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नौकरानी की बेटी की चुदाई

Hindi kamuk story readers how are you? दोस्तों मै आज पहली कहानी भेज रहा हु ये मेरी सच्ची कहानी है जिसे मै बस आपलोगों Desi Naukrani ki Antarvasna Kamukta Indian Sex Hindi Sex Stories Chudai Ki Kahani के साथ शेयर करने के नाते लिख रहा हूँ दोस्तों मेरा नाम रविकेश है ! मैं सुल्तानपुर में अपने गाँव से पढ़ने आया था, मेरी बचपन से ही सेक्स में रूचि रही है। हमारे कमरे में खाना बनाने के लिए एक औरत आती थी, उसकी एक बहुत ही मस्त बेटी थी, कभी कभी वो भी उसके साथ आती थी ! एक बार वो औरत बीमार हो गई तो उसने अपनी बेटी को खाना बनाने के लिए भेजना चालू कर दिया ! मैं भी तो यही चाहता था। उस लड़की का नाम तब्बू था। उस दिन तब्बू खाना बनाने के लिए आई तो उसके बड़े बड़े चूचे साफ़ दिखाई दे रहे थे क्योंकि उसने एक खुले गले ब्लाउज और साड़ी पहनी थी ! जब वो झुक कर खाना बना रही थी तो मुझे उसके चूचे साफ़ नजर आ रहे थे ! मैंने उससे बात करनी शुरू कर दी। वो बेचारी मेरी बातों का जवाब दे रही थी। मैंने उससे पूछा की तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है या नहीं तो उसने कहा अभी तक तो नहीं है ! इस समय मैं उसके गोल गोल चूचो को ही देख रहा था, उसे भी यह बात पता लग गई थी ! फिर मैं उसे खाने का सामान देने के बहाने उसके पास गया और वहीं बैठ गया ! मैं बातें करते हुए उसे छूने लगा। मेरे स्पर्श से वो धीरे धीरे गर्म हो रही थी! मैंने हल्के से पहले उसके माथे पर एक छोटा सा चुम्बन लिया। उसकी आँखें बंद

फिर मैंने उसकी दोनों पलकों पर बारी बारी से चुम्बन लिया। उसकी आँखें अभी भी बन्द थी। फिर मैंने उसके गालों पर आहिस्ता से बारी बारी से चूमा। उसकी आँखें बन्द थी। इधर मेरा लण्ड तन कर लोहे की तरह कड़ा और सख्त हो गया था। फिर मैंने उसकी ठोड़ी पर चुम्बन लिया। अब उसने आँखें खोली और सिर्फ़ पूछते हुए कहा- साहब? मैंने कहा- तब्बू, तुम सिर्फ मजे लो ! आँखें बन्द ! आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | उसने झट से आँखें बन्द कर ली। मैं समझ गया, लड़की तैयार है, बस अब मज़ा लेना है और चुदाई करनी है। मैंने अब की बार उसके थिरकते हुए होठों पर हल्का सा चुम्बन किया। अभी तक मैंने छुआ नहीं था उसे। उसने फिर आँखें खोली और मैंने हाथ के इशारे से उसकी पलकों को फिर ढक दिया। अब मैं आगे बढा, उसके दोनों हाथों को सामने से हटा कर अपनी कमर के चारों तरफ़ लपेट लिया और उसे अपनी बाहों में समेटा और उसके कांपते होठों पर अपने होंठ रख दिये और चूमता रहा। कस कर चूमा अबकी बार। क्या नर्म होंठ थे, मानो शराब के प्याले। होठों को चूसना शुरु किया और उसने भी जवाब देना शुरु किया। उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और मैं उसके गुलाबी होठों को खूब चूस चूस कर मज़ा ले रहा था।

तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियाँ जो कि तन गई थी, मेरे सीने पर दब रही थी। बायें हाथ से मैं उसकी पीठ को अपनी तरफ़ दबा रहा था, जीभ से उसकी जीभ और होठों को चूस रहा था और दायें हाथ से मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया। दांया हाथ फिर अपने आप उसकी दाईं चूची पर चला गया और उसे मैंने दबाया। हाय हाय क्या चूची थी ! मलाई थी बस मलाई। अब लण्ड फुंकारें मार रहा था। बांये हाथ से मैंने उसके चूतड़ को अपनी तरफ़ दबाया और उसे अपने लण्ड को महसूस करवाया। ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी, ब्लाऊज के बटन पीछे थे, मैंने अपने दांये हाथ से उन्हें खोल दिया और ब्लाऊज को उतार फेंका। चूचियाँ जैसे कैद थी, उछल कर हाथों में आ गई। एकदम सख्त लेकिन मलाई की तरह प्यारी भी। साड़ी को खोला और उतारा। बस अब साया बचा था।वो खड़ी नहीं हो पा रही थी। उसकी आँखें अभी भी बन्द थी। मैं उसे हल्के हल्के से खींचते हुए अपने बेडरूम मैं ले आया और लेटा दिया। अब मैंने कहा- तब्बू रानी, अब तुम आँखें खोल सकती हो। “आप बहुत पाजी है साहब !” शरमाते हुए उसने आँखें खोली और फिर बन्द कर ली। मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया। लण्ड तन कर उछल रहा था। मैंने उसका साया जल्दी से खोला और खींच कर उतारा, जैसे वो चुदवाने को तैयार ही थी, कोई कच्छी नहीं पहनी हुई थी उसने। मैंने बात करने के लिये कहा- यह क्या, तुम्हारी चूत तो नंगी है? चड्डी नहीं पहनती क्या? “नहीं साहब, सिर्फ़ महीना आने में पहनती हूँ।” और शरमाते हुए कहा- साहब, परदे खींच कर बन्द करो ना।

Naukrani ki chudai kahani

बहुत रोशनी है। मैंने झट से परदों को बन्द किया जिससे थोड़ा अन्धेरा हो गया और मैं उसके ऊपर लेट गया। होठों को कस कर चूमा, हाथों से चूचियाँ दबाई और एक हाथ को उसकी बुर पर फिराया। घुंघराले बाल बहुत अच्छे लग रहे थे चूत पर। फिर थोड़ा सा नीचे आते हुए उसकी चूची को मुंह में ले लिया। अहा, क्या रस था ! बस मज़ा बहुत आ रहा था। अपनी एक अंगुली को उसकी चूत के दरार पर फिराया और फिर उसकी बुर में घुसाया। आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | अंगुली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छुरी। चूत गर्म और गीली थी। उसकी सिसकारियाँ मुझे और भी मस्त कर रही थी। मैंने उसकी चूत चीरते हुए कहा- तब्बू रानी, अब बोलो क्या करूँ? “साहब, मत तड़पाईये, बस अब कर दीजिये।” उसने सिसकारियाँ लेते हुए कहा। मैंने कहा- ऐसे नहीं, बोलना होगा, मेरी जान। मुझे अपने करीब खींचते हुए कहा- साहब, डाल दीजिये ना ! “क्या डालूँ और कहाँ?” मैंने शरारत की। दोस्तो, चुदाई का मज़ा सुनने में भी बहुत आता है। “डाल दीजिये ना अपना यह लौड़ा मेरी चूत के अन्दर !” उसने कहा और मेरे होठों से अपने होंठ चिपका लिये। इधर मेरे हाथ उसकी चूचियों को मसलते ही जा रहे थे, कभी खूब दबाते, कभी मसलते, कभी मैं चूचियों को चूसता कभी उसके होठों को चूसता। अब मैंने कह ही दिया- हाँ रानी, अब मेरा यह लण्ड तेरी बुर में घुसेगा। बोल चोद दूँ तुझे? “हाँ हाँ, चोदिये साहब, बस चोद दीजिये।” और वो एकदम गर्म हो गई थी। इसके बाद मैंने धीरे से उसकी चूत पर लण्ड रख कर धक्का दिया तो पता चला कि उसकी सील पहले ही टूटी थी। मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत में फँसा कर दो मिनट तक अंदर ही रखा, इससे उत्तेजना बढ़ती है और सेक्स में मज़ा भी मिलता है। क्या था |

मैंने लण्ड उसके बुर पर रखा और दोस्तों, फिर मैंने हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए, होठों से उसके गाल और होठों को चूसते हुए, चोदना शुरु किया। बस चोदता ही रहा। ऐसा मन कर रहा था कि चोदता ही रहूँ। खूब कस कस कर चोदा। बस चोदते चोदते मन ही नहीं भर रहा था। क्या चीज़ थी यारों, बड़ी मस्त थी। वो तो खूब उछल उछल कर चुदवा रही थी। “साहब, आप बहुत अच्छा चोद रहे हैं, चोदिये खूब चोदिये, चोदना बन्द मत कीजिये !” और उसके हाथ मेरी पीठ पर कस रहे थे, टांगें उसने मेरी चूतड़ों पर घुमा कर लपेट रखी थी और चूतड़ से उछल रही थी। खूब चुदवा रही थी और मैं चोद रहा था। मैं भी कहने से रुक ना सका- तब्बू रानी, तेरी चूत तो चोदने के लिये ही बनी है। रानी, क्या चूत है। बहुत मज़ा आ रहा है। बोल ना कैसी लग रही है यह चुदाई? “बस साहब, बहुत मजा आ रहा है, रुकिये मत, बस चोदते रहिये, चोदिये चोदिये चोदिये।” इस तरह हम ना जाने कितनी देर तक मज़ा लेते हुए खूब कस कस कर चोदते हुए झड़ गये। क्या चीज़ थी, वो तो एकदम चोदने के लिये ही बनी थी। अभी मन नहीं भरा था, 20 मिनट के बाद मैंने फिर अपना लण्ड उसके मुँह में डाला और खूब चुस

हमने 69 की पोजिशन ली और जब वो लण्ड चूस रही थी मैंने उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदना शुरु किया। खास कर दूसरी बार तो इतना मज़ा आया कि मैं बता नहीं सकता क्योंकि अबकी बार लण्ड बहुत देर तक चोदता रहा। लण्ड को झड़ने में काफ़ी समय लगा और मुझे और उसे भरपूर मज़ा देता रहा। कपड़े पहनने के बाद मैंने कहा- तब्बू रानी, बस अब चुदवाती ही रहना। वरना ये लण्ड तुम्हें तुम्हारे घर पर आकर चोदेगा। “आप यह कहानी मस्ताराम.नेट पर पढ़ रहे है | साहब, आप ने इतनी अच्छी चुदाई की है, मैं भी अब हर मौके में आपसे चुदवाऊँगी।” कपड़े पहनने के बाद भी मेरे हाथ उसकी चूचियों को हल्के हल्के मसलते रहे और मैं उसके गालों और होठों को चूमता रहा। एक हाथ उसकी बुर पर चला जाता था और हल्के से उसकी चूत को दबा देता था। “साहब अब मुझे जाना होगा।” कहा कर वो उठी। मैंने उसका हाथ अपने लण्ड पर रखा- रानी एक बार और चोदने का मन कर रहा है। कपड़े नहीं उतारूँगा !” दोस्तो, सच में लण्ड कड़ा हो गया था और चोदने के लिये मैं फिर से तैयार था। मैंने उसे झट से लेटाया, साड़ी उठाई, और अपना लौड़ा उसके बुर में पेल दिया। अबकी बार उसे भचाभच करके खूब चोदा और कस कर चोदा और खूब चोदा और चोदता ही रहा। चोदते चोदते पता नहीं कब लण्ड झड़ गया और मैंने कस कर उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया। चूमते हुए चूचियों को दबाते हुए, मैंने अपना लण्ड निकाला और अन्त में उसे विदा किया।

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