मैं और मेरी प्यारी दीदी भाग – ३६

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मैंने कहा “दीदी हुक खोलो ना ” वो अपने हाथ पीछे लेके गई और अपनी ब्रा का हुक खोल दिया प्रीती दीदी कि वाइट ब्रा नीचे गिर गई मैं प्रीती दीदी के सेक्सी बदन को निहारने लगा अब वो मेरे सामने बस पेंटी में थी मैं उनके नंगे बोबे देख रहा था इतने मैं वो बोली “ऐसे मत देख ना मुझे शर्म आ रही है ” मैंने कहा दीदी आपके बूब्स बहुत प्यारे है बहुत ही सेक्सी है” और ये केह के मैं अपने हाथों से उनके दोनों नंगे बोबे दबाने लगा फिर मैंने उनका एक बोबा अपने मुंह में लिया और उसे चूसने लगा और अपने दूसरे हाथ से प्रीती दीदी कि पेंटी पे से उनकी चूत को सहलाने लगा उन्हें बहुत मजा आ रहा था मैंने उनके दोनों बोबे चूसे और फिर मैंने अपना हाथ प्रीती दीदी कि पेंटी में डालना चाहा लेकिन उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली “सोनू अभी नहीं ना और अब ज्यादा मत कर नहीं तो प्रॉब्लम होगी मुझे पेन भी हो रहा और अपन ने गेट भी ढलका रखा है अगर पापा मम्मी में से कोई भी उठा और उन्होंने देखा तो उन्हें शक ना हो जाए ” मैंने उनसे कहा “ठीक है दीदी लेकिन आप मुंह में लो ना मेरा “
उन्होंने कहा “हम्म्म्म ” और वो घुटनो के बल बैठ गई और मेरा लोअर नीचे किया मेरा खड़ा हुआ लंड उनके सामने था उन्होंने पहले मेरा लंड अपने हाथ से सहलाया उसे ऊपर नीचे किया फिर उसे किस किया और फिर उसे अपने मुंह में ले लिया मैं तो जैसे जन्नत में पहुँच गया आज मेरा लंड मेरी प्यारी दीदी के मुंह में था मैंने देखा प्रीती बस पेंटी में बैठी थी और मेरा लंड उनके मुंह में था मुझे बहुत मजा आ रहा था वो मेरा लंड चूस रही थी मैंने प्रीती दीदी का क्लिप उनके बालों में से हटा दिया और उनके बाल खुल गए मैं उनके लम्बे घने खुले हुए बालों को सहलाने लगा मैंने एक चीज़ नोटिस की शिप्रा दीदी बहुत अच्छी तरह से लंड चूसती थी लेकिन प्रीती दीदी तो बस मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर ही कर रही थी मैं समझ गया कि प्रीती दीदी को लंड चूसना नहीं आता और वेसे भी मेरा लंड ही था जो उन्होंने पहली बार चूसा होगा ये मुझे पता था वो मेरा लंड चूस नहीं रही थी बस उसे अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी उन्हें शायद नहीं पता था कि लंड कैसे चूसा जाता है लेकिन मैं बहुत खुश था क्योंकि मेरा लंड मेरी प्यारी प्रीती दीदी चूस रही थी मेरा लंड उनके मुंह में था
उनके बाल मेरे एक हाथ में थे मैं थोडा सा नीचे हुआ और झुक के अपने दूसरे हाथ से प्रीती दीदी कि नंगे बोबे को पकड़ लिया और उसे दबाने लगा अब प्रीती दीदी मेरा लंड चूस रही थी और मैं उनके नंगे मुलायम गोरे बोबे दबा रहा था मुझे बहुत मजा आ रहा था तभी प्रीती दीदी ने मेरा लंड अपने मुंह से निकाला और बोली “जब होने वाला हो तो बता देना ” मैंने कहा “हाँ दीदी लेकिन मुझे आपके बूब्स पे निकालना है ” वो मुस्कुराई और वापस मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया मुझे बहुत मजा आ रहा था मैं जल्दी जल्दी उनके बोबे दबाने लगा और वो समझ गई उन्होंने मेरा लंड अपने मुंह से बाहर निकाला और मुझे देखते हुए जल्दी जल्दी उसे हिलाने लगी ऊपर नीचे करने लगी और मैंने उनके बाल छोड़े और अपने दोनों हाथों से उनके दोनों बोबो को पकड़ लिया और उन्हें जोर जोर से दबाने लगा और थोड़ी ही देर में मेरा मुट निकल गया मेरा थोडा सा मुट प्रीती दीदी के चेहरे पे गया और बाकि उनके बोबो पे मेरा मुट निकलने के बाद भी वो मेरे लंड को हिलाती रही फिर वो उठी और हमने एक लम्बा सा किस किया फिर वो पलट के जाने लगी मैंने कहा “कहाँ जा रही हो दीदी ” वो बोली “साफ करने खुद को और कपडे पहनने ऐसे ही सो जाऊं और सुन वो कुर्सी हटा और गेट खोल दे ” और वो बाथरूम में चली गई ……..
थोड़ी देर बाद प्रीती दीदी बाहर आयी और हम दोनों एक दूसरे से चिपक के सो गए दूसरे दिन संडे था प्रीती दीदी और मैं सुबह लेट उठे हम उठ के बाहर गए तो ड्राइंग रूम में से बातें करने की आवाजें आ रही थी हमने सोचा की सुबह सुबह कौन आया होगा हमने बाहर जाके देखा तो ड्राइंग रूम में आरती दीदी और जीजू बैठे हुए थे हम दोनों ने उनसे नमस्ते किया जीजू प्रीती दीदी को बड़ी अजीब तरह से देख रहे थे और मुस्कुरा रहे थे मम्मी बोली “आओ बच्चो बैठो” हम बैठ गए आरती दीदी प्रीती दीदी से बोली “और प्रीती कैसी है तू तो आई ही नहीं उसके बाद हमारे घर पे कैसे चल रही है पढाई ” प्रीती दीदी बोली “बस दीदी ठीक है सब वो आना ही नहीं हुआ उसके बाद ” इतने में मम्मी बोली “अरे आरती श्रेया को नहीं लाई तू अपने साथ उसे कहाँ छोड़ के आई है लियाती ना उसे भी साथ में ” आरती दीदी ने कहा “अरे बुआ जी अब उसे कैसे संभालते सफ़र में वो भी परेशान होती तो उसे तो में मम्मी के पास छोड़ के आई हूँ एक दिन की तो बात है बस वो मेरे एग्जाम का फॉर्म भरना था तो मेरी मार्कशीट मेरी यहाँ पे एक फ्रेंड है उसके पास है क्योंकि मेरा आना तो होता नहीं है यहाँ पे तो वही लेने आई थी तो इन्होने कहा की वो पोस्ट से भेज देगी लेकिन मैंने कहा की मार्कशीट का मामला है कहीं पोस्ट में इधर उधर हो गई तो और दिक्कत हो जाएगी इसलिए हम दोनों ही आ गये मार्कशीट लेके थोड़ी शौपिंग करके कल सुबह की ट्रेन से निकल जाएँगे”
मम्मी बोली “आरती तू भी ना भागते भागते आती है अब जब आई थी तो रुक के तो जाती थोड़ी दिन वैसे ही मिलना कहाँ होता है ” आरती दीदी बोली “अरे बुआ इनका ऑफिस का भी तो है ना तो पॉसिबल ही नहीं होता” सब बातें कर रहे थे लेकिन मैं जीजू को ही नोटिस कर रहा था वो प्रीती दीदी को बहुत अजीब निगाह से देख रहे थे प्रीती दीदी ने टॉप और केप्री पेहेन रखा था वो प्रीती दीदी के पूरे बदन को घूर रहे थे खासकर प्रीती दीदी के बोबो को जो टॉप में से बाहर निकल रहे थे जीजू उनके बोबो को निहार रहे थे लेकिन प्रीती दीदी को कुछ पता नहीं था वो तो बातों मैं लगी हुई थी मुझे ध्यान था की जीजू प्रीती दीदी को ऐसे क्यों देख रहे थे आखिर वो भी प्रीती दीदी के बदन से खेल चुके थे उनकी गांड पे हाथ फेर चुके थे उनके बोबे दबा चुके थे जब प्रीती दीदी उनके घर गई थी और ये सब मैंने पढ़ा था प्रीती दीदी की चैट में थोड़ी देर बाद मम्मी ने कहा प्रीती चाय बना दे सबके लिए और प्रीती दीदी किचन में चली गई थोड़ी देर बाद जीजू भी टॉयलेट का बहाना कर के वहां से चले गए मैं भी वहां से उठ के धीरे धीरे उनके पीछे गया मैंने छुप के देखा प्रीती दीदी किचन में चाय बना रही थी और जीजू उनके पास जाके खड़े हुए वो दीदी से बोले
जीजू – “और प्रीती कैसी हो “
प्रीती दीदी -“ठीक हूँ जीजू “
जीजू – “कौनसी क्लास में हो “
प्रीती दीदी – “12th में “
जीजू – “अच्छा फिर तो बोर्ड्स होंगे इस बार”
प्रीती दीदी – “ह्म्म्मम्म्म्म “
जीजू – “क्या बात वैक्सिंग करवाने लग गई हो हाथ पैर में और ऑयब्रो भी … लगता है पार्लर जाने लग गई हो “
प्रीती दीदी – “हम्मम्मम्म “
जीजू – “अच्छी लग रही हो “
प्रीती दीदी – “मैं अभी आती हूँ दो मिनट में “
और दीदी किचन से जाने लगी और तभी जीजू ने प्रीती दीदी का हाथ पकड़ लिया
जीजू – “कहाँ जा रही हो नाराज हो क्या “
प्रीती दीदी – “नहीं तो आप प्लीज हाथ छोडिये जीजू मेरा “
जीजू – “तो तुम तो बात भी नहीं कर रही हो ढंग से क्या हुआ बताओ तो सही “
प्रीती दीदी – “कुछ नहीं हुआ जीजू “
जीजू -“प्रीती तुम्हारे हाथ कितने प्यारे है कितने कोमल है “
प्रीती दीदी – “जीजू प्लीज मेरा हाथ छोडिये “
और जीजू प्रीती दीदी के पास चले जाते है और उन्हें हग कर लेते है
जीजू (प्रीती दीदी को अपनी बाँहों में पकडे हुए ) – “ओह प्रीती कितना तडपा हूँ मैं तुम्हारे लिए मैं तो तुम्हारा दीवाना हो चुका हूँ तुम तो वापस नहीं आई कभी लेकिन मैं दिन रात तुम्हें ही याद करता हूँ “
(प्रीती दीदी खुद को जीजू की पकड़ से छुडाते हुए) -“जीजू ये आप क्या कर रहे है प्लीज छोडिये मुझे प्लीज”
जीजू(प्रीती दीदी की पीठ पे हाथ फेरते हुए ) – “क्यों क्या हुआ तुम्हें ये अच्छा नहीं लग रहा क्या कितना नरम बदन है तुम्हारा प्रीती आई लव यू सो मच यार ” और ये कहते हुए वो प्रीती दीदी की केप्री पे से उनकी गांड दबाने लगते है प्रीती दीदी उनसे छूटने की पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन जीजू की पकड़ इतनी मजबूत थी की वो कुछ नहीं कर पा रही थी मैं ये सब छुप के देख रहा था जीजू प्रीती दीदी की केप्री पे से उनकी गांड दबा रहे थे और प्रीती दीदी उनसे छूटने की कोशिश कर रही थी जीजू प्रीती दीदी की गांड दबाते हुए कहते है “क्या हुआ प्रीती तुम्हें मजा नहीं आ रहा क्या कुछ नया तो नहीं कर रहा ना हम तो इस से भी बहुत आगे बढ़ चुके है ….ओह्ह कितने नरम हिप्स है तुम्हारे प्रीती” और वो लगातार प्रीती दीदी की गांड दबा रहे थे
फिर वो बोले “उस दिन तुम मेरे और आरती के साथ बेड पे थी तब कितना मजा आया था तुम इतना मचल क्यों रही हो हमने तो बहुत कुछ किया है अब क्यों मना कर रही हो ..भूल गई क्या मैंने तुम्हारा टॉप ब्रा सब नीचे कर दी थी उस दिन रात को हमारे रूम में ” और ये कहते हुए वो प्रीती दीदी की केप्री में हाथ डाल देते और उनकी पेंटी पे से उनकी गांड सहलाने लगते है उनकी इस हरकत से प्रीती दीदी और ताकत से उनसे छूटने की कोशिश करती है लेकिन जीजू ने अपना हाथ उनकी केप्री से बाहर नहीं निकाला तभी प्रीती दीदी जोर से चिल्लाती है “मम्मी सोनू को भेजना” और जीजू जल्दी से हडबडा कर प्रीती दीदी को छोड़ देते है और मैं ऐसे बोलता हूँ जैसे की दूसरे रूम में हूँ “आया दीदी अभी ” ये पूरा सीन देख के मेरा लंड खड़ा हो चुका था मैंने अपना लंड सही किया और किचन में गया

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