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जन्मदिन का तोहफ़ा- हब्शी का लौड़ा (Janmdin Ka Tohfa Habshi Ka Lauda)

हैलो दोस्तो, आज आपके लिए पेश है, दिल्ली के राज गर्ग की एक और कहानी, जिसमें उन्होने अपनी पत्नी की इच्छा पूर्ति के लिए उसको जन्मदिन पर तोहफे के रूप में हब्शी यानि के नीग्रो का लंड तोहफे में दिया।

तो कहानी पढ़िये और सोचिए अगर कल आपकी पत्नी आपसे कहे कि उसे भी किसी नीग्रो का लंड चाहिए तो आप क्या करेंगे।

दोस्तो, मुझे तो आप जान ही गए हो, मेरा नाम राज गर्ग है और वाइफ़ स्वैपिंग की चाहत में दो दीवाने कहानी का दूसरा और तीसरा भाग मेरे और मेरी पत्नी सीमा के तजुर्बे पर ही लिखा गया है।

अब सुनिए नई बात!

हुआ यूँ कि वाइफ़ स्वेपर्स क्लब की दो तीन मीटिंग्स जॉइन करने के बाद मेरी पत्नी काफी बिंदास हो गई।
बिंदास तो पहले भी थी, मगर अब उसे अपने मन की कोई भी बात खुल कर मुझसे कहने में कोई संकोच नहीं होता था।

ऐसे ही एक रात को हम अपना प्रोग्राम बना रहे थे तो मूड बनाने के लिए मैंने एक ब्लू फिल्म एल ई डी पर लगा ली कि बड़ी स्क्रीन पर देखेंगे और उनकी तरह खुद भी एंजॉय करेंगे।
मैं भी सिर्फ चड्डी पहने था और मेरी बीवी ने सिर्फ एक नाईटी पहन रखी थी, नाईटी के नीचे से कोई ब्रा या पेंटी कुछ भी नहीं पहना था।

एक दूसरे से सट कर बैठे दोनों हम एक दूसरे के कोमल अंगों से खेल रहे थे। मैं अपनी पत्नी की चूत के दाने को अपनी उंगली से सहला रहा था जबकि वो मेरी चड्डी में हाथ डाल कर मेरे लंड को सहला रही थी।

फिल्म में कई तरह के सीन थे, ऐसे में ही एक सीन आया कि एक बहुत ही लंबा चौड़ा अफ़्रीकी जिसका लंड करीब 1 फुट के करीब होगा, एक नाज़ुक सी 18-19 साल की लड़की को चोदता, लड़की को क्या उसकी तो माँ चोद देता है।
लड़की उसके लंबे और तगड़े लंड से बचने के लिए भागी फिरती है और वो हब्शी बार बार उस लड़की को पकड़ पकड़ के चोदता है।

सीन देखते देखते मेरी बीवी ने पूछा- सुनो, क्या इन सभी हब्शियों के लंड इतने बड़े बड़े होते हैं?
मैंने कहा- नहीं, सबके तो नहीं, इन फिल्म वालों ने दवाएं खा खा कर इतने बड़े बड़े कर रखे होते हैं।
‘तो आप भी खा लो ऐसी कोई दवा!’ बीवी बोली।

तो मेरे तो कान खड़े हो गए- क्यों, क्या तुम्हें मेरा लंड छोटा लगता है?
मैंने पूछा।
वो बोली- नहीं छोटा तो नहीं ठीक है, मगर मैं सोचती थी, जो औरतें इतने बड़े बड़े लेती हैं, उनको कैसा महसूस होता होगा।
मैंने पूछा- तुमने लेना है क्या?

तो उसने झट से मेरी चड्डी से अपना हाथ बाहर निकाला और बोली- आप दिला सकते हो क्या?
मैंने कहा- क्यों, क्लब में भी तो तुम कई तरह के ले चुकी हो, क्या उनसे दिल नहीं भरा?
वो बोली- क्लब में सब इंडियन्स ही हैं, और सबके 6-7 इंच के ही हैं, कुछ के तो इससे भी कम।

‘तो क्या तुम बड़ा लंड लेना चाहती हो किसी हब्शी का, कल को कोई बीमारी लग गई, या कोई और प्रोब्लम आ गई तो?’ मैंने उसे डराना चाहा, जबकि उसकी इस इच्छा से मेरे अपने गोटे ऊपर चढ़े पढे थे।

वो बोली- ऐसा करते हैंक कि आप एक बार मेरे लिए, कोई ऐसा ही लंबा चौड़ा हब्शी, जिसका लंड भी उसकी तरह ही विशाल हो, ढूंढ के लाओ, अगर मुझे पसंद आया तो मैं उसके साथ करूंगी, अगर पसंद नहीं आया तो फिर छोड़ दूँगी, फिर कभी आपसे ऐसे नहीं कहूँगी।
मैंने कहा- देखो यार, अब मैं कहाँ से तुम्हें हब्शी ढूंढ के लाकर दूँ, और क्या मैं दिल्ली में रहने वाले सभी नीग्रो से कहता फिरूँ कि भाई, अपना लंड दिखाना मेरी बीवी ने लेना है?
‘क्या यार तुम भी?’
‘अब ऐसे देखने से क्या पता चलेगा कि किस हब्शी का लंड कितना बड़ा है?’

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