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नौकरानी ने मेरा लंड हिला के दिया

बात कुछ 2 साल पहले की हैं जब मैं गाज़ियाबाद के किशनपुर इलाके में दो कमरे के मकान में रहता था. मेरा पेशा मेडिकल रेप्रेज़ेन्टेटिव का था और मैं अपनी कंपनी के लिए कंडोम के विक्रय का भी ध्यान रखता था. मुझे मेडिकल और पब्लिक को फ्री सेम्पल के तौर पे देने के लिए काफी सारे कंडोम आते थे. वैसे तो मैं 18 साल की उम्र से ही पोर्न मूवीज और फ़ोटोज़ देख के मुठ मारने का आदि था मेरा लंड 7 इंच लंबा और ढाई इंच चौड़ा हैं और मैं अक्सर थूंक लगा के मुठ मार लेता था. यह बात लेकिन कुछ और हैं क्यूंकि उस दिन मेरा लंड मेरी कामवाली शीला के हिला के दिया था. शिला की उम्र 50 साल के उपर हो चली हैं और उसे चोदना का मन शायद ही हो सकता था इसलिए मैंने भी उसे सिर्फ लौड़ा चूसने और हिलाने की पेशकश की थी जिसमे से उसने दूसरी पेशकश कबूल रखी थी.

नौकरानी ने देखा मुझे लंड हिलाते हुए

उस दिन हमारी कंपनी ने एक स्ट्रोबेरी फ्लेवर का कंडोम निकाला था और मैंने दिनभर लोगो के जैसे की स्ट्रोबेरी दे रहा हूँ वैसे 100-200 कंडोम सेम्पल में दे दिए थे. मुझे पता था की लोग आज अपनी बीवी और रखैल की चूत को इसी स्ट्रोबेरी कंडोम की महक से महका देंगे. खेर मेरी ना बीवी हैं ना ही मैं गर्लफ्रेंड अफोर्ड कर सकता था इसलिए अपना काम केवल हाथ के जोरो पे चलता रहता था. मैंने दोपहर के 4 बजे घर आके अपने कपडे बदले और बेग से कंडोम निकाला. मैंने सोचा की जहाँ इतने लोग इसे चेक करेंगे मैं भी इसकी महक ले ही लूँ. अभी तो मैंने कंडोम को लंड के उपर लगाया ही था की शिला दरवाजे के पीछे से बहार आई. साली को कुछ काम होगा इसलिए जल्दी आ गई थी. उसने देखा की मेरी पेंट निचे उतरी हुई हैं और मेरे लंड के उपर एक गुलाबी कंडोम लगा हुआ हैं. वो हंसने लगी. लेकिन मुझ से रहा नहीं गया और मैंने उसे कहा, “शीला आ जाओ मेरा लंड चूस दो पुरे 200 रूपये दूंगा लंड चूसने के लिए तुम्हे.”

शीला ने अपने होंठो से अजीब मुहं बना के कहा, “साहब लौड़ा तो मैंने अपने मरद का भी नहीं चूसा आज तक..!”

मैंने थोड़े ढीले स्वर में कहा, “ठीक हैं फिर अपने हाथो से मुठ ही मार दो मुझे. मैं बहुत हैरान हूँ आज तो.”

चल तू ही हिला दे मेरा लौड़ा

शीला हंसी और वो मेरे पास आके बैठ गई. उसने कंडोम के पीछे छिपे मेरे लंड को देखा और उसे अंदाजा आ ही गया होगा की मेरा लंड कितना लंबा था. उसने अपने हाथ से जैसे मुझे हाथ लगाया मेरे बदन में आग ही लग गई जैसे की. उसके ब्लाउज के पीछे से मुझे उसके बूढ़े चुंचो की आकृति भी दिख रही थी. शीला ने मेरे लौड़े को मुठ्ठी में बंध किया हो वैसे पकड़ लिया और फिर वो अपने हाथ को जोर जोर से ऊपर निचे करने लगी. लौड़े के उपर कंडोम लगी होने से मुझे वैसे भी बहुत गुदगुदी हो रही थी और फिर शीला के हिलाने से तो जैसे की एक अलग ही मजा आ गया मुझे. शिला अब मेरे लौड़े को और भी जोर से हिलाने लगी. मैंने अपना एक हाथ उसके चुंचे के उपर रख दिया. वो चौंक के बोली, “नहीं बाबु जी मैं अपने कपडे कतई नहीं उतारूंगी.”

मैंने हंस के कहा, “शिला तुझे चोदना भी नहीं चाहता मैं, बस सिर्फ हाथ तो लगा लेने दे मुझे. और आगे कुछ नहीं करूँगा मैं.”

मेरे इतना कहने से शायद वो मान गई थी क्यूंकि उसने अपने हाथ को थोडा ऊपर किया और मेरे हाथ और चुंचे के बिच के रास्ते को साफ़ कर दिया. मैंने शीला की बूढ़े स्तन हाथ में पकडे और ब्लाउज के ऊपर से ही उनका मर्दन करने लगा. शीला के बूढ़े चुंचो में कोई जान ही नहीं थी जैसे की. मुझे ऐसे लग रहा था जैसे की मैं एक सॉफ्ट रबर की गेंद को मसल रहा हूँ, जिस में छेद हुआ हैं और सारी हवा निकल गई हैं. वैसे उसके चुंचे थे काफी बड़े, अपने ज़माने में शीला चुदाई क्विन तो रही ही होंगी. शीला का मस्त हाथ मेरे लंड को और भी मजा देना लगा जब मैंने उसके स्तन से खेलना चालू कर दिया. कंडोम के अंदर की स्ट्रोबेरी खुशबू सच में बहार फैलने लगी थी. मैंने अपनी आँखे बंध की और मैं सोचने लगा की शिला यदि जवान होती तो वो कैसे दिखती और मेरे सामने एक सेक्सी बस्टी औरत की आकृति खड़ी हो गई. ऐसा सोचते ही मेरे लंड में भी एक अलग सा नशा आ गया जैसे. मेरे लंड में एक उफान सा आ गया था अब तो.

शिला के हाथ अभी भी वही तीव्रता से चल रहे थे और मुझे पता था की अब मेरा पतन होने वाला हैं. और 2 मिनिट में ही मेरे लंड ने एक जोर की पिचकारी मारी. कंडोम का अग्रभाग मेरी मुठ से बिलकुल भर सा गया था. शीला ने अब लंड को धीरे धीरे ससे सहला के जैसे की भेंस की थान से बचा कूचा दूध निकाल रही हो वैसे लंड को निचोड़ने लगी. और सच में मेरे लौड़े के मुख से बाकी बचा और लौड़े की नली में बचा हुआ वीर्य बहार आने लगा. मेरे मन में अजब सी शांति आ गई थी. मैंने एक लंबी सांस ली और अपने लौड़े को कंडोम की झंझट से आजाद किया. मैंने लपेटा हुआ कंडोम शीला को दे दिया और उसने उसे कूड़ेदान में फेंक दिया. मैंने उठ के शीला के हाथ में 100 100 के दो नोट थमा दिए. शीला भी खुश लग रही थी क्यूंकि उतने पैसे तो उसे 3-4 दिन घर का काम कर के भी नहीं मिलने वाले थे और मैंने खुश था की लौड़े को ऐसा हेंडजॉब मैं तो कभी नहीं दे सकता था. मैंने आगे भी शीला से अपने लंड की मसाज करवाने का पूरा इरादा बना लिया हैं. बूढी हैं लेकिन उसके हाथ जो इतने मस्त चलते हैं की लौड़ा मजे ले लेता हैं…!

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