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मम्मी और आंटी ने डिल्डो से लेस्बियन किया

मेरा नाम दीपा है और हम लोग सुरत की एक पोश कालोनी में रहते है। मेरी मां का नाम स्वाती है और वो एक बड़ी ही सेक्सी किस्म की औरत है। माँ जब नाइटी पहन के बहार निकलती है तो बहुत सब लड़के और अंकल लोग उसे देख अपने लोडे मसलते है। माँ का लेकिन कोई अफेयर शफेर मैंने अपनी लाइफ में नहीं सुना है।

पड़ोस की सुशीला आंटी उनकी खास सहैली है। कभी मां उसके घर पर तो कभी पूरी दोपहर आंटी हमारे घर पर आती थी। मां के कमरे में एक छोटा टीवी है वहां पर वो दोनों सीरियल्स देखती थी। एक दिन माँ के लिए पार्सल आया। मैंने पार्सल को ले के वहां टेबल पर रख दिया और मैं कोलेज के लिए निकल गई। जब कोलेज से वापस आई तो ना ही माँ ने पार्सल की बात की ना मैंने।

माँ वैसे जब भी कोई गारमेंट वगेरह ऑर्डर करती थी तो मुझे पार्सल आने के दिन ही दिखाती थी। मैंने सोचा की जरुर कोई गरबड है। मुझे लगा की शायद माँ ने मेरे लिए कोई सरप्राइज़ गिफ्ट मंगवाया होगा!

मैंने सोचा की मां के लेपटोप में जरुर उसकी ऑर्डर हिस्ट्री में होगा वो। मैंने मौका देख के मां जब खाना बना रही थी तो उसका लिपि लेपटोप खोला। अन्दर फ्लिपकार्ट, स्नेपडील सब शोपिंग कार्ट में देखा तो कोई रिस्नट ऑर्डर नहीं था। मुझे लगा की शायद मां ने किसी और साईट से मंगवाया होगा। फिर मैंने मां की ब्राउज़र हिस्ट्री देखी तो एक साईट को देख के मेरी आँख खुली रह गई। वो एक सेक्स टॉयज की साईट थी। मैंने वहां पर देखा तो वहां पर कोई लॉग इन नहीं था। शायद मां ने वहां से आलरेडी लोग आउट कर लिया था। मेरे मन में कुतुलता हुई की क्या मेरी मां ने सच में अपने लिए कोई सेक्स टॉय मंगवाया था!

मैंने अब ठान लिया की इस बात की जड़ तक जाना पड़ेगा। मैंने वापस जा के देखा तो मां अभी भी किचन में ही थी। अब मैंने मां की अलमारी वगेरह चेक की एकदम चुपके से। मां ने पार्सल के खाली कागज़ को फाड़ के उसे एक पोलीथिन बेग में भरा हुआ था, शायद किसी को पता न चले उसके लिए। फिर अंदर की लोक को खोल के मैंने देखा तो मेरी आँख खुली रह गई। वहां पर एक स्ट्रेपओन डिल्डो था जो लेस्बियन औरतें यूज करती है। वो काफी लम्बा था कम से कम 7 इंच का!

उसके साथ ही एक चिठ्ठी भी थी। उसके ऊपर लिखा हुआ था, फॉर स्वाती, विथ लव!

अब मेरी मां के लिए पापा तो ये स्ट्रेप ओं भेजने से रहै! वैसे पापा को मां के लिए टाइम ही नहीं था। फिर मां का ये आशिक था कौन!

मैंने सोचा की मां के पीछे पड़ना पड़ेगा मुझे।

और दुसरे दिन से ही मैं मां के ऊपर वाच रखने लगी। मैं कोलेज बंक कर के अपने घर के अगल बगल में अपने फ्रेंड्स के घर छिपी रहती थी जहाँ से मेरा घर दिखे। लेकिन मां एक हफ्ते भर कही बहार नहीं गई। हां दो बार पड़ोस में सुशीला आंटी के वहां गई थी और बाकि के दिनों में आंटी ने हमारे घर में कुछ घंटे गुजारे थे।

मेरे मन में शंका हुई की क्या लेस्बियन सेक्स करती है मेरी मां पड़ोसन आंटी के साथ?

साला ऐसा ही चक्कर लग रहा था!

मैंने सोचा की इन दोनों को एक्ट करते हुए देखना पड़ेगा।

दुसरे दिन मैं घर में ही छिप गई। दोपहर के डेढ़ बजे के बाद सुशीला आंटी अपनी नाइटी पहन के आई। माँ ने दरवाजा खोला और वो दोनों वहां पर दरवाजे के पास ही एक दुसरे के हाथ पकड़ के खड़ी हो गई। मां ने आंटी से कहा, बहुत देर कर दी तूने आज तो, एक बजे से वेट कर रहीं हूँ मैं तेरा!

सुशीला आंटी:- मेरी जान मैं आज पति के लिए खाना बनाने में लेट हो गई।

फिर मां का हाथ पकड़ के आंटी उसे बेडरूम में ले गई। उन्के अन्दर जाते ही दरवाजा बंद हुआ। मैं परदे के पीछे छिपी थी। वहां से निकल के मैं दरवाजे के पास आई और निचे बैठ के कीहोल से अन्दर देखने लगी। अन्दर मां का और आंटी का लेस्बियन चालू हो गया था। माँ की नाइटी को आंटी ने उतार दिया था और वो उसके बड़े बूब्स को चूस रही थी। फिर माँ ने आंटी की नाइटी खोल दी। माँ ने अपनी अलमारी से वो स्ट्रेपओन निकाला और आंटी की कमरे के ऊपर बाँध दिया। आंटी के आगे जैसे लंड उग निकला था।

और फिर माँ अपने घुटनों के ऊपर बैठ गई और आंटी के डुप्लीकेट लंड को चूसने लगी। आंटी ने माँ का माथा पकड के अपने स्ट्रेपओन के ऊपर उसे खिंचा और बोली, चूस मेरी रानी स्वाती चूस मेरे लोडे को।

माँ ने डिल्डो को ऑलमोस्ट पूरा अपने गले तक भर लिया था और डीपथ्रोट कर रही थी। फिर आंटी ने माँ को उठाया और उसे कहा, चल मेरी जान घोड़ी बन जा।

माँ घोड़ी बनी और आंटी ने पीछे से चुत्त्ड खोल के माँ की चूत को चाटा और फिर उसकी गांड को भी ऊँगली से हिलाने लगी। माँ की चूत से पानी आ गया। और माँ बोली, सुशीला डाल दे अपना लंड मेरी चूत में।

आंटी ने अपने डिल्डो को एक साइड से पकड़ा और मां की चूत में उसका नुकीला हिस्सा घुसा दिया। मां की चूत में आधा डिल्डो घुसा के माँ को चोदने लगी आंटी। पीछे आंटी की बड़ी गांड थी और आगे माँ की सेक्सी चुत्त्ड। माँ आह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह आअई कर रही थी। और फिर आंटी ने पुरे डिल्डो को मां की चूत में डाल दिया। फिर माँ के बूब्स को पकड के आंटी जोर जोर से उसकी चूत को चोदने लगी। दोनों ने अपनी सिसकियों को दबाने के लिए माँ के बेडरूम के टीवी पर सीरियल लगा दी थी। लेकिन दोनों ने एक नजर से भी सीरियल को देखा नहीं था। वो तो अपने लेस्बियन काण्ड में ही बीजी थी।

फिर आंटी ने माँ कोक चोदना बंद किया। माँ थकी हुई थी गांड हिला हिला के। अब माँ ने डिल्डो को अपने मुहं में ले के वापस चूसा। फिर माँ ने स्ट्रेपओन को अपनी कमर के ऊपर बाँध दिया। और फिर सुशीला आंटी उसके सामने घोड़ी बन गई। माँ की चूत जैसे आंटी ने अपने इस लंड से चोदी थी वैसे ही माँ ने भी उसको चोदा।

और माँ ने तो बाद में एक कदम आगे जा के आंटी की गांड में भी डिल्डो को डाल के चोदा उसे।

दोनों का काम हो गया तो वो बातें करने लगी।

माँ:- सुशीला कैसी लगी ये चीज?

सुशीला आंटी:- स्वाती सच में इसके 1200 रूपये वसूल है। हमारे पति अब लाइफ टाइम नहीं चोदेंगे तो भी हम इस से काम चला लेंगे!

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