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मैं और मेरी प्यारी दीदी भाग – २८

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वो आंखें बंद करके खुद अपने होंठ चबा रही थी मुझे पता था की उन्हें मजा आ रहा है लेकिन मुझे पता नहीं था की उन्हें दर्द हो रहा है या नहीं मैंने पूछा “शिप्रा दीदी पैन तो नहीं हो रहा अब ” उन्होंने कहा “नहीं सोनू” मैंने कहा “मजा आ रहा है” उन्होंने कहा “हाँ …” अब मैं धक्के मारने लगा मुझे भी बहुत मजा आ रहा था आखिर आज मैं अपनी प्यारी शिप्रा दीदी की चुदाई कर रहा था तभी शिप्रा दीदी की सिसकी निकली “म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म ” और वो बोली “सोनू जल्दी जल्दी कर ” मैं जल्दी जल्दी धक्के मारने लगा शिप्रा दीदी को और मजा आने लगा मैं उनकी चूत मारते हुए उनके दोनों बोबे दबाने लगा उन्हें सहलाने लगा उनके बोबे चूसने लगा तभी शिप्रा दीदी ने अपनी दोनों टांगों को मोड़ लिया ऐसा लग रहा था की वो अपनी टांगो से मुझे जकड़ना चाहती है मेरी पीठ पे अपनी टांगें लपेट के वो बोली “हाँ सोनू जल्दी जल्दी कर मुझे बहुत मजा आ रहा है स्स्स्स्स्स्स्स …आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह “

उनके मुह से ये बात सुन कर मैं भी जल्दी जल्दी धक्के मारने तेजी से अपने लंड से उनकी चूत मारने लगा तभी उन्होंने कहा “ऊफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ सोनू बस ऐसे ही करता रह मैं झरने वाली हूँ आआह्ह्ह्ह्ह ……” मैं और तेजी से धक्के मारने लगा और तभी शिप्रा दीदी ने अपने नाखून मेरी पीठ पर गडा दिए और एक लंबी सिसकी ली “आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ….” वो झर गई थी मैं भी झरने वाला था मैं भी जल्दी जल्दी धक्के मारने लगा और थोड़ी देर बाद मेरा मुट निकल गया मेरा सारा मुट शिप्रा दीदी की चूत में निकल गया मैं थक के उनके ऊपर लेट गया वो मेरे बालों में हाथ फेर रही थी आज की चुदाई से हम दोनों को बहुत मजा आया था हम थोड़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहे
तभी बाहर से कार का हॉर्न सुनाई दिया हम दोनों सकपका के जल्दी से उठे शिप्रा दीदी बोली ” अरे यार मौसी और प्रीती आ गए सोनू तू फटाफट कपडे पेहेन के बाहर जा उन्हें संभाल मैं यहाँ सब ठीक करके कपडे पहनती हूँ और सुन मुझे एयर फ्रेशनर देके जा जल्दी कर ” हम फटा फट उठे मैंने अपने कपडे पहने और बाहर गया बाहर बारिश हो रही थी मम्मी और प्रीती दीदी आ गए थे प्रीती दीदी ने कार का गेट खोला तभी मम्मी बोली “अरे प्रीती छाता तो ले जा ” प्रीती दीदी बोली अरे मम्मी अब क्या काम है छाते का ” और वो भाग के घर के अंदर आने लगी तभी उनका पैर स्लिप हुआ और वो सामने की तरफ गिरने ही वाली थी की मैंने भाग के उन्हें संभाल लिया प्रीती दीदी मेरी बाँहों में थी उनका टॉप थोडा गीला हो गया था वो झुकी हुई थी इस कारण उनके गीले टॉप का गला लटक गया और मुझे प्रीती दीदी की ब्रा दिखाई दे गई प्रीती दीदी ने वाइट कलर की ब्रा पेहेन रखी थी मैं उनकी ब्रा में से उनके मोटे बोबे देखने लगा लेकिन शायद प्रीती दीदी ने मुझे उनके बोबे देखते हुए पकड़ लिया वो मुझसे अलग हुई और हम दोनों की आंखें मिली और शायद हम दोनों के जेहेन में उस दिन रात वाला सीन घूम गया जो हम दोनों के बीच हुआ था तभी प्रीती दीदी ने सिचुएशन को सम्भालते हुए कहा “शिप्रा दीदी कहाँ है ….”…..
प्रीती दीदी ने पूछा “शिप्रा दीदी कहाँ है ” मैंने कहा “अंदर है दीदी आप कहाँ अटक गए थे ” उन्होंने कहा “अरे यार वो स्कूटी स्टार्ट ही नहीं हो रही थी तो अब पापा ला रहे है ठीक करा के ” फिर वो बोली “हमारे पीछे से तुम दोनों अकेले थे कुछ कहा तो नहीं उसने तुझसे ” मैंने कहा “क्या मतलब प्रीती दीदी ” तो वो बोली की “अरे उस शिप्रा ने हमारे पीछे से तुझसे कुछ ऐसा वेसा तो नहीं बोला ” लेकिन मेरा ध्यान तो मेरी प्यारी दीदी को निहारने में था थोड़े गीले बाल थोडा सा गीला उनका लाइट ग्रीन कलर का स्लीव लेस टॉप सामने से थोड़ी सी गीली ब्लैक जींस वाली केप्री उनके कंधे पे कुछ पानी की बूंदे फिसल कर उनके चिकने गोरे गोरे हाथों पे आ गई थी उनका गीला टॉप सामने से चिपक गया था जिस वजह से प्रीती दीदी के बोबे बाहर निकल रहे थे उनके टॉप के गीले होने के कारण मुझे उनकी ब्रा की स्ट्रैप्स का शेप साफ़ दिख रहा था और मुझे पता था की उन्होंने अंदर वाइट कलर की ब्रा पेहेन रखी है
एक दम से मेरे दिमाग में ऐसा सीन आया की प्रीती दीदी मेरे सामने वहां बस अपनी वाइट ब्रा में खड़ी है और मुझसे बातें कर रही है मैं खोया हुआ था तभी प्रीती दीदी ने मेरा हाथ पकड़ के जकझोरा और कहा “ओए स्टुपिड कौनसी दुनिया में है कहाँ खो गया बोल ना ” मैं एक दम से होश में आया देखा प्रीती दीदी मेरा हाथ पकडे कुछ पूछ रही थी मैंने कहा “क्या बताऊँ दीदी ” उन्होंने कहा “अरे अभी तो पूछा मैंने की उस शिप्रा ने हमारे पीछे से तुझसे कुछ ऐसा वेसा तो नहीं बोला और तू इतना हैरान सा क्यूँ है क्या हुआ बता मुझे ” प्रीती दीदी की ये बात सुनके मैं सोच में पड़ गया की मैं क्या बोलू और मेरे मुह से निकल गया “हाँ दीदी ” तो प्रीती दीदी बोली “क्या बोला उसने ” तभी मम्मी आ गयी और बोली “अरे तुम लोग बाहर क्यों खड़े हो अंदर जाओ ना और प्रीती जा जाके कपडे चेंज कर ले तू नहीं तो ठंड लग जाएगी भीगी हुई है ” हमने कहा “हाँ मम्मी ” अंदर जाते हुए प्रीती दीदी ने मुझसे कहा “तू चिंता मत कर मैं हूँ तेरे साथ मुझे बाद में बताना की क्या कहा उसने ” मैंने कहा “हाँ दीदी ” और वो अंदर जाने लगी और मैं पीछे से उनकी केप्री में चिपकी हुई हिलती हुई गांड को देख रहा था
तभी मम्मी का सेल बजा पापा का फोन था मम्मी ने फोन उठाया “हेलो हाँ बोलो कहाँ तक पहुंचे ओहो तो फिर अब अच्छा तो तुम गाडी वहीँ छोड़ दो मैं तुम्हे कार से पिक कर लेती हूँ ” और मम्मी ने फोन रख दिया मैंने पूछा “क्या हुआ मम्मी” मम्मी बोली “अरे बेटा वो मेकेनिक अभी गाडी दे नहीं रहा है तो मैं पापा को लेने जा रही हूँ अच्छा सुन सोनू प्रीती से कहना की खाने की तैयारी कर ले थोड़ी ” मैं मन ही मन खुश हो गया की पापा मम्मी होंगे नहीं और प्रीती दीदी चेंज करेंगी तो अब एक और चांस है थोड़ी देर में मम्मी चली गई मैंने सोचा की क्या करू बाथरूम में प्रीती दीदी कपडे बदल रही है उन्हें कपडे उतारते हुए और उन्हें नंगी देख के के अपना लंड सहलाऊँ या फिर शिप्रा दीदी को अपना लंड मुंह में दूँ मैंने सोचा की प्रीती दीदी को बहुत टाइम से नंगी नहीं देखा है और आज वो लग भी बड़ी सेक्सी रही है उन्हें ही देखता हूँ उनके ग्रीन टॉप और वाइट ब्रा उतारते हुए और पता नहीं उन्होंने कौनसे कलर की पेंटी पहनी हुई होगी यही सोचते हुए मैं अपने लंड को सहलाते हुए बाथरूम की तरफ गया और गेट से वो पेपर का टुकड़ा निकालने ही वाला था की अंदर से प्रीती दीदी जोर से चीखी और बाथरूम का गेट खोल के भागते हुए बाहर आई
बाहर मैं खड़ा था और वो मुझसे लिपट गई उन्होंने मुझे एक दम टाइट हग कर लिया वो भी क्या हसीन पल था मैं और मेरी प्यारी दीदी अँधेरे कमरे में और उन्होंने मुझे कस के पकड़ा हुआ मेरी थोड़ी गीली से प्रीती दीदी मुझसे चिपके हुए थी उनके बोबे मेरे शरीर पे टच हो रहे थे मैंने मोबाइल निकाला और उस से रोशनी की वो मुझसे चिपके हुए थी मैं उनके गीले कपडे और उनकी बदन की गर्मी में दोनों महसूस कर सकता था शायद वो डर गयी थी वो मुझसे कुछ ज्यादा ही चिपकी हुई थी मेरा खड़ा हुआ लंड उनकी झांग को टच कर रहा था फिर अचानक ही मुझे पता नहीं क्या हुआ मैंने प्रीती दीदी के टॉप को उनकी गर्दन से थोडा सा पीछे किया और अंदर मोबाइल की लाइट से देखने लगा मुझे उनकी वाइट ब्रा का हुक और उनकी भीगी हुई नंगी गोरी चिकनी पीठ दिखाई दी उनकी ब्रा का हुक खुला हुआ था वो शायद अपनी ब्रा उतारने वाली थी और मोबाइल की लाइट में उनकी थोड़ी सी गीली पूरी नंगी पीठ किसी संगमरमर की तरह चमक रही थी मैं उनकी नंगी पीठ को थोड़ी देर तक देखता रहा फिर मुझे लगा की शायद उन्हें कुछ महसूस ना हो जाए तो मैंने धीरे से उनका टॉप छोड़ा और फिर मैंने प्रीती दीदी के सामने से उनके पेट की तरफ अपना हाथ रखा उनका टॉप थोडा सा ऊपर था मैंने उनके नंगे चिकने पेट पे अपना हल्का सा हाथ फेरा उनके मुह से छोटी सी सिसकी निकली
फिर मैंने अपने हाथ से प्रीती दीदी के बाल उनके चेहरे से हटाए और उस मोबाइल की लाइट में मैंने प्रीती दीदी को देखा सेक्सी सी आंखें कोमल मुलायम होंठ मैंने पूछा “क्या हुआ प्रीती दीदी आप ऐसे चिल्लाईं क्यों डर गई क्या , अरे बस लाइट ही तो गई है ” उन्होंने कहा “सोनू मैं अभी कपडे चेंज कर रही थी तो मुझे लगा की अँधेरे में मेरी पीठ पे कुछ गिरा है ” मैंने कहा “क्या था दीदी कोई कीड़ा या जानवर जैसा था क्या ” उन्होंने कहा “पता नहीं मुझे उसके रेशे अपने गले पे महसूस हुए ” मैंने कहा “अंदर तो नहीं गया” उन्होंने कहा “पता नहीं” वो मुझसे चिपकी हुई थी तो मैंने उनके टॉप पे से उनकी पीठ पे हाथ रखा और पूछा “मैं देखूं ” उन्होंने मेरी आँखों में देखा और मुझसे अलग हो गयी मैंने भी उन्हें छोड़ दिया और अंदर बाथरूम में देखने गया की प्रीती दीदी के ऊपर क्या गिरा था थोड़ी देर बाद मैं बाहर आया और प्रीती दीदी को बोला “ये गिरा था आपके ऊपर और आप इतना ड़र गई ” वो एक टॉवल का नैपकिन था तभी शिप्रा दीदी की आवाज आई “मौसी कहाँ हो ” मैंने वही से बोला “शिप्रा दीदी मम्मी पापा को लेने गयी है आप वहीँ रुको ” तभी प्रीती दीदी ने कहा “सोनू मुझे टॉर्च दे देना ढूंढ़ के ” मैंने कहा “हाँ दीदी” मैंने प्रीती दीदी को टॉर्च दी और वो उसे लेके बाथरूम में चली गयी
अब लाइट तो थी नहीं तो मैं प्रीती दीदी को कपडे चेंज करते हुए देख नहीं सकता था क्योंकि टॉर्च की लाइट में ढंग से दिखता नहीं तो मैं शिप्रा दीदी के पास गया वो मोबाइल ओन करके बैठी थी मैंने जाके उन्हें हग कर लिया उन्होंने कहा “क्या कर रहा है मैंने कहा कोई नहीं है बस प्रीती दीदी है वो भी बाथरूम में है ” ये सुन के उन्होंने भी मुझे हग कर लिया शिप्रा दीदी और मैं एक दूसरे से चिपके हुए थे मैंने उनसे पूछा “दीदी मजा आया” उन्होंने कहा “हाँ बहुत ज्यादा” फिर मैं उन्हें किस करने लगा वो भी मुझे किस करने लगी किस करते हुए मैं अपना हाथ उनकी जींस पे से उनकी चूत पे रखा लेकिन उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया वो अपनी चूत मुझे टच नहीं करने दे रहीं थी मैंने उनके होंठ छोड़े और कहा “क्या हुआ दीदी ” उन्होंने कहा “सोनू आज जो हमने किया उसके बाद से मुझे यहाँ काफी पैन हो रहा है ” मैंने कहा “क्यों दीदी आपने पहले ये सब नहीं किया क्या ” तो उन्होंने कहा की “क्यों तूने बहुत बार कर रखा है क्या” मैंने कहा “नहीं मैं कैसे करूँगा लेकिन आप कह रही थी ना की आप के कजिन ने किया था आपके साथ पहली बार फिर” तो उन्होंने कहा की “हमने सेक्स थोड़ी ना किया था उसने बस मेरे सूट पे से मेरे सामने हाथ फेरा था मेरे बूब्स को दबाये थे और मेरी सलवार पे से मेरी वेजिना पे हाथ फेरा था जब हम एक शादी में साथ साथ सो रहे थे फिर उसने मेरे हाथ से अपना पकड़ की हिलवाया था बस “
तो मैंने कहा “की उसने और कुछ नहीं किया था क्या उसने आपके कुर्ते के अंदर हाथ नहीं डाला था क्या आपकी सलवार और पेंटी के अंदर भी हाथ नहीं डाला था क्या ” तो उन्होंने कहा “नहीं हम छत पे सो रहे थे मुझे डर था की कोई देख ना ले वो सब मैंने उसे करने ही नहीं दिया उसने कोशिश तो की थी बहुत लेकिन मुझे बहुत डर लग रहा था ” मैंने कहा “शिप्रा दीदी पूरी बात बताओ ना” उनकी बातें सुन सुन के मेरा लंड बिलकुल टाइट खड़ा हो चुका था और तभी शिप्रा दीदी ने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और मुस्कुराते हुए बोली “हाँ तुझे बहुत मजा आ रहा है ना सुनने में ” मैंने कहा “शोर्ट में ही बता दो ना दीदी फिर तो पता नहीं कब मिले हम” उन्होंने कहा बताती हूँ फिर वो बोली हम मेरे ताउजी के बेटे की शादी में गए थे उस समय मैं 11th क्लास में थी तो हम सब सारी फैमिली साथ गए थे तो साथ में मेरे फूफाजी का लड़का राहुल भी था हम काफी अच्छे फ्रेंड थे बचपन से काफी हंसी मजाक करते थे तो जब फेरे चल रहे थे तो मुझे बहुत नींद आ रही थी तो मैंने मम्मी से कहा की मम्मी मैं सो जाऊं क्या तो मम्मी ने कहा था की छत पे चली जा राहुल भी वहीँ सो रहा है तो मैं छत पे गई वहां काफी सारे बिस्तर लगे हुए थे तो मैं राहुल के पास जाके लेट थोड़ी देर में मेरी झपकी लग गई ” तभी मैंने शिप्रा दीदी को बीच में टोका “दीदी आपने क्या पेहेन रखा था ” शिप्रा दीदी बोली “सलवार सूट वाइट और ब्लू कलर का अब आगे क्या ये भी बता दूं की कौनसी ब्रा पेंटी पेहेन रखी थी” मैंने कहा “हाँ दीदी “
वो बोली “याद नहीं है मुझे लेकिन उस समय मैं ब्रा नहीं पहनती थी बस शमीज ही पेहेनति थी अंदर अब तुझे सुन्ना है या मैं बंद कर दूं जल्दी सुन ले प्रीती आने वाली होगी ” मैंने कहा “हाँ दीदी बस सुनाते सुनाते अपने हाथों से मेरा सहलाते रहो ना ” फिर शिप्रा दीदी अपने हाथों से मेरा लंड सहलाने लगी और बोली “फिर थोड़ी देर बाद मेरी आँख खुली तो मैंने देखा की राहुल ने मेरे हाथ पे अपना हाथ रख रखा है और अपने दूसरे हाथ से अपना सहला रहा है , मैंने कुछ नहीं बोला फिर धीरे धीरे उसका हाथ ऊपर जाने लगा और उसने मेरे कंधे पे अपना हाथ रखा और मेरा कंधा सहलाने लगा ” मैंने कहा “फिर ” वो बोली “फिर उसने मेरी तरफ करवट ली और अपने हाथ से मेरा कुर्ता कंधे से नीचे कर दिया और मेरे कंधे पे किस किया मुझे एक झटका सा लगा और वो समझ गया की मैं जगी हुई हूँ फिर वो अपना हाथ मेरे गले से फेरता हुआ मेरे बूब्स पे ले गया और कुर्ते पे से मेरे बूब्स दबाने लगा मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था मजा भी आ रहा था डर भी लग रहा था और शर्म भी आ रही” ये सुनते सुनते मैं भी शिप्रा दीदी के टॉप पे से उनके बोबे दबाने लगा वो मेरा लंड सहला रही थी और मैं उनके बोबे दबा रहा था मैंने कहा “फिर” वो बोली “फिर वो अपना हाथ नीचे लेके जाने लगा मेरी वेजिना पे लेकिन मैंने उसका हाथ पकड़ लिया फिर वो मेरे ऊपर लेट गया पहले मेरे होंठ पे किस किया फिर कुर्ते पे से मेरे दोनों बूब्स को दबाया उन पे किस किया फिर मेरा कुर्ता ऊपर करने लगा लेकिन मैंने मना कर दिया….

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