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पड़ोसन भाभी की मचलती चूत की चुसाई चुदाई

मेरा नाम सचिन है, मेरी लम्बाई 6 फिट है और मेरा जिस्म भी अच्छा ख़ासा है.. थोड़ा सावला हूँ.. पर मस्त दिखता हूँ। मेरा लन्ड 6 इंच लंबा और 3 इंच मोटा है।
मैं अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ.. मैं पिछले दो सालों से अन्तर्वासना से जुड़ा हुआ हूँ और मैंने इस पर प्रकाशित सारी कहानियाँ पढ़ी हैं।

मैं बहुत दिनों से सोच रहा था कि मैं भी अपनी कहानी लिखूँ।
यह मेरी पहली कहानी है, यह एक सत्य घटना है। अगर कोई गलती हो.. तो मुझे माफ़ करना।

हमारा घर काफी बड़ा है.. हमारे यहाँ पर बारह किरायदार रहते हैं, जिसमें से एक परिवार है.. उसमें एक भाभी रहती हैं। जिसका नाम है सरोज.. वो तो समझ लीजिए कि एक क़यामत है, उसकी उम्र 27 साल की होगी.. वह दो बच्चों की माँ है।
उसका पति एक ड्राईवर है।

बहुत दिनों से भाभी की नियत ख़राब हो गई थी मुझ पर! वो जब भी पानी भरती.. तो अपना पल्लू नीचे गिरा लेती थी और मुझे अपने आम दिखा कर वो अपनी गांड मटका-मटका कर चलती थी।
गोरी तो थी ही वो.. बस मैं तो उसकी इस अदा पर पागल हो उठता था।

एक दिन भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुलाया.. उस वक्त वहाँ कोई नहीं था.. क्योंकि उसका पति तो काम पर चला गया था.. और बच्चे स्कूल गए थे।

मैं उसके कमरे में गया.. मैंने पूछा- क्या हुआ भाभी?
बस वो मुझे देखते ही मुझसे एकदम से लिपट गई और उसने मुझे चूमना चालू कर दिया।
वो मेरे होंठों को ऐसे चूम रही थी.. मानो वह कब से प्यासी हो।
वो पागलों की तरह मुझे चूमे जा रही थी.. मैं पहले पहल तो एकदम से समझ नहीं पाया कि यह क्या हो गया.. पर बाद में मुझे मजा आने लगा।

वो मुझसे कहने लगी- सचिन.. मैं बहुत प्यासी हूँ.. तू मेरी प्यास बुझा दे.. वो तेरा ड्राइवर भाई तो मुझे प्यासी ही छोड़ देता है, वो अपना काम करके सो जाता है और मैं प्यासी ही रह जाती हूँ।

इतना सुनते ही मैंने भी भाभी को कस कर पकड़ लिया और उसके होंठों को चूसना चालू कर दिया, वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। उसका हाथ मेरी पैन्ट के ऊपर आ गया.. मेरा लण्ड तो पहले से ही खड़ा था.. उसने मेरी पैन्ट को खोल दिया और मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया।
‘वाह कितना बड़ा और मोटा है.. लगता है आज यह मेरी मचलती चूत की प्यास बुझा ही देगा।’
और यह कहते हुए उसने मेरा लण्ड चूसना चालू कर दिया। वो बहुत अनुभवी औरत थी..। वो बहुत अच्छी तरह लण्ड को चूस रही थी.. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर मैंने उसे खड़ा किया और उसकी साड़ी निकाल फेंकी और ऊपर से ही उसके मम्मों को दबाने लगा। मैंने उसका ब्लाउज को भी निकाल दिया.. वो अन्दर ब्रा नहीं पहने हुई थी तो ब्लाउज हटते ही उसके चूचे बाहर आ गए।
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मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया। मैं उसके मम्मों को चूसने लगा तो उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगी थीं ‘ह्म्म्म.. आअह्ह ह्हह.. और.. जोर से.. हम्म्म काट लो इनको.. आज सारा रस पी जाओ.. इनको काटो.. और जोर से.. आआह्ह.. ओईह्हह.. हम्मम्म म्मम्मम..’

मैं उसके पेट को चूमता हुआ नीचे आ गया और मैंने उसका पेटीकोट भी उतार दिया, उसकी गोरी-गोरी जाँघों में उसकी चूत फड़क रही थी, उसकी चूत पर छोटे-छोटे बाल उगे हुए थे।
क्या मस्त नज़ारा था वो..

अब वो बिस्तर पर पूरी नंगी पड़ी थी और मैंने भी अपनी टी-शर्ट उतार दी थी, अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे, मैं भाभी की चूत को चाटने लगा।
भाभी ने भी मेरा सर अपनी चूत में दबा दिया और कहने लगीं- ह्म्म्म चाट.. इसे चाट.. ह्म्म्म्म मम्म.. और जोर से.. फाड़ दे आज.. अपनी भाभी की चूत..

मैं भी मज़े से चूत चाट रहा था।
उसने मचलते हुए अपनी पूरी टांगें पसार दीं और कहने लगी- प्लीज़.. चाट और जोर-जोर से चाट ना..
मैं भी उसकी पकौड़े सी फूली चूत चाटता जा रहा था और साथ में उसके मम्मों को भी दबाए जा रहा था।

‘हम्म्म.. चाट.. मैं आने वाली हूँ कुत्ते.. आज मेरी चूत का भोसड़ा बना दे.. फाड़ दे इसे.. चूस जा मादरचोद.. आज इसका सारा रस पी जा.. सारा रस इस निगोड़ी चूत का.. आअह ह्हह.. हम्मम्म म्मम.. आई.. मर्रर्र… गईईई मैं आ.. रहीई.. हूँ.. ओह्ह्ह.. ह्म्म्म्म.. और तेज चाट..’
भाभी ने मेरा सर पकड़ा और सारा रस मेरे मुँह में छोड़ दिया। मैं भी उसका सारा पानी चाट गया.. सारा मैदान साफ़ कर दिया।

भाभी ने मुझे अपने गले से लगा लिया और किस लेने लगी- आज तुमने मुझे बहुत मज़ा दिया है।
मैंने कहा- भाभी अब इस नागराज का क्या होगा?

भाभी तुरंत उठी और मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लग गई, मैं भी भाभी के मुँह को चूत समझ कर चोदने लगा।
‘हम्म्म.. भाभी.. ऐसे ही चूसो मज़ा आ रहा है.. हाआ.. भाभी.. आआह्ह ह्ह.. हम्मम.. तू तो बहुत बड़ी रंडी है साली छिनाल.. हाँ चूसो.. साली कुतिया.. और चूस माँ की लवड़ी.. ह्म्म्म्म.. भाभी ले.. मैं आने वाला हूँ।’

भाभी ने इशारे से कहा कि मेरे मुँह में ही झड़ना और मैंने अपना सारा वीर्य भाभी के मुँह में छोड़ दिया।
भाभी ने रस चूस लिया और कहने लगी- कितनी नमकीन मिठास है.. इसमें मज़ा आ गया..
वो सारा माल चाट गई।

अब हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर लेट गए।

लेकिन थोड़ी ही देर बाद भाभी कहने लगी- सचिन, अब जल्दी से अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दो.. देखो ये लण्ड के लिए कैसे मचल रही है..
मैंने कहा- अभी इसकी खुजली मिटा देता हूँ मेरी जान.. तू बस इसको फिर से खड़ा कर दे।

भाभी मेरे लण्ड को फिर से चूसने लगी और वो फिर से अपने रूप में आ गया।
मैंने भाभी को लेटाया और भाभी की चूत चाटने लगा और मम्मों को दबा रहा था।
‘उह्ह.. ह्म्म्म्म्म्म.. अब और मत तड़पाओ सचिन.. और अपना लण्ड डाल दो ना।’

मैंने भी देर ना करते हुए भाभी की दोनों टाँगों को अपने कधों पर रखा और अपना लन्ड चूत के मुँह पर लगाकर एक जोरदार धक्का मारा। मेरा पूरा लण्ड भाभी की चूत की गहराइयों में उतरता चला गया।

भाभी के मुँह से दबी सी आवाज निकली- आआ.. आह्ह्ह ह्ह्ह्ह.. उईईई माँआअ.. मरर गई..
मैंने फिर अपना लण्ड बाहर निकाला और पूरी ताकत से दूसरा झटका मार दिया। लंड ‘फच्छ’ की आवाज करते हुए पूरा चूत में समां गया।

अब मैं जोर-जोर से झटके पे झटके मारे जा रहा था।
भाभी कराह रही थी- ह्म्म्म्म.. आआह्ह ह्हहह्ह.. फाड़ दो आअज.. मेरी चूत को.. उफ्फ्फ़.. ह्म्म्म जोर से.. तेज्ज.. मज़ा आ रहा है..।
‘ले साली.. ले.. चुदासी..’

भाभी जोर-जोर से चिल्ला रही थी- आज से मैं तेरी ही हूँ.. जो करना है.. कर.. अह्ह्ह्ह.. उफ़्फ़्फ़..
भाभी अपने चूतड़ों को उठा कर मेरा साथ दे रही थी और मैं पूरे जोश में भाभी की चुदाई कर रहा था।
कुछ देर में ही भाभी कहने लगी- मैं आ रही हूँ.. आह्ह.. उफ़्फ़्फ़.. और जोर से.. आआअ रही हूँ.. मैं झड़ने वाली हूँ।
मैंने कहा- भाभी.. मैं भी आ रहा.. दोनों साथ में झड़ेंगे.. उफ्फ आह्ह्ह.. ह्म्म्म..

बस दो तीन झटकों के बाद हम दोनों का लावा फूट पड़ा और मैं भाभी की चूत में ही झड़ गया और भाभी के ऊपर ही लेट गया।
फिर थोड़ी देर में उठा और भाभी को भी उठाया। हम दोनों ने कपड़े पहने.. फिर भाभी ने मुझे होंठों पर एक लंबा चुम्बन लिया और फिर मैं चला आया।
अब हमें जब भी मौका मिलता है.. हम चुदाई करते हैं।

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