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मैं और मेरी प्यारी दीदी भाग – १४

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रात को खाने के बाद जब हम सोने के लिए गए तो मैंने दीदी से पूछा की “क्या हुआ दीदी आज आप इतने उदास क्यों हो ” दीदी ने कहा की ” कुछ नहीं ” मैंने कहा की दीदी “आपको मेरी कसम है बताओ ” दीदी ने मुझे देखा और कहा “सोनू मुझे विवेक सर बहुत परेशान करते है आज भी केबिन में उन्होंने मेरा हाथ पकड़ने को कोशिश की और बोला की अगर मैंने कुछ बोला तो वो मुझे फेल कर देंगे और मुझे एग्जाम नहीं देने देंगे मुझे बहुत डर लग रहा है ” मैंने कहा ” बस दीदी इतनी सी बात अब आप कल देखना की मैं क्या करता हूँ कल से ना तो विवेक आपको कभी परेशान करेगा और आपके मार्क्स भी अच्छे भेजेगा “……
अब आगे – मैंने रात को सोचा की ऐसा क्या करू की विवेक सर दीदी को ना तो कभी परेशान करे और ना ही जो भी उन्होंने दीदी के साथ किया वो किसी को बतायें ऐसा करना काफी मुशकिल था क्योंकि आज विवेक सर दीदी की ब्रा के अंदर तक हाथ डाल चुके उनके बोबे दबा चुके थे और उन्हें पता चल चुका था की दीदी कुछ नहीं बोलेगी और वो कुछ भी कर सकते है और तभी मुझे 1 आईडिया आया और मुझे पता चल गया की अब क्या करना है सुबह हम दोनों भाई बेहेन स्कूल गए लंच के बाद मैं अपनी डायरी लेके स्टाफ रूम में गया वहां बस विवेक सर थे मैंने गेट के पास खड़े होके “कहा मे आई कम इन सर ” सर ने बोला ” हाँ आ जाओ बेटा क्या हुआ ” मैंने कहा ” सर वो कल आपने मेरी डायरी में नोट साइन कराने के लिए कहा था पापा से लेकिन मुझे वो नोट मिला नहीं क्या आप बता सकते है की आपने वो नोट कहाँ डाला था ” सर ने कहा “नहीं बेटा मैंने नोट नहीं डाला था ” मैंने कहा ” ठीक है सर , सर वो मुझे आपका फोन नंबर और घर का एड्रेस चाइए था ” सर ने पुछा “क्यों ” मैंने कहा ” पता नहीं वो दीदी और पापा कल कुछ बात कर रहे थे फिर पापा ने मुझसे कहा की कल विवेक सर का फोन नंबर और एड्रेस लेके आना उन्हें आपसे कुछ बात करनी है आपके घर पे और हाँ मुझे प्रिंसिपल मेम का नंबर दीजियेगा पापा ने उनका नंबर भी माँगा है ” विवेक सर के होश उड़ गए वो पसीना पसीना हो गए उनके चेहरे से डर साफ़ झलक रहा था उन्होंने कहा ” क्यों बेटा क्या हो गया मैं तुम्हे स्कूल की छुट्टी में देता हूँ अभी तुम क्लास मे जाओ और तुम्हारी दीदी को स्टाफ रूम में भेज दो कहना की मैंने बुलाया है “
मैंने कहा “ठीक है सर ” मुझे पता था की उन्हें बहुत डर लग रहा है उन्होंने ये सोचा होगा की शायद दीदी ने पापा को सब कुछ बता दिया है और अब पापा उनके खिलाफ कुछ एक्शन लेने वाले है मै दीदी की क्लास में गया दीदी को बुलाया और कहा “दीदी विवेक आपको स्टाफ रूम में बुला रहा है आप डरना मत मै गेट के बार ही खड़ा रहूँगा और थोडा गुस्से में जाना और गुस्सा दिखाना ” दीदी ने कहा “ठीक है सोनू ” दीदी स्टाफ रूम में गयी और मैं बाहर खड़ा हो गया दीदी ने अंदर जाके गुस्से में बोला ” यस सर ” विव्केक सर ने बोला “बेटी मुझे माफ़ कर दो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी प्लीज प्रिंसिपल से शिकायत मत करो मेरी नौकरी चली जाएगी प्लीज मुझे बचा लो अपने पापा को रोक लो मैं वादा करता हूँ की ऐसा दुबारा कभी नहीं होगा “दीदी ने गुस्से में कहा “वो तो आपको ये सब करने से पहले सोचना चाहिए था आपको शर्म नहीं आई मैं आपकी बेटी की उम्र की हूँ अब भुगतो जो किया सबको पता चलना चाहिए आपके करैक्टर के बारे में ” विवेक सर बोले “नहीं नहीं बेटी मुझे माफ़ कर दो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी मैं वेसे भी ये स्कूल छोड़ के जाने वाला हू अगले महीने अगर ऐसा कुछ हो गया तो मुझे किसी स्कूल में नौकरी नहीं मिलेगी मुझे माफ़ कर दो मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगा तुम्हारे नंबर भी पूरे भेजूंगा और आगे से किसी के साथ भी ऐसा नहीं करूँगा मेरे बच्चे की कसम मुझे माफ़ कर दो ” दीदी ने कहा “ठीक है सर लेकिन आगे से ऐसा किसी के साथ मत कीजियेगा “
ये कह के दीदी बाहर आ गयी दीदी के चेहरे पे काफी सुकून दीदी ने मुझे ख़ुशी से और इस तरह देखा की अगर अभी बोल दू की नंगी हो जाओ तो नंगी हो जाएँगी फिर हम दोनों अपनी अपनी क्लासों में चले गए छुट्टी के बाद घर पहुंचे जेसे ही मैंने अपने रूम में बेग रखा दीदी ने मुझे कस के गले लगा लिया मेरा चेहरा दीदी के बोबो की ठीक थोडा ऊपर था दीदी “बोली थैंक यू सो मच सोनू तूने मुझ पे बहुत बड़ा एहसान किया है ” मैंने भी दीदी को कस के पकड़ लिया मुझे तो दीदी के बदन को छूने का आनंद चाहिए था कितना कोमल बदन था मेरी प्यारी दीदी का मैंने कहा “कोई बात नहीं दीदी ” लेकिन दीदी ने अभी भी मुझे कस के पकड़ रखा था मैं दीदी की शर्ट के अंदर से दीदी की ब्रा देखने के कोशिश कर रहा था फिर मैंने अपना हाथ दीदी की पीठ पर फेरा और उनकी ब्रा की स्ट्रैप्स और उनके ब्रा के हुक को फील किया और धीरे धीरे अपना हाथ दीदी की स्कर्ट पे ले गया और उनकी गांड पे हलके से अपना हाथ फेरा थोड़ी देर बाद दीदी ने मुझे अलग किया और कपडे चेंज करने चली गयी लेकिन दीदी के बदन को छूने से मेरा लंड बिलकुल टाइट हो गया था मैंने सोचा दीदी के बोबे दबाये हुए बहुत दिन हो गए आज कुछ करना पड़ेगा
आज मैं बहुत ज्यादा मूड में था थोड़ी देर बाद दीदी नहा के कपडे चेंज कर के आई बड़ी ही सेक्सी लग रही थी दीदी ने नहा के सलवार सूट पहना था उन्होंने डार्क बेंगनी कलर का सूट पेहेन रखा था उनके गोरे कलर पे वो डार्क सूट बहुत ही सेक्सी लग रहा था उनका कुरता बहुत ही पतला था और उनके बदन से चिपका हुआ था जिसकी वजह से उनका फिगर बहुत ही सेक्सी लग रहा था उनके टाइट बोबे उस चिपके हुए कुर्ते में से बाहर आ रहे थे और नीचे उनके पतले पेट पर कुरता चिपका हुआ था उनके पतले कुर्ते में से मुझे उनकी पूरी ब्रा का शेप उनकी ब्रा की स्ट्रैप्स साफ़ दिख रही थी उनकी पटियाला सलवार भी उतनी ही पतली थी और दीदी की गोरी गोरी झान्गें नजर आ रही थी उनके बालो की लटे बार बार उनके चेहरे पे आ रही थी और वो अपनी उंगलियों से उन्हें अपने कान के पीछे करती उनका ये रूप देख के मैं पागल हो गया मैं उनके बाथरूम में गया और उनकी उतारी हुई ब्रा पेंटी को पागलो की तरह सूंघने लगा उनकी ब्रा पेंटी में से उनके बदन की बहुत ही कमसिन और कामुख खुशबु आ रही थी मैं यही सब कर रहा था इतने में दीदी की आवाज आई “कहाँ है सोनू खाना खा ले “
मैंने दीदी की ब्रा पेंटी रखी और बाहर आ गया हम दोनों ने खाना खाया आज तो दीदी के चेहरे पे अजीब सी ख़ुशी और चमक थी हम दोनों खाना खाने लगे थोड़ी देर में दीदी ने खाना खा लिया और वो बोतल से पानी पीने लगी थोडा सा पानी उनके मुह से गिर के उनके गले से होता हुआ उनके कुर्ते के गले के अंदर चला गया मैं सोचने लगा की काश मैं भी एसे ही अंदर जा पता वो सीन बहुत ही सेक्सी था तभी थोडा सा पानी दीदी के कुर्ते के बाहर गिर गया उनके बोबे पे और गीला होने के कारण मुझे दीदी का निप्पल का शेप दिखा आज इन सब से मैं पागल हो चुका था अब मैंने सोच लिया था की आज रात को दीदी के जिस्म को छुउंगा वापस शाम को मैं खेलने चला गया खेल के वापस आया तो देखा की दीदी नेल पोलिश लगा रही थी मैंने सोचा दीदी आज तो वेसे ही इतनी कातिल लग रही हो और जुल्म क्यों ढा रही हो मैं जाके दीदी के सामने बैठ गया फिर दीदी ने अपने पैरो के नेल्स पे नेल पोलिश लगाना शुरू की जेसी ही दीदी बार बार झुकती मुझे उनकी ब्रा में क़ैद उनके बोबो का थोडा थोडा ऊपर का हिस्सा दिखाई देता मैं आज सुबह से ही बहुत उत्तेजित था मैं रात होने का इन्तेजार करने लगा
थोड़ी देर बाद रात हो गयी हम लोग खाना खाने लगे खाना खाके दीदी और मम्मी टीवी देखने लगे लेकिन मैंने आज टीवी नहीं देखा मैं रूम मैं आके लाइट बंद करके लेट गया करीब आधे घंटे बाद दीदी अंदर आयी उन्होंने लाइट जलाई मैं सोया नहीं था सोने का नाटक करने लगा दीदी ने लाइट जला के बोला “ओये भंगी सो गया क्या ” मैंने कोई जवाब नहीं दिया इतने में मम्मी आई और बोली “अरे प्रीती क्या हुआ सोनू आज इतनी जल्दी कैसे सो गया ” दीदी ने कहा ” थक गया हो मम्मी खेल खेल के ” फिर दीदी ने कहा “अच्छा मम्मी सुनो ना यार मुझे थोड़ी खांसी हो रही है और चेस्ट में भी पेन हो रहा है थोडा थोडा ” मम्मी ने कहा “और नहा ले गर्मी में आके इसलिए मना करती हू रुक दवाई लाती हु और हाँ अगर चेस्ट में पेन हो रहा है तो रात को ब्रा का हुक खोल के सो जाना या फिर ब्रा उतार देना और खाली शमीज और टॉप पेहेन लेना ” दीदी ने कहा ” हाँ मम्मी ब्रा उतार ही देती हूँ और खाली शमीज पेहेन लेती हूँ और ऊपर से टॉप डाल लूंगी ” मम्मी ने कहा “ठीक है ” मैं ये सब सुन रहा था और मैं मन ही मन बहुत ख़ुश था की चलो आज तो दीदी ब्रा उतार की सोयेंगी तो मैं उनके बोबे आराम से छू पाऊँगा
थोड़ी देर बाद दीदी ने लाइट ऑफ की और वो भी सो गयी मैं थोडा टाइम निकलने का इन्तेजार करने लगा थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को आवाज दी दीदी ने कुछ जवाब नहीं दिया मैंने और तेज आवाज दी दीदी कुछ नहीं बोली फिर मैं उठा दीदी मेरी तरफ पीठ करके सो रही थी मैंने दीदी की गांड पे हाथ रखा और उन्हें जगाने की कोशिश की लेकिन दीदी नहीं उठी मैंने सोचा आज दीदी इतनी गहरी नींद में कैसे सो रही है फिर मुझे लगा की शायद कल विवेक सर वाली टेंशन में दीदी रात भर नहीं सो पाई होंगी इसलिए आज सो रही है ढंग से मैंने सोचा आज बहुत ही अच्छा मौका है मैं दीदी के मुह की तरफ गया और दीदी के कंधे पे हाथ रख उन्हें उठाने लगा दीदी ने अद्खुली पलकों से मुझे देख के कहा “क्या हुआ सोनू ” मैंने कहा “दीदी मुझे डर लग रहा है ” दीदी ने कहा ” आजा यहाँ पे आजा मेरे बेड पे यहाँ सोजा मेरे पास और अब डिस्टर्ब मत करना ” मैंने कहा ” ठीक है दीदी ” अब मैं दीदी के बेड पे उनके बिलकुल पास लेटा हुआ था दीदी मेरी तरफ मुंह करके सो रही थी मेरा लंड खड़ा था
मैंने धीरे धीरे अपना हाथ दीदी की झांघ पे रखा और धीरे धीरे अपना हाथ उनकी कोमल और नरम झांघ पे फेरने लगा फिर मैं अपना हाथ धीरे धीरे ऊपर की तरफ लेके जाने लगा मुझे दीदी की पेंटी की लाइन महसूस हुई मैंने अपना हाथ फेरना जारी रखा और अब मेरा हाथ दीदी की गांड तक पहुँच गया था मैं अपना हाथ दीदी की गांड पे फेरने लगा उनकी गांड को सहलाने लगा फिर मैंने अपना हाथ दीदी की गांड पे से और ऊपर उनके टॉप और उनकी शमीज के अंदर दीदी की पीठ की तरफ किया आज उनकी पीठ पूरी नंगी थी आज दीदी ने ब्रा नहीं पहनी थी मैंने थोड़ी देर दीदी की नंगी पीठ पे हाथ फेरा फिर अपना हाथ निकाला और दीदी के हाथ पर अपना हाथ रखा और धीरे से उनका हाथ अपने लोअर पे से अपने खड़े हुए लंड पर टच करवाया मुझे 1 करंट सा लगा फिर मैं अपने होंठ दीदी के होंठो की तरफ लेके गया और उन्हें धीरे से किस किया आज मैंने पहली बार अपनी दीदी को किस किया था दीदी को किस करना मेरा बहुत ही अलग अनुभव था दीदी को किस करने के बाद मैं और ज्यादा मदहोश हो गया था बहुत नरम और कोमल होंठ थे मेरी प्यारी दीदी के मैं फिर धीरे से अपना हाथ दीदी के टॉप पर लेके गया और उनके टॉप पे से उनके नरम बोबे दबाये कितने मुलायम बोबे थे दीदी के मैं थोड़ी देर तक उनके बोबे दबाता रहा फिर
मैंने दीदी के होठो पे वापस किया और उन्हें किस करते करते मैं उनके बोबे दबाने लगा अब मैंने अपना लोअर उतार दिया मेरा लंड बाहर आ गया था अब मैं नंगा दीदी के साथ उन्ही के बेड पे था मैंने दीदी का हाथ लिया और उनके हाथ मैं अपना नंगा लंड पकडाया और धीरे धीरे ऊपर नीचे करने लगा और उनके बोबे दबाना लगा फिर उन्हें किस करने लगा फिर मैंने उनके पेट पर अपना हाथ रखा और धीरे धीरे उनका टॉप और उनकी शमीज ऊपर करने लगा और दीदी के नंगे बोबे मेरे सामने थे आज मैंने बड़े ध्यान से और आराम से अपनी दीदी के प्यारे बोबो को देखा उनके बोबे गोरे गोरे और मोटे मोटे थे और उनके निप्पल ब्राउन कलर के बहुत छोटे छोटे थे मैंने पहले दीदी के नंगे बोबो पे अपना हाथ फेरा उन्हें दबाया उन्हें सहलाया फिर उन्हें किस किया और फिर उनका 1 निप्पल अपना मुह मैं ले लिया आज मैंने पहली बार अपनी दीदी का निप्पल मुह मैं लिया था मैं उनके निप्पल को चूसने लगा दीदी का निप्पल खड़ा हो चूका था मैंने दीदी के पूरे बोबे को अपने मुह में लिया और चूसने लगा दीदी के बोबे को चूसते चूसते अपने आप ही मेरा हाथ दीदी के दोनों जाँघों के बीच उनकी चूत पे चला गया मैं दीदी की कैप्री के ऊपर से उनकी पूरी चूत पे अपना हाथ फेरने लगा फिर मैंने दीदी का दूसरा बोबा चूसना चालू किया और अपना हाथ दीदी की केप्री के अंदर डाल दिया और उनकी पेंटी के ऊपर से उनकी चूत पे सामने की तरफ से ऊपर से लेके नीचे तक पूरी चूत में अपना हाथ फेरने लगा मैं तो बिलकुल ही ये भूल चूका था की मैं ये सब तब कर रहा था जब दीदी सो रही थी….

आगे की कहानी जरी रहेगी>>>>

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