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Desi SEX Kahaniya

कजिन का दूध पिया और उसको चोदा

दोस्तों एरा नाम मनोज है, ये बात कुछ साल पहले की हैं. लेकिन मूड बना तो सोचा आप लोगों के लिए लिख ही दूँ. तब मैं शहर से वेकेशन के लिए अपने विलेज में गया हुआ था. शारदा जो की मेरी कजिन हैं उसको कुछ महीनों पहले बच्चा हुआ था. उसका फिगर 36 28 36 का है. मैं घर वालों के साथ वेकेशन की मस्ती में था.

एक दिन घर पर कोई था नहीं तो थोडा बोर सा हो रहा था मुझे. मैंने ऊपर चाचा जी वाले फ्लोर पर देखा तो शारदा और उसका बेबी थे. मैंने सोचा लाओ बच्चे को ही खेल लगा लेता हूँ. मैं कमरे में गया तो शारदा अपने बच्चे को स्तनपान करवा रही थी. उसने मुझे नहीं देखा था.

मैं उसके निपल्स देख के थम्ब सा गया. और फिर एक साइड में छिप गया और उसको देखने लगा. शारदा डार्क कलर की है और उसके निपल्स ब्राउन थे और मम्मे बड़े बड़े. मुझे अजीब सा लगा लेकिन थोडा देख के मैं चुपके से वहां से निकल लिया.

अगले दिन मैं फिर से बच्चे को खेल लगाने के लिए गया और फिर से शारदा को स्तनपान करवाते हुए देखे. आज उसने मुझे देखा लेकिन उसने अपने साडी के पल्लू को सही करने की जहमत नहीं उठाई. और वो मेरे सामने अपने बोबे से बच्चे को दूध पिला रही थी. और जैसे मुझे इनवाइट कर रही थी. और इस से मुझे कोंफिडेंस मिला और मैं बेबी के साथ खेलने लगा.

मैंने उसके पास बैठते हुए कहा, अरे तुम को ऐसे अपने ब्रेस्ट खुले रखते हुए शर्म नहीं आती है क्या? उसने कुछ जवाब नहीं दिया. लेकिन शारदा की आँखों में उस वक्त जबरदस्त हवस थी जो मेरी आँखों से छिप नहीं सकी.

मैंने उसको और उसके हसबंड के बिच के रिलेशन के बारे में पूछा. तो मुझे पता चला की वो बिस्तर में उस से खुश नहीं थी. और उसका पति उसकी सेक्सुअल जरूरतों को पूरा करने में फेल सा था.

पता नहीं मुझे क्या हुआ ये सुन के. मैंने फटाक से अपने हाथ शारदा के बूब्स पर रख दिए और उन्हें मसलने लगा. उसने अपनी आँखे बंद कर ली और जोर जोर से सांस लेते हुए वो अपने होंठो को चबाने लगी. मैंने उसके सॉफ्ट बूब्स को दबाये रखा जिसमे से अब दूध बहार आने लगा था.

मैं वो दूध चाट गया और उस से मुझे एक अलग ही उत्तेजना आई बदन के अन्दर. मैं तो जैसे आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होने लगा था. मैंने धीरे से उसका ब्लाउज खोला और एक बोबे से दूध पिने लगा और दुसरे को मसलने लगा.

और फिर कुछ देर गहरी साँसे ले के मैंने शारदा के होंठो के ऊपर किस कर लिया. वो भी मुझे स्मूच करने लगी थी. तभी मुझे किसी के पाँव की आवाज सी आई. मैंने फट से उसे कहा की अपनी साडी सही कर लो लगता है कोई आ रहा है. मैंने बच्चे को अपनी गोद में ले लिया और उसके साथ खेलने लगा.

और आज शारदा ने अपनी तरफ से मुझे फुल ग्रीन सिग्नल दे दिया था और मैं अब उसके साथ सेक्स करने के सपने देखने लगा था.

मुझे जब भी मौका मिलता था मैं शारदा के पास चला जाता था. मौका सही हो तो उसके साथ खेलने को मिलता था. नहीं तो मैं उसके बच्चे के साथ खेल के वापस आ जाता था.ऐसा ही चलता रहा कुछ दिनों तक.

फिर मेरा वेकेशन ख़त्म होने को आया और मुझे वापस भी जाना था. मुझे बहुत अफ़सोस हुआ क्यूंकि मुझे पूरी छुट्टियों में एक भी मौका नहीं मिला शारदा को चोदने का.

मैं गाँव से वापस टाउन आ गया. शारदा की बात याद कर कर के कुछ महीनो मुठ मारी फिर मैं भूल गया. लेकिन कहानी अगले वेकेशन भी चली. गाँव में मेला आया था उन दिनों. और अब शारदा पहले से और भी सेक्सी और हेल्थी हो चुकी थी.

पहले कुछ दिनों तक तो मुझे शारदा से करीब होने का मौका नहीं मिला. लेकिन फिर धीरे धीरे से चांस बन्ने लगे थे. जब घर के लोग बीजी होते थे तब मैं शारदा के साथ मजे कर लेता था.

एक दिन हम दोनों कमरे में अकेले थे. मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और उसके बूब्स दबाने लगा. मेरा लंड सोये हुए से जाग गया और उसकी गांड पर चिभने लगा था. उसने पेंट के ऊपर से ही मेरे लंड को दबा दिया और बोली मेरे हसबंड का इस से आधा भी नहीं है. हम तो जैसे भूल ही गए थे की घर में और लोग भी थे उस वक्त.

मैंने कहा चलो बाथरूम में मुझे नहला दो. और वो बाथरूम में मेरी कमर के ऊपर साबुन लगा के मालिश करने लगी. मैंने उसे अपना लंड बहार निकाल के दिखाया. मेरे खड़े लंड को देख के तो जैसे उसकी आँखे ही चौंधिया गई थी.

लेकिन फिर चाचा जी आ गए और शारदा डर के भाग गई.

उस रात को मैंने चांस ले लिया. और जानबूझ के शारदा और उसके बच्चे के पास ही सो गया. मेरे कुछ कजिन भी उसी कमरे में सोये हुए थे. जब सब सो गए थे तब मैंने धीरे से शारदा की साडी में हाथ घुसा दिया. और उसके लेग्स को धीरे धीरे से सहलाने लगा.

उसकी चूत तो पहले से ही भीगी सी थी. मैंने चूत के दाने को खोज लिया और उसको सहलाने लगा. फिर मैंने धीरे से अपनी बड़ी ऊँगली को शारदा की चूत में घुसाई. मैं ऊँगली से उसकी चूत को चोदने लगा था. और फिर धीरे से मैंने एक साथ दो ऊँगली को उसकी चूत में घुसा दिया. वो कराह उठी. अब मैंने एक और ऊँगली से उसकी गीली चूत को खुश किया. तीनो ऊँगली एकदम चिपचिपी हो गई थी. और फिर उसने जोर से अपने हाथ से मेरे हाथ को अपनी चूत पर दबाया. उसका पानी निकल गया था!

मैंने देखा की उसकी आंखो में एक मस्त संतोष आ गया था और उसने कहा की बहुत टाइम के बाद मैं खाली हुई आज. मैंने कहा अब मेरे लिए भी कुछ करो तुम. वो वहां पर लंड लेने से कतरा रही थी क्यूंकि मेरे दुसरे कजिन थी थे वहां पर. उसने कहा की मैं हिला देती हूँ सिर्फ. मैं मान गया. उसने चद्दर के अन्दर ही मेरे लंड को हाथ में पकड़ा. और फिर उसे हिला हिला के मुठ मार दी. मेरा पानी निकल गया और हम दोनों सो गए.

अगले दिन सब लोग मेले में गए थे. मैं, मेरी चाची, शारदा और उसका बच्चा ही घर पर थे. चाची जी भी कुछ देर के बाद पूजा करने के लिए मंदिर गई. शारदा तभी नाहा के बहार आई. उसके भीगे हुए बालों को देख के मेरे मन में फिर से हलचल हो गई.

मुझे लगा यही सही मौका हे शारदा को चोदने का. मैंने उसे पकड लिया और उसके बूब्स मसलने लगा. फिर उसकी आँखों पर, गले पर, कंधे पर किस देने लगा. मेरे हाथ अब उसके ब्लाउज में घुसे और मैं बूब्स को जोर जोर से दबाने लगा था.

वो भी मस्ती में आ गई थी और गरम भी. मैंने कहा जान आज तो मुझे शांत कर ही दो क्यूंकि आज के जैसा मौका फिर नहीं मिलेगा. वो मान गई और हम दोनों बेडरूम में चले गए. उसने अंदर घुसते ही कहा जल्दी से जो करना हैं कर ले. मैंने उसे वही बेड पकड़ा के घोड़ी बना दिया. उसकी साडी को ऊपर उठाई और पीछे से उसकी गांड को सहलाया.

उसके बूब्स से दूध बहार आने लगा था. उसकी गांड एकदम गोल मटोल थी. मैंने अपने लोडे को बहार निकाला और शारदा ने अपनी चूतड को खोला. मैंने सही छेद में लंड को मिला के एक झटके में घुसा दिया. वो कराह उठी. मैंने उसके कंधे पकडे और चोदने लगा.

10 मिनिट उसको जोर जोर से चोदता रहा मैं. वो भी अपनी गांड को मस्त आगे पीछे कर रही थी और कह रही थी जल्दी निकालो, अह्ह्ह अह्ह्ह बहुत बड़ा हैं ये तो.

मैंने उसे स्पेंक किया जब मैं झड़ने को था. मेरे लंड के पानी निकलने तक वो खुद भी 2 बार झड गई थी!

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