मुझे बहुत मज़ा आता है। दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि यह मेरी पहली कहानी आप सभी को बहुत पसंद आएगी, क्योंकि यह मैंने बहुत सोच समझकर लिखी है। दोस्तों यह कहानी मेरे स्कूल टाईम से शुरू होती है। जब में स्कूल के समय 11th में था और में अपनी क्लास का केप्टन था। मेरी क्लास में एक लड़की थी। उसका नाम सुनीता था और वो बहुत ही सुंदर और एक सीधी-साधी लड़की थी। उस समय जब भी क्लास में कोई फ्री पीरियड होता था तो मेडम सभी बच्चों को शांत होकर पढने या चुप रहने के लिए बोलकर जाती थी, क्योंकि हमारे पास की क्लास में उस समय पढ़ाई चलती रहती थी और क्लास में इन सभी कामों की जिम्मेदारी मेरी होती है।

तो में सबको चुप करवाता था और जब कोई हल्ला करता था तो में उसका नाम एक पेपर पर नोट करके मेडम को दे देता था। मेडम उन नाम वाले सभी बच्चों की पिटाई लगाती थी और मार खाने में सबसे आगे वाली बेंच की तीन लड़कियों का नाम हमेशा होता था। फिर एक दिन उनमे से एक लड़की ने मुझसे कहा कि मुझे तुमसे अकले में कुछ जरुरी बात करनी है। लेकिन में समझ नहीं सका कि वो मुझसे ऐसा क्यों बोली? तो मैंने सोचा कि में हर रोज उन लोगों के नाम मेडम को देता हूँ इसलिए वो मुझसे कुछ बोलना चाहती होगी। फिर उसके अगले दिन उसने मुझसे कहा कि अकेले में बात करना मुमकिन नहीं है और वो अपनी एक कॉपी मुझे देते हुए बोली कि में जो तुमसे कहना चाहती हूँ, वो मैंने इस कॉपी के एकदम बीच वाले पेज पर लिख दिया है। तुम उसे जरुर पढ़ना। तो मैंने उससे उस कॉपी को ले लिया और फिर अपने घर पर आकर उसे पढ़ने के लिए खोला। लेकिन जैसे ही मैंने उसे देखा और पढ़ा तो मेरे होश उड़ गए, क्योंकि उसमे लिखा हुआ था कि में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो। उसमे ऐसी ही और भी बहुत सारी बातें लिखी हुई थी, जिन्हें पढ़कर मुझे बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था।

फिर में दूसरे दिन उससे अपनी क्लास में मिला। उसने मुझसे बहुत अच्छी तरह बात की और उसके बाद कुछ ही दिनों में वो मुझसे पूरी तरह से खुलकर बातें करने लगी और इस तरह हमारा प्यार शुरू हुआ। हम एक दूसरे से घंटो तक बातें करने लगे। वो मुझसे बहुत कम समय में घुल गई थी। अब वो मुझसे अपनी कोई भी बात नहीं छुपाती थी। हम दोनों एक बहुत अच्छे दोस्त बन गए। फिर एक दिन मैंने उसे अपने दोस्त के घर पर बुलाया। उस समय मेरे दोस्त के मम्मी-पापा किसी काम से उनके गावं में गये हुए थे और वो बिल्कुल मेरे बताए हुए टाईम पर आ गयी। तो मैंने उसे अंदर बुलाया और बैठने को कहा। वो मेरे पास आकर बैठ गई और फिर कुछ देर इधर उधर की बात करके, मैंने अच्छा मौका देखकर उसका हाथ पकड़ा और धीरे धीरे सहलाने लगा। लेकिन तभी वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी और अब मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आया कि मैंने ऐसे क्या कर दिया जो वो इस तरह से रो रही थी? फिर कुछ देर शांत होने के बाद उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम भी मुझे इतना ही चाहते हो, जितना में तुम्हे चाहती हूँ और क्या तुम मुझसे शादी करना पसंद करोगे? तो मैंने उसे झट से हाँ में जवाब दिया और फिर उस दिन उसके आगे कुछ नहीं हुआ। कुछ देर बाद वो मुझसे गले लगकर वहां से चली गई और में उसके ख्यालों में खो सा गया। में उसके बाद उसे बहुत बार अकेले में मिला और मैंने उसको चूमा, लेकिन उसने मुझे इसके आगे कुछ भी नहीं करने दिया और हमारी प्यार भरी जिन्दगी कुछ समय तक बहुत अच्छी तरह चलती रही और फिर एक दिन हमारे प्यार के बारे में मेरे बड़े भैया को पता चल गया तो बड़े भैया ने मुझे बहुत समझाया और फिर धीरे धीरे हमारा ब्रेकअप हो गया। लेकिन हम अब भी एक बहुत अच्छे दोस्त थे। हमने बाहर मिलना बंद किया, लेकिन हम अपनी क्लास में अब भी मिला करते थे और एक दूसरे से बातें किया करते थे। कुछ समय के बाद हम दोनों कॉलेज में आ गये और अब हमारी एक दूसरे से कभी कभी फोन पर बात हो जाती थी। लेकिन कॉलेज के बाद उसकी शादी हो गई और वो शादी करके रायपुर चली गई।

उसके पति वहीं पर किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे और उनकी जनरल शिफ्ट होती थी। में भी उस समय अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई रायपुर से ही कर रहा था और यह मेरा कॉलेज का आखरी साल था। दोस्तों, यह घटना अभी दो महीने पहले की है। मैंने एक दिन उसे ऐसे ही बात करने के लिए कॉल किया तो उसने मुझे मिलने आने के लिए कहा और में उससे हाँ बोलकर अगले दिन उसके घर पर चला गया। वो लोग एक किराए के मकान में रहते थे और उस समय वो घर पर अकेली थी, क्योंकि उसके पति ड्यूटी पर गये हुए थे। मैंने दरवाजे पर लगी हुई घंटी बजाई। उसने दरवाजा खोला और मुझे अंदर आने को कहा और फिर मुझे पानी लाकर दिया और फिर किचन में जाकर मेरे लिए नाश्ता बनाया। वो अपने सभी कामों से फ्री होकर मेरे पास में आकर बैठ गई और हमने हमारी बहुत सारी पुरानी बातें की और इसी बीच मैंने उससे पूछ लिया कि क्या वो मुझे अब भी प्यार करती है? क्योंकि दोस्तों में उसकी लाईफ का पहला प्यार था तो उसने मुझसे कहा कि हाँ में तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। तो मैंने उसे समझाया कि तुम्हे अब यह सब बातें भूल जाना चाहिए, अब तुम्हारी शादी हो चुकी है और मैंने उसे समझाते समझाते उनका एक हाथ पकड़ लिया।

फिर वो मेरे थोड़ा और भी करीब आ गयी और थोड़ी ही देर में मैंने उसे अपनी बाहों में ले लिया। लेकिन मुझे पता नहीं उसे क्या हुआ, उसने मुझे बहुत ज़ोर से पकड़ लिया और उसने अपने होंठ मेरे होंठ की तरफ आगे बड़ाकर एकदम करीब कर दिए। मेरे बदन में जैसे कोई करंट सा दौड़ गया और अब हम दोनों एक दूसरे के होंठ चाट रहे थे। दोस्तों ऐसा करीब दस मिनट तक चलता रहा और यह सब करने के बाद हम बेड पर आ गये और फिर से किस करने लगे। मेरा लंड उसकी चूत के बारे में सोच सोचकर मस्ती कर रहा था और वो पूरा सरिए की तरह एकदम कड़क हो गया था। फिर मैंने सही मौका देखकर उसके बूब्स को दबाना शुरू किया। लेकिन वो कुछ नहीं बोली और हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे को किस कर रहे थे और एक दूसरे की जीभ को चूसते जा रहे थे। वो मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी और में एक हाथ से उसके बूब्स को दबा रहा था। उसके बूब्स का साईज़ अब बहुत बड़ा हो गया था, शायद उसका पति उसको बहुत अच्छी तरह से सेक्स के मज़े दिया करता था, लेकिन अब तक यह सब कपड़ो के ऊपर से ही हो रहा था। हमने अब तक अपने अपने कपड़े नहीं उतारे थे। जब में उसके कपड़ो को उतारने की कोशिश करने लगा तो मुझसे मना करने लगी और वो मुझसे बोली कि यह ग़लत है और अब में एक शादीशुदा औरत हूँ, लेकिन में अब कंट्रोल नहीं करना चाहता था और मैंने उसको कैसे भी करके समझा बुझाकर यह सब करने के लिए मना लिया। फिर वो उठकर दरवाजे को बंद करने चली गयी और वापस आकर मेरे ऊपर लेट गयी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने उसे एक साईड में लेटाया और उनका सूट उतारा। अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और सलवार में थी और मैंने जल्द ही उसकी ब्रा को भी उससे अलग कर दिया और फिर उसके बूब्स को दबाने सहलाने लगा और कुछ देर बाद एक बूब्स को मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा और दूसरे को दबाने लगा। अब हम दोनों एक दूसरे के जिस्म की गरमी पाकर बिल्कुल पागल हुए जा रहे थे और हम जोश में अपने होश खो बैठे थे। मैंने इसी बात फायदा उठाते हुए जल्दी से उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसे उतार दिया। अब वो ठीक मेरे सामने सिर्फ़ एक काली कलर की पेंटी में थी। मैंने उसकी पेंटी के अंदर हाथ डाला तो महसूस किया कि वो अब तक पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। मैंने अब उसकी गीली चूत में उंगलियाँ करना शुरू कर दिया और वो मेरा लंड पकड़कर ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे करके हिलाने लगी और अब में तो जैसे जन्नत की सेर कर रहा था और फिर जल्द ही मैंने उसकी पेंटी को भी निकालकर दूर कर दिया।

फिर में धीरे धीरे उसके बूब्स को छोड़कर उसकी चूत की तरफ बड़ने लगा और जैसे ही मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ रखी। तो वो एकदम चीख उठी और कहने आईईईइ लगी कि तुम अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह यह क्या कर रहे हो, वो गंदी जगह है, लेकिन में उसकी एक भी सुने बिना लगातार आगे की तरफ बड़ता गया और अब मैंने अपनी दो उँगलियों से उसकी चूत की पंखड़ियों को खोला और फिर अपनी पूरी जीभ को धीरे धीरे आगे पीछे करते हुए, उसकी गीली जोश से भरी हुई चूत में डालकर चूसने लगा। तो उसे भी अब बहुत मज़ा आ रहा था, वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी और मेरे सर को अपनी दोनों गरम गरम जांघो के बीच में दबा रही थी और फिर कुछ देर के बाद उसने मुझे बताया कि उसके पति ने कभी भी उसकी चूत को इस तरह से नहीं चूसा, वो पागल हुए जा रही थी और पूरे जोश में थी अह्ह्ह्ह हाँ और चाटो अह्ह्ह्ह हाँ खा जाओ उह्ह्ह्हह्ह आज मेरी आईईईईइ इस चूत को अह्ह्ह्हह तुम बहुत अच्छी तरह उह्ह्ह्हह्ह्ह्ह से चूसते हो, उसके चीखने और चिल्लाने की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।

फिर कुछ देर चूत चूसने के बाद मैंने अपना 7 इंच का लंड उसको चूसने के लिए कहा। लेकिन उसने मुझसे साफ मना कर दिया और मेरे बहुत समझाने पर वो मान गई और मेरे लंड को धीरे धीरे अपने मुहं में लेकर उसने चूसना शुरू किया। वाह दोस्तों मुझे क्या मज़ा आ रहा था, में शब्दों में नहीं बता सकता। वो मेरे लंड को बहुत धीरे धीरे अपने गरम गरम होंटो से अंदर बाहर कर रही थी और उसे बहुत ही आराम से चूस रही थी। दोस्तों उसने आज पहली बार मेरा लंड चूसा था और करीब दस मिनट के बाद उससे बर्दाश्त नहीं हुआ और मुझसे बोली कि प्लीज अब जल्दी से अंदर डालो, में अब और नहीं सह सकती, प्लीज मुझे आज अपने लंड से चोदकर वो मज़ा दो जिसके लिए में बहुत सालों से तड़प रही थी, प्लीज मुझे अब और मत तड़पाओ। फिर मैंने जोश में आकर अपना लंड उसकी चूत के मुहं पर रगड़ना शुरू किया। उसकी चूत अब बहुत गीली हो चुकी थी, चूत रस बाहर तक बहकर आने लगा था और फिर मैंने लंड को चूत के अंदर डालना शुरू किया और जैसे ही मेरे लंड का टोपा अंदर गया तो उसे थोड़ा सा दर्द हुआ।

फिर मैंने उससे पूछा कि क्या हुआ? तो उसने मुझसे कहा कि मेरा लंड बहुत मोटा है और उसके पति के लंड से बड़ा भी है, इसलिए थोड़ा सा दर्द हुआ। तो मैंने उससे कहा कि तुम चिंता मत करो, में बिल्कुल धीरे धीरे चुदाई करूंगा और वो अब हल्की हल्की सिसकियाँ ले रही थी अह्ह्हह्ह्ह्ह उफफ्फ्फ्फ़ और में धीरे धीरे लंड को आगे की तरफ बड़ा रहा था और मैंने मौका देखकर एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लंड, चूत में एक ही बार में डाल दिया। उसने मुझे कसकर पकड़ लिया और अपने नाखून से मेरे शरीर पर निशान कर दिए। तो में कुछ देर एकदम चुपचाप रहकर उसके बूब्स को सहलाने लगा और फिर जब वो थोड़ा अच्छा महसूस करने लगी तो में धीरे धीरे लंड को आगे पीछे करने लगा और अब उसे भी मज़ा आने लगा था। फिर उसने अपनी कमर को नीचे ऊपर उठना शुरू कर दिया और में भी उसे लगातार धक्का मारने लगा और वो उह्ह्ह्हह्ह अईईईई हाँ और ज़ोर से अह्ह्ह्हह्ह चोदो मुझे अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बोले जा रही थी और में उसकी चूत पर लंड को ताबड़तोड़ धक्के दिए जा रहा था। करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद मैंने अपना वीर्य उसकी चूत के अंदर ही डाल दिया और इस बीच वो भी एक बार झड़ चुकी थी और मेरी चुदाई से बहुत मस्त हो चुकी थी।

फिर हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही नंगे एक दूसरे को चूमते, चाटते, सहलाते हुए एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे। फिर उसने मुझसे मेरे लंड और मेरी चुदाई की बहुत तारीफ की। उसने कहा कि में इस तरह की चुदाई के लिए बहुत समय से तड़प रही थी। मेरे पति मुझे कभी भी ऐसे नहीं चोद सके और उनका लंड कभी भी मेरी चूत को ठंडा नहीं कर सका, तुमने आज मुझे चोदकर चुदाई का पूरा सुख दिया है, में तुम्हारी इस चुदाई से बहुत खुश हूँ। तो दोस्तों उस दिन हमने थोड़ी थोड़ी देर रुककर तीन बार सेक्स किया और अब जब भी उनका मन चुदाई करने का करता है तो वो मुझे फोन करके अपने घर पर बुला लेती है और में उसको बहुत जमकर चोदता हूँ। उसकी प्यासी तड़पती हुई चूत को ठंडा करके अपने घर पर चला आता हूँ। वो मेरी चुदाई से हमेशा बिल्कुल संतुष्ट नजर आती है ।।

धन्यवाद …

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