मेरी माँ का गेंगबेंग – [भाग 2]

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आगे आपने पढ़ा मेरी माँ का गेंगबेंग अब चालु हो गया था और उसके तीनो छेद को भर दिया गया था. अब आगे पढ़े.
नरेश ने अब अपनी ऊँगली को अन्दर ही रखे हुए उसे दबाना चालू कर दिया. माँ की सिसकियाँ बढ़ रही थी और वो जोर जोर से अपनी गांड हिला रही थी. इधर बाबू ने पूरा लोडा माँ के मुह में भर दिया था और वो उसके बाल पकड के जोर जोर से हिला रहा था. माँ की नाक से पानी बहार आ गया, शायद उसने सांस दबा रखी थी इसलिए. हरपाल माँ को उछाल रहा था अपने लोडे के ऊपर और माँ एक हॉट गेंगबेंग को अपनी प्रॉब्लम की वजह से झेल रही थी.

१० मिनिट तक माँ की चूत चोदने के बाद हरपाल कुछ ढीला पड़ा. शायद उसका वीर्य अब लंड के सुपाडे पर आया हुआ था. उसने माँ की कमर को पकड़ा और उसे झंझोड़ते हुए ठोका. नरेश ने उस वक्त अपनी ऊँगली को माँ की चूत से निकाल लिया था. हरपाल के बदन में दो झटके लगे और उसने अपना वीर्य माँ की चूत में ही निकाल दिया. जब उसने अपना लंड निकाला तो मुझे दूर से ही वीर्य की चमक दिख रही थी. बाबु ने माँ के मुहं से लोडा निकाला और वो अब चुदाई के लिए आगे बढ़ा.

माँ को बिना सांस लेने का कोई मौका दिए उसने अपने बड़े भाई के वीर्य से चिकनी हुई चूत में लंड डाल दिया. हरपाल कौने में बैठ गया और चिलम में तम्बाकू भर के बाबू को चुदाई करते हुए देखने लगा. बाबू ने माँ को कुतिया बनाया हुआ था और वो गांड को आगे पीछे कर के ठोके जा रहा था.

नरेश अपना लोडा हिलाता हुआ आगे गया और माँ के मुहं में लोडा रख दिया. माँ जोर जोर से हिल रही थी. बाबु ने अपने हाथ से चुंचियां पकड़ी और उसे दबाते हुए चोदने लगा.

चिलम का एक कस लेते हुए हरपाल बोला, ससुर कडक चीज हैं नरेश, चोदो साली को!

माँ ने गुस्से से भरी हुई नजर से हरपाल को देखा लेकिन वो सब व्यर्थ ही था, वो अभी गुंडों में फंसी हुई थी!

नरेश का लोडा अब एकदम टाईट हो गया था चुसे जाने के बाद.

बाबू को उसने कुछ इशारा किया तो बाबू ने माँ की चूत से लंड निकाल लिया. नरेश ने अपना लोडा भी मुहं से निकाल लिया. वो निचे फर्श पर लेट गया और बोला, आजा मेरी रानी मेरे लोडे के ऊपर सवार हो जा.

माँ ने अपने एक हाथ में थूंक भरा और उसे चूत के ऊपर लपेड डाला. फिर उसने एक हाथ से नरेश का लंड अपने हाथ में लिया और उसे चूत पर सेट करने लगी. नरेश को जैसे ही चूत के छेद की चिकनाहट दिखी उसने फट से अपना लोडा धकेल दिया. माँ के मुहं से आह निकल गई और वो छटपटा रही थी. लेकिन नरेश ने उसे गर्दन के पास से ऐसे पकड़ा हुआ था की माँ छुड़ा ही नहीं सकती थी. नरेश जोर जोर से अपना लोडा माँ के भोसड़े में अन्दर बहार करने लगा था.

बाबु माँ के पीछे आ गया और उसने माँ की गांड पर थूंक लगा दिया.

माँ ने पीछे मूड के कहा, अरे नहीं पीछे नहीं. मैंने कभी पीछे  नहीं करवाया हैं और करवाना भी नहीं चाहती हूँ.

बाबू ने माँ की गांड पे एक जोर का तमाचा लगाया और बोला, साली इतना बड़ा कर्ज हम माफ़ कर रहे हैं तो तुझे भी अपनी कुछ आहुति हमें देनी पड़ेंगी ना. वैसे भी तेरे हुस्न के प्याले जैसे कुल्हे साला दिमाग ख़राब कर चुके हैं इन्हें तो ठोकना ही पड़ेंगा आज.

माँ सहम गई, उसे पता था की आज तो उसकी गांड ठुकेगी ही. बाबू ने लोडा छेद पर एकदम सेट किया. उसने नरेश को इशारा कर के रुकने के लिए कहा क्यूंकि नरेश के झटको से वो सही तरह लंड गांड पर सेट नहीं कर पा रहा था. नरेश के रुकते ही बाबू ने लोडा गांड पर रखा और एक झटके में आधा लोडा गांड में अन्दर कर दिया. माँ के गाल पर आंसू की बुँदे आ गई क्यूंकि वो मोटा लंड उसकी गांड फाड़ रहा था. नरेश ने फिर से अपने बदन को झटके देना चालू कर दिया था. और ऊपर से बाबू गांड को खुरेद रहा था. माँ पानी के बिना मछली की तरह छटपटा रही थी क्यूंकि एनाल सेक्स उसके लिए बहुत कठिन हो रहा था. बाबू का लंड एक बार झटका खा के बहार आ गया. तब मैंने देखा की माँ की गांड कितनी खुल गई थी चुदाई से. बाबू ने फट से हलती हुई गांड को पकड के अपना लंड अन्दर धकेल दिया. गांड ढीली हुई थी इसलिए लंड बिना किसी मुश्किल से अन्दर घुस गया.

बाबु जोर जोर से माँ की गांड को थोक रहा था. माँ के पुरे बदन में पसीना आ गया था लेकिन वो बाबूजी के कर्ज के लिए आज सब से बड़ी क़ुरबानी को देने में कोई कसर नहीं रखना चाहती थी.

बाबु ने २ मिनिट और गांड मारी थी की उसका लंड वीर्य फेंक गया. उसने आधे से ज्यादा वीर्य तो माँ के कूल्हों पर ही निकाला था. फिर व खड़ा हुआ. हरपाल सिंह अब उठा और उसने चिलम बाबू के हाथ में दे दी. उसका एक बार फिर से खड़ा हुआ था. और वो सीधा ही माँ के पीछे आ गया गांड मारने के लिए. माँ भी हैरान थी की साला यह क्या. आगे से नरेश चूत ठोकता गया और पीछे से हरपाल ने माँ को गांड में लोडा दे दिया.

माँ की बदहाली पूरी ४० मिनिट और चली. हरपाल, बाबु और नरेश तीनो ने माँ की चूत के साथ गांड का स्वाद भी लिया. जब वो लोग घर से निकले तो माँ अभी भी नंगी पड़ी हुई थी. उस से उठा ही नहीं जा रहा था. आधे घंटे के बाद वो उठी और अपनी गन्दी चूत और गांड को साफ़ करने के लिए बाथरूम की और बढ़ी. मौका देख के मैं भी घर से बहार निकल गया. सच में बाबूजी के कर्ज के लिए माँ ने बहुत बड़ी क़ुरबानी दे डाली थी…!

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