मेरी माँ का गेंगबेंग – [भाग 1]

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मेरी मम्मी का नाम मोनिका हैं और हम हरयाणा के एक छोटे से गाँव में रहते हैं. मम्मी बहुत सुन्दर और उसका जिस्म भरा हुआ हैं, उसका रंग मस्त साफ़, उसके बूब्स और हिप्स बहुत ही मोटे हैं. मम्मी की गांड पीछे ऐसी निकली हुई है जैसे की किसी पोर्नस्टार के कुल्हें. क्यूंकि वो दिनभर काम करती हैं इसलिए उसके बदन पर चरबी बहुत ही कम हैं. मम्मी की कमर ३० इंच की हैं और निचे उसकी हिप्स एकदम से ३८ की हैं जिस से उसका बदन कोला की बोतल जैसा लगता हैं.
मम्मी ज्यादातर सलवार स्यूट या फिर कुरता पजामा पहनती हैं. कहने को तो यह भी अतिशयोक्ति नहीं हैं की मेरी मम्मी पुरे गाँव में सब से हॉट औरत हैं.
गाँव के ज्यादातर लोग मम्मी को बुरी नजरों से ही देखते हैं. मम्मी का स्यूट कभी कभी चूतडों के बिच में फंसा हुआ होता हैं और वो चल रही होती हैं तो लोग उसे देखते रहते हैं. मैंने कई बार मेरे पड़ोसियों और महोल्ले के दुसरे मर्दों को माँ की गांड को ताड़ते हुए देखा हैं जब वो मार्किट जाती हैं या फिर कपडे सुखाती हैं. मुझे भी अपनी मम्मी बड़ी हॉट लगती हैं कसम से!

मैं कभी कभी मौका मिले तो उनके नंगे जिस्म को देखता हूँ. जैसे की वो झाड़ू लगा रही हो तो मैं ऊपर चढ़ जाता हूँ किसी बहाने से ताकि मैं उनके बूब्स के बिच की गली को देख सकूँ. लेकिन यह कहानी मेरी और माँ के सेक्स की नहीं हैं!

यह कहानी में जो लंड हैं वो हमारे गाँव के तिन जाट भाई, हरपाल, नरेश और बाबु के थे. नरेश ने मेरे बाबूजी को कुछ कर्जा दिया था नयी ट्रक लेने के लिए. मेरे बाबूजी ट्रक चलाते हैं. लेकिन ट्रक नुकशान में चल रही थी इसलिए बाबूजी उनके पैसे दे नहीं पाए थे. नरेश कितनी बार बकाये के लिए आया था लेकिन बाबूजी उसे आधा पैसा ही दे पाए थे. बाबूजी ने पैसे बचाने के लिए अपने ड्राइवर को काम से निकाल दिया था और सारी खेप वो ही लगाते थे. उस दिन मैं अपने दोस्त रमेश के वहाँ था जब नरेश मेरे घर आया. नरेश को आता देख मैंने रमेश की छत से अपनी छत पर जाके ऊपर के छेद से अन्दर देखा. माँ दरवाजे के पास खड़ी थी. नरेश सामने खड़ा था.

भाभी जी, अब बहुत वक्त हो गया. ब्याज पे पैसा दिया हुआ होता तो अब तक तिगुना हो गया होता.

भाई साहब वो दिन रात महनत करते हैं ताकि आप का कर्जा पहले दे सकें, पर किस्मत हम से रूठी हुई हैं आजकल.

भाई मत कहो मुझे, वैसे आप को भी मैंने सरल रास्ता बताया था जिस से मैं आप के दरवाजे पर ना आऊं, लेकिन आप अभी तक मानती ही नहीं हो!

यह पाप हैं, मैं अपने पति को धोखा कैसे दूँ.

भाभी जी आप एक तरह से उसकी मदद ही करेंगी. वो मर मर के पैसे जुटा रहा हैं आप को एक बार मरवा के सब कर्जा माफ़ करवा लेना हैं.

नहीं नहीं, नरेश जी ऐसा नहीं होगा हम से. मुन्ना भी बड़ा हो रहा हैं, उसने देख लिया तो मैं शर्म से मर जाउंगी.

अरे कोई कुछ नहीं देखेंगा, मेरे भाई साहब हरपाल सिंग तो यहाँ तक कहते हैं की आप हमें खुश कर दो तो वो आप को चांदी में तोल देंगे. पिछले साल बिहारी सरफराज की बीवी फरजाना ने एक ही रात में भैया से २५,००० का कर्ज माफ़ करवाया था. वैसे हम लोग जबरदस्ती में नहीं मानते हैं वरना आप हम भाइयों के रुआब से तू वाकिफ ही हैं. आप कका मन हो तब मुझे फोन कर देना, वरना अगले हफ्ते मैं कर्ज की वसूली के लिए घर खाली करवाऊंगा आप लोगो से.

इतना कह के नरेश चला गया. मैंने देखा की माँ बहुत ही टेंशन में हैं.

शाम को खाने के वक्त माँ ने मुझे कहा, बेटा अपना फोन देना.

मैंने अपना एंड्राइड फोन उसे दिया. इस फोन में मैंने ऑटो कॉल रिकॉर्डर लगा रखा था जिस से मैं सब कॉल बाद में सुन सकता था. १० मिनिट के बाद माँ वापिस आई और फोन मुझे दिया. खाना खाने के बाद मैं छत पर गया और देखा की माँ ने किसे कॉल किया था. पहला कॉल बाबूजी को और दूसरा नरेश को किया हुआ था. मैंने हेडफोन लगा के दोनों कॉल सुने.

बाबूजी ने माँ को मइके चले जाने के लिए कहा था क्यूंकि एक हफ्ते में पैसे जुटाना मुश्किल था. गाडी का खरीददार भी नहीं था कोई इसलिए वो बहुत टेंशन में थे. कॉल के एंड में माँ  ने बाबूजी से कहा था की आप चिंता मत करो मैं कुछ करती हूँ.

दुसरे कॉल में नरेश के साथ माँ की बात हुई थी. और जैसे मुझे अंदाजा था, माँ ने नरेश की मांग कबूल रखी थी. नरेश ने कहा था की वो उसके भाई हरपाल और बाबु कल दोपहर में घर आयेंगे. मैं यह सुनके हैरान हो गया. मैं दोपहर में कोलेज में होता था इसलिए माँ ने उन्हें उस वक्त ही बुलाया था. मैंने भी मनोमन माँ की चुदाई देखने का फैसला कर लिया.

दुसरे दिन दोपहर को मैंने अपने घर में पीछे के दरवाजे से घुसा और एक अलमारी के अन्दर छिप गया. मुझे पक्का यकीन था की माँ चुदवाने के लिए वही आएँगी कक्यूंकि वो कमरा उसका बेडरूम था.

१० मिनिट तक वेट करते हुए मैं थक गया था. तभी दरवाजा खुला और मेरी माँ अन्दर दाखिल हुई. उसके पीछे हाथ में डंडा लिए हुए तीनो जाट भाई दाखिल हुए. हरपाल ने अपने गले में एक शाल डाली हुई थी और उसका साढ़े ६ फिट का कद बड़ा ही डरावना लग रहा था.

चारो अंदर आये और माँ ने दरवाजा खोल दिया. हरपाल ने माँ को सीधे ही बाँहों में भर लिया और उसकी चुंचियां जोर जोर से मसलने लगा. उधर बाबु और नरेश ने भी अपनी धोती ऊपर कर के लोडे बहार निकाल लिए. माँ ने दोनों के लोडे देखे तो उसके दिल में भी डर बैठ गया. तीनो इन जाटों के लोडे बड़े ही मोटे और लम्बे थे. बाप के कर्ज के बदले माँ की चुदाई देख के मैं भी पानी पानी हो गया था.

हरपाल ने अब माँ के ब्लाउज में हाथ डाला और उसे फाड़ ही दिया. हरपाल के हाथ से अब माँ की ब्रा की पट्टी भी खुल गई थी. माँ की चुंचियां देख के तीनो भाइयों के मुह में पानी आ गया. हरपाल बड़ा था इसलिए पहला चांस भी उसे ही मिला. वो माँ की चुन्चियों को अपने दोनों हाथो से पकड के निपल्स को चूसने लगा. बाबू ने माँ के घाघरे को खोला और अन्दर के पेटीकोट को फाड़ दिया. माँ ने बहुत प्रयास किया अपनी झांट वाली चूत को छिपाने का लेकिन इन भाइयों ने उसे ऐसा करने नहीं दिया. हरपाल ने अपने बदन के सारे कपडे उतार फेंके और वो कुर्सी के ऊपर बैठ गया. उसका लंड मेरे से १० फिट से भी ज्यादा दूर था लेकिन बड़ा ही डरावना था साला.

बाबु और नरेश ने माँ को पूरा नंगा कर दिया था और वो खुद भी नंगे हो गए थे, मेरी माँ तिन जाट लोड़ों के बिच में खड़ी हुई थी. हरपाल ने माँ के बाल पकडे और उसे अपने लोडे की और खिंच लिया. माँ ने अपना मुहं खोला ऐसे ही हरपाल ने अपना लंड उसके मुह में पेल दिया. माँ की आँखे जैसे फट गई क्यूंकि वो लंड सच में बहुत बड़ा था. नरेश और बाबु ने माँ का एक एक छेड़ हिस्से में ले लिया था. नरेश पीछे माँ की गांड को देख के अपना लंड हिला रहा था. वो गांड के छेद के ऊपर थूंक के अपनी ऊँगली से छेद को मसल रहा था. बाबु ने तो अपने मुहं माँ की चूत में लगा दिया था और वो अपनी जबान से चूत को चाटने लगा था. माँ अपने एक हाथ से हरपाल के लोडे को हिला रही थी और उसके सुपाडे को चूस रही थी.

पांच मिनिट माँ को लंड चुस्वाने के बाद हरपाल ने उसे खड़ा किया. माँ को उसने बिस्तर के ऊपर धक्का दिया और नरेश और बाबु कू हटने के लिए इशारा किया. माँ ने अपनी टाँगे बिस्तर में गिरते ही खोल दी थी. मुझे दूर से अपनी माँ की झांट वाली चूत दिख रही थी. हरपाल ने बिस्तर के अन्दर जम्प लगाया और उसने एक हाथ से अपना लंड पकड के चूत पर रख दिया. देखते ही देखते वो लोडा फट से माँ की चूत में घुस गया. हरपाल ने एक ही झटके में पूरा लोडा अन्दर घुसेड दिया था जिसकी वजह से माँ को बहुत दर्द हुआ. वो कराह रही थी लेकिन हरपाल ने तो पूरा लंड चूत में डाल के ही रोक लगाईं. हरपाल के लोडे की और माँ की चूत की झांटे आपस में मिक्स ओ गई थी, चूत और लंड का सम्पूर्ण मिलन हो गया था.

बाबू और नरेश खड़े खड़े अपने लोडे को हलके हाथ से सहला रही थी. वो इतने धीरे से लोडा हिला रहे थे की उसे मुठ मारना तो नहीं कह सकते थे.

हरपाल ने अपने होंठो को माँ के होंठो से लगा दिया और अपने लोडे को अब चूत में जोर जोर से हिला रहा था. नरेश माँ की उपर निचे होती हुई गांड को देख के रुक नहीं पाया. वो निचे बैठा और अपने सीधे हाथ की एक ऊँगली को छेद पर घिसने लगा. माँ ने मूड के पीछे देखा तो नरेश के होंठो पर शियाल वाली स्माइल आ गई. माँ को जबरन आगे मुड़ना पड़ा क्यूंकि हरपाल ने उसका मुह पकड के आगे कर दिया था. हरपाल ने फिर से चुम्मा लिया और वो अपने लोडे को जोर जोर से ठोकने लगा. माँ के मुह से आह आह निकल जाती थी जब चुम्मा थोडा छूटता था.

नरेश ने अपनी एक ऊँगली अब माँ की गांड में कर दी. माँ दर्द से कराह उठी लेकिन वो कुछ भी बोल नहीं पाई. नरेश ने जब ऊँगली को बहार खिंची तो माँ का दर्द कुछ कम हुआ. लेकिन नरेश ने ऊँगली वापस अंदर डाली और वो माँ की गांड को अपनी ऊँगली से ही जोर जोर से चोदने लगा था. आगे उसका बड़ा भाई माँ की चूत को चोद रहा था और पीछे से वो माँ को गांड में ऊँगली दिए हुए थे. इतना कम हो तो फिर बाबु माँ के पास आके खड़ा हो गया. उसने हरपाल की और देखा और कुछ इशारा किया. हरपाल ने माँ का मुहं छोड़ दिया.

बाबू ने माँ को कंधे से पकड के ऊपर की और उठाया और अपना लोडा उसके मुहं के सामने रख दिया. माँ ने अपने हाथ से बाबू का लोडा पकड़ा और और वो उसे हिलाने लगी थी. लेकिन बाबु लोडा हिलवाना नहीं बल्कि चूस्वाना चाहता था. उसने माँ के बाल पकडे और उसका मुह अपने लोडे के करीब ले आया. माँ को मुहं खोलना ही पड़ा. और जैसे ही उसका मुहं खुला बाबु ने अपना लोडा अन्दर कर दिया.

बाबु अपना लोडा माँ के मुहं में जोर जोर से अन्दर बहार कर रहा था बिना किसी दया रखे. माँ को वो लोडा इतना दर्द दे रहा था की उसकी आँख से आंसू बहार आ निकले. तीनो भाई माँ के ऊपर अड़े हुए थे और एक एक छेद को खुरद रहे थे.

उसके आगे क्या हुआ वो आप इस कहानी के अगले भाग में पढ़े, जिसमे माँ की चूत और गांड चुदी थी.

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