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कामसूत्र ज्ञान शादी से पहले (Kamasuta gyan saadi se pahle)

दोस्तों, मेरा नाम संतो है और मेरा परिवार थोडा दकियानूसी विचारो का है | इस वजह से मैने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की | १८ के होने से पहले ही मेरे घरवालो को मेरी शादी की चिंता होने लगी थी | १९ साल मे, मेरी शादी पक्की हो गयी | मेरे होने वाले पति एक अच्छे पद पर सरकारी नौकरी मे थे और शहर मे अकेले रहते थे | जब हमारी शादी पक्की हुई थी, तो हमने एकदुसरे का सिर्फ फोटो देखा था; शादी हम दोनों के माँ-बाप ने पक्की कर दी थी |मेरे को शादी से पहले अपने होने वाले पति से मिलने को मन किया गया था; लेकिन, मै मन ही मन बेचेन थी | पता तो लगे; कि, मेरा होना वाला पति कैसा है ? मुझे उसके लिए ज्यादा दिन इंतज़ार नहीं करना पड़ा | उन्होंने मेरी एक सहेली को एक ख़त दिया और उसमे मुझे मिलने के लिए बुलाया | मै रोज़ दोपहर खेत पर जाती थी और बापू घर खाना खाने के लिए आते थे | एक बार जाने के बाद, बापू ३-४ घंटे मे ही वापस आते थे | वो समय हम दोनों के मिलने के लिए सही था |उन्होंने मुझे उनके आने की तारीख बता दी | मे उस का इंतज़ार बेसब्री से करने लगी | उस दिन तो मे सुबह से बापू का इंतज़ार करने लगी, मेरा किसी काम मे मन लग ही नहीं रहा था | जेसे ही बापू आये, मै तुरंत निकल गयी और मैने अपने साथ अपने सजने-सवरने का सामान भी ले लिया | मै जब तक खेत पर गयी | ये आ चुके थे; और एक पेड़ के नीचे बेठ कर मेरा इंतज़ार कर रहे थे | मै सज और सवर भी नहीं पाई और झल्लियो की तरह उनके सामने आ गयी | हम दोने एक दुसरे को बिना कुछ बोले देखते रहे | वो मेरे रंग-रूप पर फ़िदा थे और मै उनके बलिष्ठ शरीर पर | उन्होंने आव न देखा ताव; मेरा हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खीच लिया और मेरे होटो पे अपने होट रख दिये | मेरे सारे शरीर मै बिजली से दौड़ गयी | मैने उनको पीछे धक्का दिया; लेकिन, उनकी मजबूत बाहों मे, मै फस गयी थी | उन्होंने, मुझे एक तरफ बीठाया और मेरे लिए शहर से लिए तोहोफे देने लगे | मुझे तो सब कुछ सपना सा लग रहा था और मै बार-बार अपने किस्मत को धन्यवाद दे रही थी | सब कुछ देने के बाद, उन्होंने अपना सर मेरी गोद मे रख दिया और मुझे से पूछा, सब तैयारी हो गयी | मैने कहा, मुझे थोड़े कुछ करना है | सब माँ-बापू को करना है | फिर, उन्होंने अपना हाथ मेरे सर पे रखा और नीचे अपने मुह पर खीचते हुए बोले; पागल, वो नहीं, कामसूत्र की | मैने कहा, वो क्या होता है | तो उन्होंने बोला, कोई बात नहीं और मेरा पूरा सर अपने ऊपर खीच लिया और मेरे होटो को चूसने लगे | मैने कहा, आप क्या कर रहे हो | तो वो बोले, कामसूत्र सिखा रहा हु | ये मेरा हक़ है | उनके होटो को चूसने से मेरा शरीर गुदगुदाने लगा था और मुझे भी मज़ा आने लगा था | फिर, उन्होंने उठकर; मुझे पूरा लिटा दिया और मेरे ऊपर आकर मेरे होटो को चूसने लगे और अपने हाथो से मेरे कपडे खोलने लगे | मै तो मस्ती मै डूब चुकी थी; इसलिए, मन नहीं कर पाई और जो वो करते गये | उस्सी मै खोती चली गयी |उन्होंने मुझे पूरा नंगा कर दिया और जल्दी से अपने कपडे उतार दिये और मुरे चूचो को दोनों हाथो से दबाने लगे और मेरे छोटे निप्पलो को अपने मुह से चूसने लगे और काटने लगे | मेरे पैर छटपटा रहे थी और उन्होंने मेरे पेरो को अपने पेरो से जकड रखा था | फिर उन्होंने मेरे दोनों पेरो को अपने पेरो से खोल दिया और अपना लंड मेरी चूत पर रखकर ठोक दिया | उनका लंड सर्रर्रर्र करता हुआ पेरी पूरी चूत फाड़ कर अन्दर घुस गया | मेरी तो दर्द के मारे चीख निकल गयी | लेकिन, ये तो पागलो की तरह मुझे चोदे जा रहे थे | और मै मस्ती मै इनका साथ दे रही थी | थोड़े देर मे, मै झड गयी और इन्होने भी अपना पूरा गरम वीर्य मेरी चूत मे छोड़ दिया | मुझे लगा, जेसे गरम-गरम सरिया मेरी चूत मे घुसेड दिया हो | मुझे १० मिनट लगे, ठीक होने मे | इन्होने बोला, कल फिर आऊंगा और कामसूत्र का अगला पाठ सिखाऊंगा |

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