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मैं कालगर्ल क्यों बन गयी?

दोस्तों मेरा नाम नमिता शर्मा है.इस समय मेरी आयु सिर्फ १९ साल है.मैं आज अपनी सच्ची कहानी बता रही हूँ,जो लोग मुझे चोदना चाहते हैं वे ध्यान से पढ़ें ।
जब मैं दस साल की थी तब से मुझे सेक्स के बारे में काफी उत्सुकता थी.लें उस समय मुझे सेक्स कके बारे में पूरा ज्ञान नहीं था.जब मैं पड़ोस के छोटे छोटे नंगे बच्चों की देखती थी तो चुपचाप से उनके लंड पकड़ कर हिलाती थी.जिस से लंड कडक और लम्बे होजाते थे .इस से मुझे बड़ा ताज्जुब होता था की .ऐसा क्यों होता है.छोटा सा लिजलिजा लंड कैसे बढ़ जाता है।
जब भी कोई किसी को गांड मारने की गाली देता था,तो मैं सोचती थी की.मर जाने बाद गांड दुबारा ज़िंदा कैसे हो जाती है.जब मैं लोगों के मुंह से, मादरचोद,बहिन के लौड़े,बहिनचोद.चूतिया जैसे शब्द ध्यान से सुनाती थी.और दुहराती थी तो मुझे कहा जाता था की यह गंदे शब्द हैं .मुझे यह बात समझ में नही आती थी की यदि यह शब्द गंदे है ,तो सब लोग इनका धड़ल्ले से प्रयोग क्यों करतेहैं।
इसीतरह जब मैं टीवी या सिनेमा में सुहागरात के सीन देखती थी तो मेरी चूत गीली हो जाती थी.मैं सोचती थी की सुहागरात की जगह सुहाग दिन क्यों नहीं होता.आखिर इसे रात में ही क्यों मनायाजाता है,ऐसे कई प्रश्न थे.जब हनीमून में लड़की को पहिली दर्द होता है तो वह बार बार क्यों चुदवाती हैं,
एक दिन मुझे अपनी एक ख़ास सहेली गौरी मिल गयी.मैं अक्सर उसजे साथ इन्हीं बातों पर चर्चा किया करती थी.एक हफ्ते पाहिले ही उसकी शादी हुयी थी.वह अपने पति अनुज केसाथ हनीमून मना कर घर आयी हुई थी.उसका पति भी अपनी ससुराल आया था.मैं ने गौरी से हनीमून के बारे में पूछा तो उसने कहा की मैं सारी बातें ,केवल थ्योरी ही बता सकती हूँ,अगर तुमें प्रक्टिकल ज्ञान चाहिए तो मेरा पति.तुम्हें सब कुछ समझा देगा।
शादी के समय मैंने गोरी के पति को देखा था.काफी स्मार्ट और सुन्दर था.मैं ने कहा ,गोरी मैनानुज से अकेले में मिलना चाहती हूँ.और सबकुछ सीखना चाहती हूँ,गोरी ने मुझे मंगलवार रात के दस बजे घर आने को कहा था.उस दिन घर के सारे लोग दो दिनके लियी बहार गए थे .सिर्फ आनुज और गोरी घर पर थे.मैं ठीक समय पर पहुँच गयी.गोरी और अनुज ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया.और अपने पलंग पर बिठाया.मुझे व्हिस्की के दो बड़े पेग पीने को दिए.उस समय वह सिर्फ ब्रा और पेंटी पहिने हुए थी.गोरी ने मुझे भी ऐसा करने को कहा.और कहा की इस से तुम्हारी झिझक निकल जायेगी.गोरी बोली ,अनुज अब तुम्हारी शिष्या तैयार है.इसे सब कुछ सिखाओ मैं तुम्हारी मदद करूंगी.गोरी बोली अब तुम अनुज का लंड बाहर निकालो और उसे प्यार से चूसो.जैसे ही मैं ने लंड बाहर निकाला वह स्प्रिंग की तरह सीधा खडा हो गया.उस १ १ इंच के लंड को देख कर मैं भौंचक्का रह गयी.गोरी बोली नमिता क्या सोच रही हो .मैं ने हनीमून में सात दिन तक इसी लंड से लगातार जमके चुदाई करवाई है .यह कहते ही वह फ़ौरन नंगी हो गयी.मैं ने देखा की उसकी चूत का छेद थोड़ा खुला हुआ था.शायद यह अनुज के लंड का कमाल था.मैं पहले तो थोडासा शरमाई फिर लंड को आइसक्रीम की तरह चूसने लगी.मेरी चूत में अजीब सी सुरसुरी हो रही थी.लंड का गुलाबी मोटा सुपारा देख कर मुझे वह लंड अपनी चूत में लेने की इच्छा होने लगी.गोरी बोली आनुज ज़रा आराम से करना नयी चूत है.और मुझ से बोली नमिता ,डरना नहीं ,सिर्फ थोड़ा सा दर्द होगा.इसकी बाद मजा ही मजा .ज़रा अपनी चूत ढीली रखना.गोरी ने मेरी कामर के नीचे एक तकिया रख दी.अनुज ने अपनाल्न्द मेरी चूत के छेद पर रखा और और एक झटके में एक चुथाई लंड अन्दर घुसा दिया.मुझे दर्द होने लगा.तो अनुज रुक गया.फिर जोर से इतने जोर का ढका मारा की पूरा लंड मेरी चूत को फाड़ते हुए चूत में समा गया.मई दर्द के मारे हाय हाय ओह ओह उफ़ उफ़ करने लगी,गोरी मेरी चूचियां चूसने लगी और अपनी वहुत मेरे मुंह पर रखदी.चूत का नमकीन टेस्ट लेने से मेरा दर्द कुछ कम हो गया.दस मिनट के बाद अनुज ने लंड अन्दर बाहर करने लगा.और लंड चूत में आराम से जाने लगा.मुझे मजा आने लगा तो मैं अपनी चूत ऊपर उछालने लगी,अनुल मशीन की तरह चुदायी कर रहा था.मैं ने मस्त होकर अनुज की कमर पर हाथ रख दिए .पूरे कमरे में फच फच फच की आवाज के साथ मेरी ओहोहोह की आवाज आ रही थी.मुझे ऐसी इच्छा हो रही थी की अनुज अपने लंड के साथ अपने दोनों अंडकोष भी मेरी चूत में डाल दे.मुझे बहुत मजा आ रहा था.मुझे पता चल गया था की चूत में लंड डलवाने में काऐसा आनंद आता है.तब से मैं हरेक लंड अपनी चूत में डलवाना चाहती हूँ.एक घंटे की चुदाई के बाद अनुज ने मेरी चूत में अपना गर्म गर्म मेरी चूत में डाल दिया.मेरी चूत में ठंडक हो गयी।
गोरी ने मेरी चूत का सारा रस चाट लिया और अनुज का लंड चूसने लगी.दस मिनट के बाद लंड दोबारा तैयार हो गया.गोरी ने मुझे पंग पर घोड़ी बनाया और मेरी गांड को ऊपर करके गांड पर तेल लगा दिया.और बोली अब दूसरे पाठ के लिए तैयार हो जाओ.अनुज लंड गांड के छेड़ अपर रख दिया.और धीमे धीमे लंड गांड में सरकाने लगा.मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरी गांड में लोहे जा गर्म डंडा डाल दिया हो.गोरी लगातार मेरी गांड को सहला रही थी गांड फैला कर लंड के लिए जगह बना रही थी.ताकि लंड पूरा चला जाये.दर्द से मेरा चेहरा लाल हो रहा रहा.लेकिन अनुज लंड डालने में लगा रहा.अखिर्मेरी गांड पूरा लंड लील गयी.फिर अनुज ने ऐसे जबरदस्त ढकी मरे की मेरी गांड ओ\पोली हो गयी.हर ढकी पर मैं उछल पडती थी.जब गांड मेंलंड के लिए जगह हो गयी तो लंड गपागप आने लगा। मुझे भी माजा आने लगा मैं खुद अपनी गांड लंड की और कर दी थी.ताकि पूरा लंड गांड में चला जाए.मैं अनुज से बोली अनुज जोर जोर से डालो .फाड़ दो साली मेरी गांड को.हाय अनुज बहुत मजाआ रहा है.लंड कमाल का है .मेरी चूत से फिर से पानी आ रहा है.अपनी स्पीड तेज करो.पूरी ताकत से धक्के मारो.ओह ओह कितना मजा आ रहा है.गांड में चूत से दोगुना मजा आ रहा है।
गोरी बोली नमिता अब समझ गया की सुहागरात में कैसा मजा आता है.बताओ लंड कैसा लगा.मैं नेकहा मई इस मजे के लिए सारी दुनिया के मजे छोड़ दूंगी.चुदाई के आगे सारे मजे बेकार हैं.मेरी तो ऎसी इच्छा हो रही है की मैन्रात्दीन इसीतरह हरदम सुहागरात मनाती रहूं और लंड के मजे लेती रहूं.काश मेरी यह इच्छा पुरी हो जाए।
तभी अनुज बोला नमिता चिंता नहीं करो,मैं तुम्हारी यह इच्छा पूरी करने का वादा करता हूँ.मैंतुम्हें एक हाइक्लास कालगर्ल बना दूँगा.ताकि तुम रोज रोज सुहागरात मना सको .और नए नए लंड लेकर अपनी चूत और गांड से मजा लेती रहो
बाद में अनुज अपना वायदा पूरा कर दिया,और मुझे अपने साथ भोपाल ले गया.वहां उसने शर से दूर एक बड़ा सा बंगाल खरीद लिया है.और रोज मेरे लिए ग्राहकों का इंतजाम भी करता है,दिखाने के लिए मैं एक कपानी में काम करती हूँ.लेकिन मेरा असली धंदा चुदवाने का है,मेरे ग्राहकों में बड़े बड़े ऑफिसर, नेता,धनी लोग तथा पुलिस वाले भी सामिलहैं .बाद में गोरी भी इस धंदे में शामिल हो गयी इस धंदे में लंड और पैसों की कोई कमी नहीं है.आखिर घरेलू औरतें भी तो अपने पति से चूत के बदले उनका पैसा ले लेती है.फिर चूत के बदल पैसा कमाना कौन सा अपराध है.बताइये आपका क्या कहना है?
हम तो अपनी चूत खोल कर आपके इंतज़ार में बैठे हैं.आइये हमारी चूतों का मजा लीजिये.आप को ऐसा खुश कर देंगे की आप हमेशा अपना लंड हाथ में लेकर हमारे पास आयेंगे।
आपके लंड के इंतज़ार में ..सदा चुदासी नमिता शर्मा।

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