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पड़ोसन आंटी को उनके बेड पर ही चोद दिया

मेरी पड़ोसन आंटी का नाम सरिता है। लेकिन जब से आंटी को चोद लिया है तब से मैं उनको जानू बोलता हूँ। वो एक दुबली पतली सी मराठन हैं। उनके चूचे ज्यादा बड़े तो नहीं हैं लेकिन बहुत टाइट हैं। सरिता आंटी की गांड के तो क्या कहने.. सच्ची गांड मारने में मुझे बहुत ही मज़ा आता है।

हुआ कुछ ऐसे कि कुछ दिनों पहले मेरे सामने एक नया परिवार रहने के लिए आया। इस परिवार में 3 लोग थे.. मेरी जानू आंटी.. उनका पति और उनकी एक 2 साल की लड़की थी।

जानू आंटी का पति ज्यादातर अपने काम में ही लगा रहता है और जानू की तरफ़ ज्यादा नहीं दे पाता था। मेरी जानू आंटी थोड़ी कमजोर थीं.. जिसकी वजह से वो ज्यादातर बीमार रहती थीं। इसी वजह से आंटी अक्सर घर पर ही रहती थीं।

कभी-कभी मैं उनके घर पर जाया करता था और उनकी बेटी के साथ खेलकर अपना टाइम पास कर लिया करता था। पहले तो मेरे मन में आंटी के लिए कुछ भी नहीं था.. लेकिन बाद में धीरे-धीरे वे मेरी अच्छी दोस्त बन गईं।

एक दिन वो मेरे मोबाइल में गाने सुन रही थीं। तभी उन्होंने मेरे मोबाइल की गैलरी ओपन कर ली और वीडियो देखने लगीं। ये सब देखते हुए आंटी ने उसमें व्हाटसएप का एक वीडियो भी देखा जिसमें एक किसिंग का सीन था।
तो वो ये देख कर हंसने लगीं।

मैंने जब हंसने का कारण पूछा तो उन्होंने कुछ नहीं कहा और मुझे मोबाइल दे दिया।
फिर आंटी बोलीं- आज की जेनरेशन में ये सब तो चलता है।
मैं हंस दिया और बोला- आपको पसंद आया क्या?

वो एकदम से झेंप गईं.. तो मैं समझ गया कि लाइन क्लियर है और मैंने उनका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ़ खींचा तो वो मेरे आगोश में आ गईं।
फिर आंटी इठला कर बोलीं- क्यों खींचा मुझे?
मैं कुछ नहीं बोला.. बस चुप रहा.. इतने मैं आंटी की लड़की जाग गई और वो रोने लगी।

आंटी तुरन्त भाग कर अपनी लड़की को उठाने गईं.. मैं पीछे चला गया और आंटी के पीछे खड़ा होकर उनकी गांड देखने लगा। सच्ची इस वक्त झुकी हुई आंटी की गांड देख कर मेरा लंड एकदम मस्त और टाइट हो गया।

उस दिन बात आई-गई हो गई और मैं अपने घर आ गया।

कुछ दिनों बाद मैं उनके घर में दोपहर के समय गया.. उस वक्त आंटी की लड़की सोई हुई थी और उनका पति काम पर गया था। आंटी बेड पर लेटी हुई अपनी लड़की को दूध पिला रही थीं।
मुझे देखते ही आंटी ने अपनी चूची मैक्सी में डाल ली।
मैं मस्ती में बोला- पूरा दूध तो पिला दो उसको!
तो आंटी बोलीं- उसकी बड़ी चिंता हो रही है तू अपनी बता.. तुझे भी पीना है क्या??
मैंने लंड सहलाते हुए ‘हाँ’ बोल दिया।

आंटी हंसी तो मैं उनके पास जाकर बैठ गया। वो लेटी हुई थीं उनके चेहरे पर एक कातिल सी मुस्कान थी और वो मुझे बड़ी प्यासी निगाहों से देख रही थीं।
मैंने सीधे उनके होंठों को किस कर लिया।
आंटी ने मुझे धक्का दे दिया और बोलीं- ये क्या कर रहे हो?

मैं उनके ऊपर चढ़ गया और उनके होंठों को कसके किस करने लगा। वो बार-बार मुझे धक्का दे रही थीं.. पर उनके धक्कों में कोई जोर नहीं था। फिर 5 मिनट किस करने बाद वो भी मेरा साथ देने लगीं।

मैंने एक हाथ से उनकी चूचियों को दबाना चालू कर दिया। अब वो भी धीरे-धीरे गरम हो रही थीं और फिर अचानक से वो मुझ से कस कर लिपट गईं।
मैं अपना दूसरा हाथ नीचे की तरफ़ ले गया और मैक्सी के ऊपर से ही उनकी चुत को दबाना चालू कर दिया। अब मेरी जानू आंटी को कुछ तो हो रहा था और वो जोर-जोर से मुझे किस कर रही थीं।

करीब 5 मिनट बाद मैंने अपने होंठों को अलग किया तो वो मुझे देख कर आहें भर रही थीं।

मैं अब भी उनकी चुत को दबा रहा था वो ‘आह.. आअह..’ की आवाजें निकाल रही थीं।

मैंने अब उनकी नाइटी के ऊपर के दो बटन खोल दिए और उनके मम्मों को निहारा तो आंटी ने अन्दर पिंक कलर की ब्रा पहनी हुई थी। आंटी एकदम मस्त पटाखा माल लग रही थीं।

मैंने ब्रा हटा कर उनके मम्मों को चूसना चालू कर दिया.. वो मेरे बाल पकड़ कर ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की आवाजें निकाल रही थीं। करीब दस मिनट की चुसाई के बाद मैंने जानू आंटी की मैक्सी खोल दी।

आंटी ने अन्दर एक काले रंग की एकदम सेक्सी वाली छोटी सी पेंटी पहनी हुई थी.. जिसमें मेरे लंड के लिए जन्नत का रास्ता फंसा हुआ था।

आंटी की पेंटी एकदम गीली हो गई थी। मैंने उनकी चुत को पेंटी के ऊपर से ही एक किस किया तो उनके जिस्म में जैसे करेंट लगा हो। मैंने तुरंत उनकी पेंटी को उतार फेंका और उनकी चुत को चूसने लगा। चुत चटने से वो तो जैसे पागल ही हो गई थीं। आंटी मेरे बालों को पकड़ कर मुझे अपनी चुत की ओर दबा रही थीं।

मैंने अपनी जीभ उनकी चुत के अन्दर डाल कर गोल-गोल चलाने लगा.. इससे तो वो जैसे पागल हुई जा रही थीं, आंटी मस्त हो चुकी थीं और जोर-जोर से कामुक आवाजों में सीत्कार रही थीं।

मैंने अचानक अपनी एक उंगली उनकी गांड में डाल दी। इससे आंटी की एकदम से चीख ही निकल गई। आंटी मुझसे उंगली बाहर निकालने को बोलने लगीं। लेकिन मैंने उंगली नहीं निकाली बल्कि उनकी चुत को और जोर से चाटना चालू कर दिया। वो अपनी गांड के दर्द तो जैसे भूल ही गईं।

कुछ देर बाद उनकी बॉडी अकड़ने लगी और उन्होंने पानी छोड़ दिया। मैं उनकी चुत से बहते पानी को चाटने लगा और चुत को पूरा साफ़ कर दिया।

अब मैं आंटी के बगल में लेट गया। दो पल बाद उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा और हिलाने लगीं।

मैंने उनसे लंड चूसने को बोला.. तो वो मना करने लगीं। काफ़ी बोलने के बाद वो लंड चुसाई के लिए मान गईं। पहले आंटी ने धीरे से मेरे लंड के टोपे पर एक किस दिया और धीरे-धीरे पूरे लंड को मुँह में अन्दर भर लिया और लंड चूसना चालू कर दिया। मैं तो पहले से ही गर्म था.. तो ज्यादा देर टिक नहीं सका और आंटी के मुँह में ही झड़ गया।

आंटी ने तुरन्त मेरे लंड को बाहर निकाल दिया और मुझ पर चिल्लाने लगीं- ये क्या किया..?

तो मैंने कुछ नहीं बोला.. लेकिन मेरा सारा वीर्य उनकी चूचियों पर गिर गया था।

फिर आंटी ने मेरे लंड को पकड़ा और बोलीं- अब मैं अपने बेटी को कैसे दूध पिलाऊंगी?
मैंने लंड उनके मुँह की तरफ हिलाते हुए कहा- धो लेना जानू.. अभी तो लंड को फिर खड़ा करो।

तो आंटी ने जानू सुना तो मुस्कुरा कर मेरे लंड को मुँह में भर लिया और चूसने लगीं। इससे मेरा लंड फिर से कड़ा हो गया।

अब उनसे रहा नहीं जा रहा था, उन्होंने मुझसे बोला- अब नहीं रुका जा रहा है.. प्लीज़ जल्दी से चोद दो।
इतना कह कर आंटी अपनी चुत पसार कर बेड पर लेट गईं।

मैंने लंड को आंटी की चुत पर टिका कर धक्का दे दिया। मैं पहली बार किसी की चुत को चोद रहा था.. इसलिए फर्स्ट टाइम में मेरा लंड फिसल गया।

आंटी ने हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चुत की गली पर रख कर मुझे इशारा दिया। मैंने आंटी की चुत की फांकों में अपना लंड रगड़ना चालू किया। वो पागल हुई जा रही थीं।

मैंने उनकी गांड के नीचे एक तकिया रखा और एक झटका दे मारा। इस झटके से मेरा आधा लंड आंटी की चुत में चला गया। आंटी की ‘आह..’ निकल गई और वो दर्द से चिल्लाने लगीं ‘ओए धीरे-धीरे डाल.. तेरा बहुत बड़ा है।’

मैंने जानू आंटी को किस करना चालू कर दिया। इससे उनका दर्द कुछ कम हुआ। कुछ ही पलों बाद आंटी नीचे से कमर हिलाते हुए मजा लेने लगीं।

मैंने फिर एक जोरदार दे धक्का मारा.. तो इस बार मेरा पूरा लंड आंटी की चुत में उतर गया। वो फिर से चिल्लाना चाहती थीं.. लेकिन मैंने उनके होंठों पर अपने होंठों का ढक्कन लगाया हुआ था।

अब मैं रुक गया और आंटी के मम्मों को दबाने लगा। कुछ देर बाद आंटी का दर्द कम हुआ तो मैंने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। अब आंटी भी अपनी गांड उठा-उठा कर मेरे हर धक्के का जवाब दे रही थीं

अब हम लोगों की स्पीड बढ़ने लगी थी।

आंटी को भी मज़ा आ रहा था, वो बोलीं- अह.. मजा आ रहा है.. और जोर से पेलो.. प्लीज़ और तेज चोदो.. आहा आहा हाअ माँ.. मर गई.. अह.. माँ..

अब हम दोनों पूरे मजे ले रहे थे और पूरा कमरे में ‘ठप ठप’ की आवाज़ गूँज रही थी। हम दोनों की चुदाई फुल स्पीड में चल रही थी।

कुछ ही देर में उन्होंने अपने हाथों से मुझे कस कर पकड़ लिया और अपने पैरों को मेरे पैरों में फंसा का लॉक कर दिया। मैं तो जैसे किसी और दुनिया में था। उनकी गर्म चुत में अन्दर-बाहर होता मेरा लंड तो जैसे और भी कड़क हो गया था।

उन्होंने मुझसे बोला- मैं झड़ने वाली हूँ।
मैं भी आने वाला था। अब उन्होंने मुझे जोर से पकड़ लिया था और मैं भी पूरी ताकत की साथ धक्का लगा रहा था। तभी वो तेज आवाज के साथ झड़ने लगीं.. उनका गरम पानी मेरे लंड को मानो जला रहा था।

आंटी की चुत की मलाई की गर्मी से अब मेरा लंड भी झड़ने वाला हो चला था।
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मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का मारा। इस बार मैंने अपना लंड आंटी की चुत की जड़ तक अन्दर पेल दिया था और मैंने अपना पूरा पानी उनकी बच्चेदानी के अन्दर ही छोड़ दिया।

मैं थक गया था और हम दोनों की साँसें जोर-जोर से चल रही थीं।

फिर हम दोनों उठ कर बाथरूम में चले गए और वहां पर उन्होंने मेरे लंड को साफ़ किया और फिर अपनी चुत और मम्मों को भी साफ़ किया, वापस कमरे में आकर हम दोनों ने कपड़े पहने और बिस्तर पर बैठ कर बातें करने लगे।

आंटी ने बोला- आज तक मेरे पति ने भी मुझे इतना मज़ा नहीं दिया.. सच में तुम बहुत जबरदस्त चुदाई करते हो।

ये कह कर उन्होंने मुझे किस किया। किस करने के दस मिनट बाद हम लोग अलग हुए और वो खड़ी हुईं.. तो मैंने आंटी को पलटा और उनकी गांड को दबा दिया। आंटी ने स्माइल देकर जैसे गांड मारने की हामी भर दी हो।

फिर मैंने कैसे आंटी की गांड मारी और उनकी बहन को भी चोदा.. वो सब मैं अगली सेक्स स्टोरी में लिखूँगा।

अभी मैंने एक गुजराती आंटी भी फंसाई है.. उनके साथ की चुदाई की कहानी भी मैं आप सभी को लिखूंगा।

अभी बस आपको ये सेक्स स्टोरी कैसी लगी.. ज़रूर बताइएगा। आप मुझे मेल कर सकते हैं।

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